अवध यूनिवर्सिटी में हड़कंप! यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में सीनियर प्रोफेसर सस्पेंड

अवध यूनिवर्सिटी में हड़कंप! यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में सीनियर प्रोफेसर सस्पेंड

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित प्रतिष्ठित डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय (Dr. Ram Manohar Lohia Avadh University) से एक बेहद शर्मनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब फाइन आर्ट्स विभाग की छात्राओं ने यूनिवर्सिटी के एक सीनियर प्रोफेसर और विभाग के पूर्व कोऑर्डिनेटर पर गंभीर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। मामला तूल पकड़ते ही विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया और फौरन कड़ा कदम उठाते हुए आरोपी प्रोफेसर को निलंबित (Suspend) कर दिया है। इस घटना के बाद से पूरे यूनिवर्सिटी परिसर और छात्र संगठनों में रोष का माहौल है, साथ ही उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

फाइन आर्ट्स विभाग की छात्राओं और अभिभावकों ने की थी लिखित शिकायत

यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब फाइन आर्ट्स विभाग की छात्राओं ने अपने अभिभावकों के साथ सीधे विश्वविद्यालय के कुलपति (Vice-Chancellor) से मुलाकात की और प्रोफेसर के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित छात्राओं का आरोप था कि आरोपी प्रोफेसर उन्हें अपने केबिन में अकेले बुलाते थे, उनके साथ अयोग्य और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते थे तथा उन्हें गलत तरीके से छूने की कोशिश करते थे। पीड़िताओं में एक छात्रा आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार से ताल्लुक रखती है, जिसने प्रोफेसर पर गंभीर मानसिक प्रताड़ना और अनुचित दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। शुरुआत में इस मामले को दबाने या गोपनीय रखने की कोशिश की गई थी, लेकिन जब छात्राओं और उनके परिजनों का गुस्सा फूटा और उन्होंने न्याय के लिए कड़ा रुख अपनाया, तो प्रशासन को तुरंत एक्शन लेना पड़ा।

आरोपी प्रोफेसर विनोद कुमार श्रीवास्तव सस्पेंड, एमबीए विभाग से किए गए संबद्ध

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, आरोपी प्रोफेसर की पहचान अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रोफेसर तथा सीनियर फैकल्टी डॉ. विनोद कुमार श्रीवास्तव के रूप में हुई है। कुलपति प्रो. बिजेंद्र सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रोफेसर विनोद कुमार श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें यूनिवर्सिटी के एमबीए विभाग से संबद्ध कर दिया गया है, ताकि वे जांच प्रक्रिया को किसी भी प्रकार से प्रभावित न कर सकें। हालांकि, आरोपी प्रोफेसर ने अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को पूरी तरह से निराधार और खुद के खिलाफ रची गई साजिश करार दिया है, लेकिन शुरुआती साक्ष्यों और छात्राओं के बयानों के आधार पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई का रास्ता चुना है।

रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में गठित हुई जांच कमेटी, होगी कड़ी कार्रवाई

मामلا तूल पकड़ने और यूनिवर्सिटी की छवि धूमिल होने के बाद प्रशासन ने इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच करने के लिए एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में विशेष समिति बनाई गई है, जो सभी पक्षों, पीड़ित छात्राओं और आरोपी प्रोफेसर से आमने-सामने पूछताछ कर रही है। कुलसचिव ने स्पष्ट किया है कि यूजीसी (UGC) के दिशा-निर्देशों और पॉश एक्ट (POSH Act) के तहत नियमों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। जांच कमेटी की अंतिम रिपोर्ट आते ही आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ और अधिक कठोर कानूनी तथा विभागीय बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा सकती है।

यूनिवर्सिटी परिसरों में महिला सुरक्षा और अनुशासन पर उठे गंभीर सवाल

इस हाई-प्रोफाइल मामले ने एक बार फिर से देश भर के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाली बेटियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जिन शिक्षकों के कंधों पर छात्रों के भविष्य को गढ़ने और उन्हें सुरक्षित माहौल देने की जिम्मेदारी होती है, जब वही शिक्षक इस तरह के घृणित कृत्यों में लिप्त पाए जाते हैं, तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन जाता है। अवध यूनिवर्सिटी की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि यदि छात्राएं हिम्मत जुटाकर आवाज उठाएं, तो बड़े से बड़े ओहदे वाले शख्स को भी कानून के दायरे में लाया जा सकता है। फिलहाल, अयोध्या से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश के शैक्षणिक गलियारों में इस निलंबन की कार्रवाई की चर्चा जोरों पर है और हर कोई जांच कमेटी की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।