Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच छिड़े भीषण संग्राम ने पूरी दुनिया को दहला दिया है। इस वैश्विक महासंकट के बीच भारत की रणनीति और आम जनता की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी सोमवार, 23 मार्च 2026 को दोपहर 2 बजे लोकसभा को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में युद्ध के कारण भारत पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभावों और सरकार द्वारा उठाए जा रहे सुरक्षात्मक कदमों की विस्तृत जानकारी देश के सामने रखेंगे।
महायुद्ध की तपिश और भारत की तैयारी: CCS बैठक में बना 'सुरक्षा कवच'
संसद में संबोधन से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार की पूरी रात मैराथन बैठकों का दौर जारी रखा। कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की उच्च स्तरीय बैठक में यह साफ कर दिया गया है कि युद्ध की स्थिति में भी भारत में तेल और गैस की आपूर्ति बाधित नहीं होने दी जाएगी। सरकार ने देश को भरोसा दिलाया है कि हमारे पास कोयले का प्रचुर भंडार है, जिससे बिजली संकट का कोई खतरा नहीं है। पीएम मोदी का लक्ष्य स्पष्ट है—भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाना और महंगाई को काबू में रखना।
विदेश मंत्रालय के साथ अहम बैठक: कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रिय हुआ भारत
आज सुबह संसद परिसर में प्रधानमंत्री ने विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सचिव स्तर के अफसरों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान युद्धग्रस्त क्षेत्रों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा और कूटनीतिक विकल्पों पर चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि कैसे रूस-यूक्रेन संकट के बाद अब इस नए युद्ध से उपजी वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत अपनी 'न्यूट्रल' और 'मजबूत' छवि बरकरार रखे।
सप्लाई चेन और उद्योगों के लिए 'प्लान-बी' तैयार
मंत्रिमंडल सचिव ने प्रधानमंत्री के समक्ष एक विस्तृत प्रेजेंटेशन पेश किया, जिसमें कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा और लघु उद्योगों (MSME) पर युद्ध के संभावित असर का विश्लेषण किया गया।
आयात में विविधता: दवा (Pharma) और पेट्रोकेमिकल उद्योगों के लिए कच्चे माल के वैकल्पिक स्रोत तलाशे जा रहे हैं।
नए निर्यात बाजार: युद्ध प्रभावित क्षेत्रों के बजाय अब नए देशों में भारतीय माल के निर्यात को बढ़ावा देने की योजना है।
महंगाई पर नियंत्रण: पेट्रोलियम और रसद (Logistics) की लागत कम रखने के लिए वित्त मंत्रालय और जहाजरानी मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं।
विपक्ष और जनता की नजरें पीएम के भाषण पर
दोपहर 2 बजे होने वाला यह भाषण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि युद्ध के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी अपने संबोधन के जरिए न केवल संसद को विश्वास में लेंगे, बल्कि देश की 140 करोड़ जनता को यह संदेश भी देंगे कि भारत इस वैश्विक आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है।




