भारतीय क्रिकेट के 'अंडररेटेड हीरो' गौतम गंभीर का जन्मदिन विशेष

भारतीय क्रिकेट के 'अंडररेटेड हीरो' गौतम गंभीर का जन्मदिन विशेष

भारतीय क्रिकेट इतिहास में जब भी कभी जुझारूपन, अदम्य साहस और संकट के समय टीम को संभालकर जिताने वाले खिलाड़ियों की बात की जाती है, तो उसमें गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) का नाम सबसे ऊपर स्वर्ण अक्षरों में लिखा मिलता है। आज भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच और पूर्व विस्फोटक ओपनर गौतम गंभीर अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर क्रिकेट प्रेमी और उनके फैंस एक बार फिर उस दौर को याद कर रहे हैं जब यह बाएं हाथ का बल्लेबाज मैदान पर उतरता था तो विरोधी गेंदबाजों के माथे पर शिकन साफ दिखाई देती थी। दुनिया भर के क्रिकेट फैंस को साल 2011 के वनडे वर्ल्ड कप फाइनल में खेली गई उनकी 97 रनों की ऐतिहासिक पारी और साल 2007 के टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई 75 रनों की बेशकीमती पारी आज भी जुबानी याद है। लेकिन गौतम गंभीर का करियर सिर्फ इन दो पारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके पूरे क्रिकेट सफर में ऐसी कई बेमिसाल और मैच जिताऊ पारियां दर्ज हैं जिन्हें शायद आज के दौर के क्रिकेटप्रेमी धीरे-धीरे भुला बैठे हैं।

साल 2007 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल: जब जोहान्सबर्ग में गंभीर के बल्ले से निकली थी वो ऐतिहासिक 75 रनों की आंधी

साल 2007 का वह ऐतिहासिक दिन भला कौन भूल सकता है जब दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में भारत और पाकिस्तान के बीच पहले टी20 विश्व कप का खिताबी मुकाबला खेला जा रहा था। उस मैच में भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी और शुरुआती ओवरों में ही विकेट गिरने से टीम दबाव में आ गई थी। ऐसे बेहद नाजुक और दबाव से भरे क्षणों में गौतम गंभीर ने अपनी तकनीकी दक्षता और आक्रामक अंदाज का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मात्र 54 गेंदों पर 8 चौकों और 3 छगनू की मदद से शानदार 75 रनों की पारी खेली थी। उनकी इस बहुमूल्य पारी के दम पर ही टीम इंडिया एक सम्मानजनक स्कोर तक पहुंच पाई थी और बाद में गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत ने वह ऐतिहासिक विश्व कप अपने नाम किया था। उस मैच में यदि गंभीर का बल्ला न चला होता, तो शायद परिणाम कुछ और ही हो सकता था, लेकिन इस खिलाड़ी की खूबी यही थी कि वह बड़े मैचों का प्रेशर बहुत शानदार तरीके से संभालना जानते थे।

साल 2011 का महामुकाबला और वानखेड़े स्टेडियम में खेली गई वह अमर 97 रनों की यादगार पारी

क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में हमेशा अमर रहने वाली साल 2011 के वनडे वर्ल्ड कप फाइनल की रात को कौन भूल सकता है। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में श्रीलंका के खिलाफ खेले गए खिताबी मुकाबले में जब भारत ने अपने दोनों ओपनर्स सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग के विकेट बहुत जल्दी सस्ते में गंवा दिए थे, तब पूरा देश सदमे में चला गया था। ऐसे महासंकट के समय क्रीज पर उतरे गौतम गंभीर ने विराट कोहली के साथ मिलकर पारी को संभाला और फिर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के साथ मिलकर एक ऐसी साझेदारी रची जिसने भारत को 28 साल बाद दोबारा वर्ल्ड कप चैंपियन बना दिया। गंभीर ने अपनी उस पारी के दौरान शानदार फुटवर्क का नमूना पेश करते हुए 122 गेंदों पर 97 रनों की बेहद धैर्यवान और सूझबूझ भरी पारी खेली। हालांकि, वे अपने शतक से मात्र 3 रन से चूक गए थे, लेकिन उनकी यह 97 रनों की पारी किसी भी शतक से कहीं ज्यादा भारी और देश के लिए ऐतिहासिक साबित हुई थी।

विदेशी धरती पर गंभीर का दबदबा: नेपियर में खेली गई वह मैराथन पारी जिसे आज भी याद करते हैं विशेषज्ञ

केवल घरेलू मैदानों या एशियाई पिचों पर ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे मुश्किल और तेज माने जाने वाले विदेशी विकेटों पर भी गौतम गंभीर ने अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया है। साल 2009 में न्यूजीलैंड के खिलाफ नेपियर टेस्ट मैच को भला कोई कैसे भूल सकता है जहां भारतीय टीम हार के मुनेह पर खड़ी थी। उस मैच में फॉलोऑन खेलते हुए गौतम गंभीर ने लगभग 11 घंटे तक क्रीज पर संघर्ष किया और 436 गेंदों का सामना करते हुए 137 रनों की ऐतिहासिक मैराथन पारी खेली। टेस्ट क्रिकेट में डिफेंस और अटैक का ऐसा गजब का संतुलन शायद ही कभी देखने को मिला हो। इस पारी के दम पर भारत ने वह मैच ड्रॉ कराया था और सीरीज अपने नाम की थी। गंभीर ने कई मौकों पर यह साबित किया कि वह टेस्ट क्रिकेट के भी एक बेहद क्लासिक और मजबूत बल्लेबाज थे जो टीम के लिए अपनी विकेट की कीमत अच्छी तरह समझते थे।

टीम इंडिया के हेड कोच के रूप में नई भूमिका, गौतम गंभीर का जुझारू अंदाज आज भी है बरकरार

मैदान पर हमेशा आक्रामक और जीतने की जिद पाले रहने वाले गौतम गंभीर आज भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और अपनी उसी नेतृत्व क्षमता व बेबाक अंदाज के साथ देश को आगे ले जा रहे हैं। उनके जन्मदिन के इस खास अवसर पर देश-विदेश से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं और क्रिकेट पंडित एक बार फिर उनके योगदान को सलाम कर रहे हैं। गंभीर की वे तमाम पारियां आज भी आने वाले युवा क्रिकेटर्स के लिए एक प्रेरणा का स्रोत हैं जो यह सिखाती हैं कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी कैसे डटकर मुकाबला किया जाता है। जन्मदिन के इस खूबसूरत मौके पर हम सब यही कामना करते हैं कि भारतीय क्रिकेट को ऊंचाइयों पर ले जाने में उनका यह सफर यूं ही लगातार जारी रहे।