स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर के साथ वही पुरानी रोहित-विराट वाली बड़ी परेशानी
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टीम प्रबंधन के सामने वर्तमान समय में एक ऐसा गंभीर और पहेलीनुमा संकट आन खड़ा हुआ है, जिसने हर किसी को चिंता में डाल दिया है। जिस प्रकार कुछ साल पहले मेंस क्रिकेट टीम में रोहित शर्मा (Rohit Sharma) और विराट कोहली (Virat Kohli) जैसे दिग्गजों के फॉर्म, स्ट्राइक रेट, कॉम्बिनेशन और लगातार खराब होती पारियों को लेकर टीम मैनेजमेंट का सिरदर्द सातवें आसमान पर पहुंच गया था, ठीक वैसा ही हैरान करने वाला और चिंताजनक चक्रव्यूह अब महिला क्रिकेट टीम की दो सबसे मजबूत स्तंभ मानी जाने वाली कप्तान हरमनप्रीत कौर (Harmanpreet Kaur) और उप-कप्तान स्मृति मंधाना (Smriti Mandhana) के इर्द-गिर्द बुना हुआ नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर पिछले कुछ महत्वपूर्ण मुकाबलों से इन दोनों सीनियर खिलाड़ियों का बल्ला उस तरह से नहीं चल रहा है जैसी टीम को उनसे उम्मीद रहती है, जिससे वर्ल्ड कप और आगामी बड़ी सीरीज से पहले सेलेक्टर्स की नींद उड़ गई है। ठीक चार साल पहले भी मेंस टीम के साथ बिल्कुल यही स्थिति बनी थी जब दिग्गजों के खराब प्रदर्शन के कारण चयनकर्ताओं को भारी आलोचना और कठिन फैसलों का सामना करना पड़ा था। इस विशेष और विस्तृत रिपोर्ट में आइए जानते हैं कि आखिर महिला क्रिकेट टीम के इस ताजा संकट के पीछे की असल तकनीकी और मानसिक वजहें क्या हैं और मैनेजमेंट इसे किस तरह सुलझाने की योजना बना रहा है।
क्या है वह पुरानी परेशानी जो रोहित और विराट के बाद अब स्मृति-हरमनप्रीत के साथ आ रही है सामने?
क्रिकेट विश्लेषकों और खेल प्रेमियों को चार साल पुराना वह दौर अच्छी तरह याद होगा जब मेंस टीम के दो सबसे बड़े मैच विनर रोहित शर्मा और विराट कोहली एक साथ खराब दौर से गुजर रहे थे। उस समय टीम की ओपनिंग जोड़ी से लेकर मिडिल ऑर्डर तक रन बनाने का भारी दबाव आ गया था, और चयनकर्ताओं के सामने यह धर्मसंकट था कि वे अपने सबसे बड़े ब्रांड खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखाएं या फिर उनके फॉर्म में लौटने का इंतजार करें। महिला क्रिकेट टीम में आज बिल्कुल वैसी ही स्थिति पैदा हो गई है। स्मृति मंधाना जो अपनी शानदार कवर ड्राइव और तेज शुरुआत के लिए जानी जाती हैं, वे पिछले कुछ बड़े टूर्नामेंट्स में लगातार पावरप्ले के अंदर सस्ते में आउट हो रही हैं। दूसरी तरफ, कप्तान हरमनप्रीत कौर भी मिडिल ओवरों में रन गति बढ़ाने में संघर्ष करती नजर आ रही हैं, जिससे टीम का पूरा स्कोरबोर्ड अचानक दबाव में आ जाता है। जब टीम के दोनों मुख्य अनुभवी खिलाड़ी एक साथ फॉर्म से बाहर होते हैं, तो पूरी बल्लेबाजी यूनिट बिखर जाती है, और यही वह सबसे बड़ी परेशानी है जिसने कोच और चयनकर्ताओं का सिरदर्द काफी बढ़ा दिया है।
चार साल पहले के उस खौफनाक मंजर से क्यों हो रही है मौजूदा महिला टीम की तुलना?
ठीक चार साल पहले जब मेंस क्रिकेट में यह संकट गहराया था, तब टीम प्रबंधन को कई कड़े और अप्रिय फैसले लेने पड़े थे जिसके बाद ही टीम में नए और युवा खिलाड़ियों को मौका मिलने का रास्ता साफ हुआ था। वर्तमान समय में महिला क्रिकेट टीम के साथ भी बिल्कुल वही खौफनाक मंजर दोहराया जा रहा है, जहां सीनियर खिलाड़ियों के अनुभव पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता टीम के लिए जी का जंजाल बनती जा रही है। घरेलू क्रिकेट और विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) में शानदार प्रदर्शन करने वाली युवा खिलाड़ियों की फौज बेंच पर बैठी है, लेकिन अनुभव के अभाव का हवाला देकर मैनेजमेंट बार-बार उन्हीं सीनियर चेहरों पर दांव लगा रहा है जो फिलहाल अपनी सर्वश्रेष्ठ लय में नहीं हैं। खेल जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो आगामी विश्व कप और अंतरराष्ट्रीय सीरीज में भारत को इसका भारी खमियाजा भुगतना पड़ सकता है, ठीक वैसे ही जैसे अतीत में कई बार देखने को मिला है।
टीम मैनेजमेंट और कोच के सामने खड़ी है सबसे बड़ी चुनौती, क्या होगा अगला कदम?
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच और सपोर्ट स्टाफ ने खिलाड़ियों के साथ विशेष नेट सेशन और मानसिक कंडीशनिंग कैंप लगाने का फैसला किया है। स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर दोनों ही देश की महान खिलाड़ी हैं और उनके पास मैच का रुख पलटने की अद्भुत क्षमता है, इसलिए टीम प्रबंधन उन्हें पूरी मानसिक और तकनीकी बैकिंग दे रहा है। हालांकि, पर्दे के पीछे यह भी चर्चा जोरों पर है कि यदि आगामी कुछ मैचों में इन दोनों का बल्ला खामोश रहता है, तो चयनकर्ताओं को टीम संयोजन में कुछ कड़े बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। खिलाड़ियों पर से मानसिक दबाव हटाने के लिए उन्हें घरेलू सर्किट में कुछ समय बिताने या अपनी तकनीकी कमियों को दूर करने की सलाह दी जा सकती है, ताकि वे तरोताजा होकर मैदान पर वापसी कर सकें।
भारतीय क्रिकेट के भविष्य और आगामी टूर्नामेंट्स के लिहाज से क्यों अहम है यह मोड़?
यह वक्त भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास के सबसे संवेदनशील मोड़ों में से एक है, क्योंकि खेल का स्तर अब दुनिया भर में काफी तेजी से बदल रहा है और कोई भी टीम केवल नाम या पुराने रिकॉर्ड के दम पर मैच नहीं जीत सकती। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अन्य मजबूत टीमें लगातार आक्रामक शैली अपना रही हैं, ऐसे में भारतीय टीम की मुख्य बल्लेबाजों का फॉर्म में न होना एक बहुत बड़ा खतरा बन चुका है। फैंस और क्रिकेट जानकारों की निगाहें अब पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि क्या स्मृति और हरमनप्रीत अपनी पुरानी लय हासिल करके इस संकट से उबर पाती हैं या फिर मैनेजमेंट को कोई बड़ा और साहसी कदम उठाना पड़ता है। आने वाले मुकाबले तय करेंगे कि भारतीय महिला क्रिकेट का यह नया अध्याय किस दिशा में आगे बढ़ेगा।