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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला अब देश की सामरिक सुरक्षा का एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद बदली वैश्विक युद्ध स्थितियों को देखते हुए, मेरठ में देश का पहला मानव रहित विमान (UAV) और ड्रोन रनवे तैयार किया जाएगा। सीमा सड़क संगठन (BRO) ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए 406 करोड़ रुपये का टेंडर जारी कर दिया है। यह प्रोजेक्ट न केवल भारत की सैन्य ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि आपदा प्रबंधन में भी गेमचेंजर साबित होगा।

900 एकड़ में फैलेगा 'ड्रोन हब', BRO ने जारी किया टेंडर

बीआरओ (BRO) देहरादून के मुख्य अभियंता ने इस 406 करोड़ रुपये की परियोजना का खाका तैयार कर लिया है। योजना के अनुसार, चयनित एजेंसी को अगले 7 महीनों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) सौंपनी होगी। डीपीआर की मंजूरी मिलते ही अगले 18 महीनों में निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि निर्माण के बाद 36 महीनों तक इसके रखरखाव और निगरानी की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई है।

किलो रोड पर बनेगा 2 किलोमीटर लंबा रनवे

मेरठ के किला रोड स्थित मिलिट्री फार्म की 900 एकड़ जमीन को इस प्रोजेक्ट के लिए चिन्हित किया गया है। यहां 2,110 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे बनाया जाएगा। यह रनवे सिर्फ छोटे ड्रोन्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मध्यम श्रेणी के ट्रांसपोर्ट विमान जैसे C-295 और C-130 को भी संभालने की क्षमता रखेगा। विमानों और ड्रोन्स को सुरक्षित रखने के लिए यहां 60 मीटर चौड़े और 50 मीटर लंबे दो विशाल हैंगर भी बनाए जाएंगे।

मिलिट्री फार्म की ऐतिहासिक जमीन पर 'भविष्य की तैयारी'

जिस जमीन पर यह रनवे बनने जा रहा है, उसका इतिहास बहुत पुराना है। मेरठ छावनी में मिलिट्री फार्म की स्थापना 1908 में हुई थी, जिसे 2017 में बंद कर दिया गया था। मवाना रोड से किला रोड तक फैला यह विशाल क्षेत्र फिलहाल सैन्य प्रशिक्षण के लिए उपयोग किया जाता है। हाल ही में बरेली से आए सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस स्थल का मुआयना कर प्रोजेक्ट की तैयारियों का जायजा लिया था।

सामरिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रोजेक्ट?

'ऑपरेशन सिंदूर' ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और मानव रहित विमानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होने वाली है। मेरठ में बनने वाला यह डेडिकेटेड ड्रोन रनवे भारत की निगरानी क्षमताओं को बढ़ाएगा और आपातकालीन स्थितियों में तुरंत सहायता पहुंचाने में मदद करेगा। यह प्रोजेक्ट रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।