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Prabhat Vaibhav,Digital Desk :  पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के बादलों ने न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है, बल्कि अब इसका सीधा असर भारतीयों की सेहत पर भी दिखने लगा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तनाव के कारण भारतीयों में एक 'साइलेंट हेल्थ रिस्क' यानी खामोश स्वास्थ्य जोखिम तेजी से पनप रहा है। युद्ध की आहट और उससे पैदा होने वाली अनिश्चितता ने आम लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को निशाने पर लिया है। डॉक्टरों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में तनाव और चिंता से जुड़ी बीमारियों के मरीजों में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है, जो आने वाले समय के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है।

अनिश्चितता का माहौल और मानसिक सेहत पर प्रहार

ईरान-अमेरिका के बीच जारी खींचतान के कारण शेयर बाजार में गिरावट और महंगाई बढ़ने के डर ने भारतीयों के मन में एक गहरा असुरक्षा भाव पैदा कर दिया है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि वैश्विक संकट की खबरें जब लगातार टीवी और सोशल मीडिया पर आती हैं, तो यह 'कॉमन स्ट्रेस' (सामान्य तनाव) को 'क्रोनिक एंग्जायटी' (पुरानी चिंता) में बदल देती हैं। लोग भविष्य को लेकर आशंकित हैं, जिसका सीधा असर उनकी नींद और मानसिक शांति पर पड़ रहा है। 'न्यूज एंग्जायटी' के कारण लोगों में चिड़चिड़ापन, घबराहट और एकाग्रता में कमी जैसे लक्षण आम होते जा रहे हैं।

दिल की सेहत और हाई ब्लड प्रेशर का बढ़ता खतरा

इस साइलेंट हेल्थ रिस्क का सबसे भयावह पहलू शारीरिक बीमारियों के रूप में सामने आ रहा है। डॉक्टरों ने अलर्ट जारी किया है कि लगातार तनाव में रहने से शरीर में 'कोर्टिसोल' हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर दिल की बीमारियों का कारण बनता है। विशेष रूप से उन लोगों में हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) की शिकायत बढ़ रही है जो पहले से ही किसी न किसी बीमारी से जूझ रहे हैं। तनाव के कारण हृदय गति का अनियमित होना और पैनिक अटैक के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि इस दौर में अपनी सेहत को लेकर बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें।

इन बीमारियों के प्रति रहें सावधान और ऐसे करें बचाव

इस संकटपूर्ण समय में डॉक्टरों ने कुछ खास बीमारियों को लेकर अलर्ट रहने को कहा है। इसमें अनिद्रा (Insomnia), पाचन संबंधी समस्याएं, माइग्रेन और मधुमेह (Diabetes) का अनियंत्रित होना शामिल है। बचाव के लिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि लोग 'डिजिटल डिटॉक्स' अपनाएं, यानी युद्ध और तनाव से जुड़ी खबरों को देखने का समय सीमित करें। योग, प्राणायाम और शारीरिक व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। यदि आपको सीने में भारीपन या अत्यधिक घबराहट महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। याद रखें, बाहरी शांति हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन अपनी आंतरिक शांति और स्वास्थ्य की रक्षा करना हमारे वश में है।