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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की सियासत और प्रशासनिक गलियारे के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अता हसनैन ने बिहार के नए राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। राजधानी पटना स्थित राजभवन के दरबार हॉल में आयोजित एक गरिमामय समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने नवनियुक्त राज्यपाल को विधिवत शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री समेत मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ सदस्य और आला अधिकारी मौजूद रहे। अता हसनैन की नियुक्ति को बिहार के विकास और सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी अहम माना जा रहा है।

राजभवन में शपथ ग्रहण की भव्यता

समारोह की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई, जिसके बाद मुख्य सचिव ने राष्ट्रपति द्वारा जारी नियुक्ति पत्र को पढ़कर सुनाया। जैसे ही अता हसनैन ने शपथ पत्र पर हस्ताक्षर किए, पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। नए राज्यपाल को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। अपनी शालीनता और कड़क अनुशासन के लिए पहचाने जाने वाले अता हसनैन ने शपथ लेने के बाद सभी का अभिवादन स्वीकार किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें फूलों का गुलदस्ता भेंट कर नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। राजभवन के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और मेहमानों की सूची में कई गणमान्य व्यक्ति शामिल थे।

कौन हैं बिहार के नए गवर्नर अता हसनैन?

अता हसनैन का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और रणनीतिक मामलों के मंझे हुए जानकार माने जाते हैं। सेना में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाकों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी छवि एक बौद्धिक और कुशल प्रशासक की रही है। शिक्षा और सामाजिक सुधारों के प्रति उनका झुकाव हमेशा से रहा है, ऐसे में बिहार जैसे शिक्षा के केंद्र रहे राज्य में उनकी भूमिका काफी प्रभावशाली होने की उम्मीद है। जानकार मानते हैं कि उनकी प्रशासनिक क्षमता का लाभ बिहार के विश्वविद्यालयों और राज्य की कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने में मिलेगा।

नई चुनौतियों और प्राथमिकताओं पर नजर

शपथ ग्रहण के बाद अब सबकी निगाहें अता हसनैन के अगले कदमों पर टिकी हैं। बिहार में राज्यपाल की भूमिका विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उच्च शिक्षा में सुधार, सत्रों को नियमित करना और राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रह सकता है। उन्होंने अनौपचारिक बातचीत में संकेत दिया कि वे बिहार की गरिमा और विकास के लिए समर्पित भाव से काम करेंगे। विपक्षी दलों के नेताओं ने भी उनकी नियुक्ति पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, जिससे उम्मीद जगती है कि राजभवन और सरकार के बीच एक सुगम तालमेल बना रहेगा।