Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ज्योतिष में शनि को कर्म, अनुशासन और न्याय का प्रतीक माना जाता है। शनि व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल देता है, इसीलिए इसे "कर्मफल दाता" भी कहा जाता है। शनि का प्रभाव कठोर माना जाता है, लेकिन यह व्यक्ति को जीवन में धैर्य, संघर्ष और जिम्मेदारी सिखाता है। जब शनि अशुभ स्थिति में होता है, तो यह विलंब, बाधाओं, मानसिक तनाव, आर्थिक दबाव और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। हालांकि, जब शनि शुभ स्थिति में होता है, तो यह व्यक्ति को धैर्य, संयम और अनुभव से परिपूर्ण बनाता है, जिससे वह जीवन में महान ऊंचाइयों को प्राप्त करता है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, 20 जनवरी यानी आज शनि देव उत्तरभाद्रपद नक्षत्र में गोचर करेंगे। यह नक्षत्र स्वयं शनि द्वारा शासित है, इसलिए इस नक्षत्र परिवर्तन को अत्यंत शक्तिशाली और खतरनाक माना जाता है। शनि देव के नक्षत्र परिवर्तन का प्रभाव सभी राशियों पर समान रूप से नहीं पड़ेगा। कुछ राशियों के लिए यह परिवर्तन राहत और नई आशा लेकर आएगा, जबकि अन्य को इस दौरान अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। इसलिए, यह समझना महत्वपूर्ण है कि शनि देव किन राशियों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेंगे।
मेष
राशि में शनि का गोचर सावधानी बरतने का समय ला सकता है। इस दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं चिंता का विषय बन सकती हैं। आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव रहेगा। खर्चे अत्यधिक बढ़ सकते हैं। छोटी-छोटी बातों पर बहस और तनाव उत्पन्न हो सकता है। जल्दबाजी में लिया गया कोई भी निर्णय हानिकारक हो सकता है, इसलिए कोई भी नया कार्य शुरू करने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करना और अनुभवी लोगों से सलाह लेना लाभकारी होगा।
सिंह राशि
वालों को इस गोचर के दौरान कुछ समय के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। कार्य संबंधी चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं। आर्थिक मामले तनावपूर्ण लग सकते हैं। लंबे समय से लंबित कार्य चिंता का कारण बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को अतिरिक्त जिम्मेदारियों या कार्यस्थल पर विरोध का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य की अनदेखी करना महंगा पड़ सकता है, इसलिए अपनी दिनचर्या और खान-पान पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।
धनु राशि:
धनु राशि वालों के लिए यह समय सतर्क रहने का है। स्वास्थ्य बिगड़ सकता है या थकान महसूस हो सकती है। अप्रत्याशित खर्चे आ सकते हैं, जिससे बजट बिगड़ सकता है । व्यापार या निवेश से संबंधित जल्दबाजी में लिए गए निर्णय हानिकारक हो सकते हैं। इसलिए, इस दौरान धैर्य और सावधानीपूर्वक विचार करना ही सर्वोत्तम उपाय माना जाता है।




