सावन के अंतिम मंगला गौरी व्रत पर न करें ये गलतियां, इन 3 उपायों को कर पाएं अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद!
हिंदू धर्म में सावन का महीना और उसमें पड़ने वाले व्रत-पर्वों का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। सावन के हर एक दिन भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए समर्पित होते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए मंगला गौरी व्रत का स्थान अत्यंत खास है। सावन मास के प्रत्येक मंगलवार को रखा जाने वाला यह व्रत माता गौरी यानी मां पार्वती को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है। वर्तमान में सावन का अंतिम चरण चल रहा है और अंतिम मंगला गौरी व्रत का पावन अवसर नजदीक है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि पूजा के दौरान किसी भी प्रकार की भूल या अनजाने में होने वाली गलतियों से बचा जाए। यदि आप भी इस खास दिन मां पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहती हैं, तो कुछ जरूरी सावधानियां और अचूक उपाय आपके जीवन के सभी संकट दूर कर सकते हैं। आइए जानते हैं सावन के अंतिम मंगला गौरी व्रत पर क्या करें और किन गलतियों से बचना चाहिए।
मंगला गौरी व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां
धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, मंगला गौरी व्रत के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। यदि इन नियमों की अनदेखी की जाती है, तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता और मां लक्ष्मी व माता पार्वती नाराज हो सकती हैं:
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काले या नीले रंग के वस्त्र न पहनें: पूजा के दौरान काले, नीले या बेहद भड़कीले रंगों के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। इस दिन लाल, पीले या हरे रंग के वस्त्र पहनना बेहद शुभ और सकारात्मक माना जाता है।
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तामसिक भोजन का त्याग करें: व्रत रखने वाले या घर के सदस्यों को इस दिन लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा या किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
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लोहे या प्लास्टिक के बर्तनों का प्रयोग न करें: पूजा की थाली या सामग्री में लोहे और प्लास्टिक के बर्तनों के इस्तेमाल से बचें। इसकी जगह तांबे, पीतल या मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करना श्रेष्ठ होता है।
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अंधेरे में पूजा न करें: मंगला गौरी की पूजा हमेशा सुबह या गोधूलि बेला में शुद्धता के साथ दीपक जलाकर करनी चाहिए। कभी भी बिना दीप जलाए या अपवित्र अवस्था में पूजा संपन्न न करें।
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बड़ों का अनादर न करें: इस पावन दिन किसी भी सुहागिन महिला, बुजुर्ग या कन्या का अपमान न करें। ऐसा करने से मां पार्वती का आशीर्वाद मिलना तो दूर, घर में दरिद्रता आ सकती है।
अखंड सौभाग्य के लिए करें ये 3 अचूक उपाय
सावन के अंतिम मंगला गौरी व्रत के दिन यदि आप सच्चे मन से कुछ विशेष उपाय करते हैं, तो माता पार्वती और महादेव की कृपा से आपके सुहाग की लंबी उम्र और घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी:
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सोलह श्रृंगार की सामग्री का दान: व्रत के दिन माता गौरी को सुहाग का सामान जैसे चूड़ियां, सिंदूर, महावर, बिंदी और चुनरी अर्पित करें। पूजा के बाद यह सामग्री किसी सुहागिन ब्राह्मण महिला या जरूरतमंद को दान कर दें। ऐसा करने से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है।
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शिवलिंग पर अर्पित करें बेलपत्र और दूध: इस दिन नजदीकी शिव मंदिर जाकर भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करें। शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल, कच्चा दूध, अक्षत और 11 बेलपत्र अर्पित करें। इससे वैवाहिक जीवन की तमाम बाधाएं और क्लेश दूर होते हैं।
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नंदी को हरा चारा खिलाएं: व्रत के दिन किसी भी नंदी (बैल) को अपने हाथों से ताजा हरा चारा या गुड़-रोटी खिलाएं। ऐसा करने से कुंडली में मंगल ग्रह के दोष शांत होते हैं और घर-परिवार में आर्थिक समृद्धि व खुशहाली का मार्ग प्रशस्त होता है।