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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले की सफलता के बाद समाजवादी पार्टी ने नए साल की शुरुआत भी इसी रणनीति के साथ की है। 2027 से पहले पूरी तरह चुनावी मोड में आते हुए सपा ने पीडीए पंचांग जारी किया है। पार्टी इसे सिर्फ कैलेंडर नहीं, बल्कि सामाजिक-राजनीतिक चेतना का माध्यम मान रही है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस पंचांग को साझा किया। पोस्ट सामने आते ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। पंचांग के साथ लिखा गया संदेश — “पीडीए पंचांग: हर दिन कल्याण” — पार्टी की दिशा और मंशा को साफ तौर पर दिखाता है।

पंचांग में क्या है खास?

पीडीए पंचांग में केवल तिथियां और पर्व ही नहीं, बल्कि समाज के उन चेहरों को प्रमुखता दी गई है, जिन्होंने सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष किया।

इसमें शामिल हैं:

पिछड़े और दलित समाज के महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि

सामाजिक आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण दिन

राष्ट्रीय पर्व और ऐतिहासिक दिवस

अमावस्या, पूर्णिमा और प्रमुख व्रत-त्योहार

पार्टी का मानना है कि इन तारीखों के ज़रिए सामाजिक चेतना को मजबूत किया जा सकता है।

पिछड़ा-दलित वर्ग से भावनात्मक जुड़ाव की कोशिश

पंचांग में सावित्रीबाई फुले, ईवी पेरियार, भगवान बिरसा मुंडा, डॉ. भीमराव अंबेडकर, चौधरी चरण सिंह, उधम सिंह, रमाबाई अंबेडकर, डॉ. राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर, कांशीराम, जयप्रकाश नारायण और मुलायम सिंह यादव जैसे नाम शामिल किए गए हैं।
इन सभी को सामाजिक जागरण और बदलाव के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले की जयंती पर लखनऊ के लोहिया सभागार में पंचांग का विमोचन किया गया। इसके अगले ही दिन वाराणसी में एमएलसी आशुतोष सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ इसे आम लोगों में वितरित किया।

अगड़े समाज को भी साधने की कोशिश

सपा ने इस बार केवल पीडीए तक सीमित रहने के बजाय संतुलन साधने का प्रयास भी किया है। पंचांग में स्वामी रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, दयानंद सरस्वती, छत्रपति शिवाजी और जनेश्वर मिश्र जैसे नामों को भी स्थान दिया गया है।
पार्टी के भीतर इसे सर्वसमाज को जोड़ने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

भाजपा का हमला, सपा का जवाब

पीडीए पंचांग को लेकर भाजपा ने सपा पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेताओं ने इसे सनातन विरोधी बताया, जबकि सांसद मनोज तिवारी ने इसे “पाकिस्तानी कैलेंडर” कहकर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया।

वहीं, पंचांग को डिजाइन करने वाले सपा प्रदेश सचिव अजय चौरसिया का कहना है कि इसमें समाज के हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। उनके मुताबिक, जिन विचारधाराओं ने देश और सनातन परंपरा को नई दिशा दी, उन्हें भी सम्मान के साथ शामिल किया गया है।

सिर्फ कैलेंडर नहीं, राजनीतिक संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीडीए पंचांग के जरिए सपा 2027 से पहले अपनी वैचारिक जमीन मजबूत करना चाहती है। यह पंचांग पार्टी के लिए संगठनात्मक सक्रियता, सामाजिक संवाद और वोट बैंक को भावनात्मक रूप से जोड़ने का माध्यम बन सकता है।