मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए दिवाली पर कौन-सा श्री यंत्र करें स्थापित? खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला दिवाली का पावन पर्व धन, वैभव और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का सबसे बड़ा और शुभ अवसर माना जाता है। इस दिन हर कोई अपने घर-परिवार में सुख, शांति और कभी न खत्म होने वाली धन-दौलत की कामना के साथ पूरे विधि-विधान से महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना करता है। ज्योतिष और वैदिक शास्त्रों में मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के कई अचूक उपाय बताए गए हैं, लेकिन इनमें से सबसे शक्तिशाली और प्रभावी माध्यम 'श्री यंत्र' की स्थापना को माना गया है। श्री यंत्र को यंत्रराज यानी सभी यंत्रों का राजा कहा जाता है, जिसमें धन की देवी लक्ष्मी और स्वयं भगवान विष्णु का वास माना गया है। दिवाली की रात अगर सही नियम और शुभ मुहूर्त में सही श्री यंत्र की स्थापना कर ली जाए, तो घर का दरिद्र दूर भाग जाता है और पूरे साल धन का आगमन बना रहता है। हालांकि, बाजार में मिलने वाले कई तरह के श्री यंत्रों में से सही का चुनाव करना और उसकी प्रामाणिकता को पहचानना एक बड़ा काम है, क्योंकि गलत या खंडित श्री यंत्र स्थापित करने से मनचाहा फल नहीं मिलता।
दिवाली पूजन में श्री यंत्र का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों में श्री यंत्र को अत्यंत पवित्र और चमत्कारी माना गया है। यह केवल धातु या पत्थर की कोई आकृति नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा का एक विशाल केंद्र है। मान्यता है कि जिस घर में प्रतिदिन श्री यंत्र की पूजा होती है, वहां नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष कभी टिक नहीं पाते। दिवाली की महालक्ष्मी पूजा के दौरान जब श्री यंत्र को स्थापित कर वैदिक मंत्रों द्वारा इसका अभिषेक और पूजन किया जाता है, तो इससे निकलने वाली सकारात्मक तरंगें पूरे घर के वातावरण को पवित्र कर देती हैं। पंडितों और ज्योतिषियों का मानना है कि मां लक्ष्मी की प्रतिमा के साथ श्री यंत्र की पूजा करने से धन वृद्धि के योग कई गुना बढ़ जाते हैं। यह घर में सुख, शांति, व्यापार में उन्नति और कर्ज से मुक्ति दिलाने का सबसे अचूक जरिया माना गया है।
मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए कौन-सा श्री यंत्र है सबसे उत्तम?
जब आप बाजार में श्री यंत्र खरीदने जाते हैं, तो आपको मुख्य रूप से दो प्रकार की बनावट वाले श्री यंत्र देखने को मिलते हैं। पहला होता है 'भू पृष्ठ' जो समतल धातु की प्लेट पर उकेरा जाता है, और दूसरा होता है 'मेरु पृष्ठ' या 'महामेरु श्री यंत्र', जो पिरामिड की तरह ऊपर की ओर उठा हुआ 3D संरचना में होता है। शास्त्रों के अनुसार, गृहस्थ जीवन में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति के लिए 'मेरु पृष्ठीय श्री यंत्र' को सबसे श्रेष्ठ और फलदायी माना गया है। धातु के लिहाज से देखें तो स्फटिक (क्वार्ट्ज क्रिस्टल), अष्टधातु, शुद्ध तांबा और चांदी से बने श्री यंत्र को स्थापित करना सबसे शुभ होता है। इनमें से स्फटिक का श्री यंत्र मां लक्ष्मी को सबसे प्रिय है क्योंकि यह शीतलता और शुद्धता का प्रतीक है। वहीं, अष्टधातु और तांबे के श्री यंत्र का स्थायित्व और ऊर्जा चक्र बहुत मजबूत होता है जो घर के वास्तु दोषों को मिटा देता है।
श्री यंत्र खरीदते समय इन जरूरी बातों का रखें खास ध्यान
बाजार में मिलने वाले कई श्री यंत्र शास्त्रसम्मत नहीं होते, इसलिए खरीदारी करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों की जांच कर लेना बेहद जरूरी होता है। सबसे पहली बात यह है कि श्री यंत्र की संरचना बिल्कुल सटीक होनी चाहिए। इसमें बने 9 त्रिकोण (त्रिभुज) एक-दूसरे को सही तरीके से काटते हुए दिखने चाहिए, जिनमें से 5 त्रिकोण नीचे की ओर (शक्ति का प्रतीक) और 4 त्रिकोण ऊपर की ओर (शिव का प्रतीक) बने होते हैं। अगर कोई भी त्रिभुज गलत तरीके से उकेरा गया है या आपस में सही से नहीं मिलता, तो ऐसा श्री यंत्र अशुद्ध माना जाता है। दूसरी बात, यंत्र कहीं से भी खंडित, टूटा हुआ, घिसा हुआ या खरोंच वाला नहीं होना चाहिए। शीशे या प्लास्टिक से बने सस्ते श्री यंत्रों को घर में स्थापित करने से बचना चाहिए क्योंकि उनमें ऊर्जा ग्रहण करने की क्षमता नहीं होती। हमेशा प्रामाणिक दुकान से ही शुद्ध स्फटिक, अष्टधातु या तांबे का ही श्री यंत्र खरीदें।
दिवाली पर श्री यंत्र की स्थापना और पूजन की सही विधि
दिवाली की शाम या शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा के साथ ही श्री यंत्र की स्थापना की जानी चाहिए। स्थापना से पहले श्री यंत्र को शुद्ध पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) और फिर गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद इसे लाल या पीले रंग के स्वच्छ रेशमी कपड़े पर स्थापित करें। पूर्व या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा को श्री यंत्र स्थापित करने के लिए सबसे उत्तम माना गया है। पूजन के दौरान श्री यंत्र पर लाल चंदन, कुमकुम, अक्षत और गुलाब के ताजे फूल अर्पित करें। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः" या श्री सूक्त का पाठ करें। ध्यान रखें कि स्थापना के बाद रोजाना श्री यंत्र के सामने घी का दीपक जलाकर आरती अवश्य करें और इसे गंदे हाथों से छूने से बचें।
नियमित पूजन से घर में होगा धन का स्थायी वास
केवल दिवाली के दिन पूजा करके श्री यंत्र को छोड़ देना सही नहीं है। श्री यंत्र अपनी पूर्ण ऊर्जा तभी प्रदान करता है जब इसकी प्रतिदिन सेवा और स्वच्छता का ध्यान रखा जाए। सुबह स्नान के बाद श्री यंत्र का दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि आपके व्यापार में लगातार घाटा हो रहा हो या घर में अनावश्यक खर्चे बढ़ गए हों, तो श्री यंत्र के नियमित दर्शन और मंत्र जाप से सकारात्मक बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। धनतेरस या दिवाली के दिन लाया गया सिद्ध श्री यंत्र आपके पूरे परिवार के लिए तरक्की के नए दरवाजे खोल सकता है और घर में सुख-शांति का वातावरण बनाए रखता है।