सोशल मीडिया पर DSP अंजू यादव का आपत्तिजनक कमेंट हुआ वायरल
राजस्थान के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में इस वक्त एक महिला पुलिस अधिकारी के कड़े तेवर और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने पर बहुत बड़ी गाज गिरी है। अजमेर जिले के किशनगढ़ में ट्रैफिक वृत्ताधिकारी (DSP) के पद पर तैनात रहीं महिला अफसर अंजू यादव को राज्य सरकार ने तुरंत प्रभाव से पदस्थापित आदेशों की प्रतीक्षा (APO - Awaiting Posting Orders) में रखते हुए पुलिस मुख्यालय जयपुर में उपस्थिति दर्ज कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। डीएसपी अंजू यादव का सबसे पहले एक वकील के साथ तीखी बहस के दौरान थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद वकीलों में आक्रोश फैल गया। इस विवाद के बीच जलती आग में घी डालने का काम डीएसपी अंजू यादव के सोशल मीडिया पर किए गए एक अत्यंत आपत्तिजनक कमेंट ने किया, जिसके बाद राजस्थान भर के वकीलों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और सरकार को विवश होकर उनके खिलाफ यह कड़ा प्रशासनिक एक्शन लेना पड़ा।
वकील को थप्पड़ मारने से शुरू हुआ विवाद और सोशल मीडिया कमेंट से भड़का वकीलों का गुस्सा
यह पूरा हाई-प्रोफाइल विवाद अजमेर के किशनगढ़ इलाके से शुरू हुआ, जहां ट्रैफिक पुलिस अधिकारी के रूप में तैनात डीएसपी अंजू यादव की एक स्थानीय वकील के साथ वाहन चेकिंग और ट्रैफिक नियमों को लेकर कहासुनी हो गई। चश्मदीदों और सामने आए वीडियो के अनुसार, बहस इतनी ज्यादा बढ़ गई कि महिला अधिकारी ने अपना आपा खो दिया और वकील को थप्पड़ जड़ दिया। इस घटना के बाद अजमेर और किशनगढ़ बार एसोसिएशन के वकीलों ने काम ठप कर दिया और डीएसपी के निलंबन व आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। अभी वकील इस घटना का विरोध कर ही रहे थे कि सोशल मीडिया पर डीएसपी अंजू यादव के नाम से एक विवादित और आपत्तिजनक कमेंट वायरल हो गया, जिसमें वकीलों के खिलाफ कथित तौर पर अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इस कमेंट ने पहले से चले आ रहे विवाद को और भी हवा दे दी, जिससे पूरे प्रदेश के वकीलों में भारी आक्रोश फैल गया।
पूरे राजस्थान में वकीलों का कार्य बहिष्कार और सरकार का कड़ा फैसला: डीएसपी अंजू यादव APO
डीएसपी अंजू यादव की इस हरकत और आपत्तिजनक पोस्ट के विरोध में जयपुर, अजमेर, जोधपुर और उदयपुर समेत राजस्थान के तमाम बड़े शहरों की अदालतों में वकीलों ने न्यायिक कार्य का पूर्ण बहिष्कार (Pen Down Strike) कर दिया। वकीलों के संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और पुलिस प्रशासन ने महिला अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की, तो राज्यभर की अदालतों में तालेबंदी की जाएगी और आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा। मामले की संवेदनशीलता और अदालती काम-काज प्रभावित होने के खतरे को देखते हुए राजस्थान के गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक (DGP) ने देर रात कड़ा फैसला लेते हुए डीएसपी अंजू यादव को तुरंत प्रभाव से एपीओ (APO) कर दिया। उनका मुख्यालय अजमेर से बदलकर पुलिस महानिदेशक कार्यालय (PHQ) जयपुर तय किया गया है, जिसका मतलब है कि उन्हें किशनगढ़ ट्रैफिक वृत्ताधिकारी के पद से हटा दिया गया है।
विवादों से रहा है पुराना नाता, प्रशासनिक सेवाओं में आचार संहिता पर उठे गंभीर सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब डीएसपी अंजू यादव अपनी तीखी कार्यशैली या बयानों को लेकर विवादों में आई हों। इससे पहले भी उनके रवैये को लेकर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जनसेवा और कानून-व्यवस्था संभालने वाले जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारियों के लिए संयम और मर्यादित भाषा कितनी आवश्यक है। कानूनी जानकारों और पूर्व पुलिस अधिकारियों का मानना है कि सिविल सर्विसेज कंडक्ट रूल्स (आचार संहिता) के तहत किसी भी पुलिस अधिकारी को सार्वजनिक मंचों या सोशल मीडिया पर इस तरह के आपत्तिजनक विचार व्यक्त करने की सख्त मनाही है। यदि कोई अधिकारी इस मर्यादा का उल्लंघन करता है, तो उससे विभाग की छवि खराब होती है।