इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से 3 सप्ताह में मांगा जवाब; जुर्माना वसूली पर लगाई रोक
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से इस वक्त न्यायपालिका और प्रशासनिक हलकों से जुड़ी एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक पुरानी मस्जिद के ध्वस्तीकरण और उससे जुड़े कानूनी विवाद ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए देश की प्रतिष्ठित न्यायमूर्तियों में शुमार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ा निर्देश देते हुए तीन सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाबी हलफनामा (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने को कहा है। इसके साथ ही अदालत ने स्थानीय प्रशासन और सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा मस्जिद कमेटी पर थोपे गए 6 करोड़ 41 लाख रुपये के भारी-भरकम जुर्माने और हर्जाने की वसूली के आदेश पर आगामी सुनवाई तक के लिए अंतरिम रोक लगा दी है। इस बड़े न्यायिक हस्तक्षेप के बाद से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, और हर कोई इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली कानूनी कार्यवाही पर नजर गड़ाए बैठा है। इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद विवाद के इतिहास, प्रशासनिक कार्रवाई और हाईकोर्ट के इस ताज़ा फैसले के हर एक पहलू से विस्तार से अवगत कराएंगे।
क्या है पूरा सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद विवाद और कैसे शुरू हुआ यह पूरा घटनाक्रम?
सहारनपुर जिला मुख्यालय यानी कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर स्थित इस विवादित धार्मिक ढांचे को लेकर पिछले काफी समय से खींचतान चल रही थी। प्रशासनिक दस्तावेजों और राजस्व विभाग के अनुसार, कलेक्ट्रेट परिसर की लगभग 315 वर्ग मीटर भूमि पर बने इस ढांचे को लेकर यह दावा किया गया था कि यह अनधिकृत या सरकारी जमीन पर है। इस मामले की शुरुआत पिछले साल यानी मार्च 2025 में तब हुई जब राजस्व विभाग के सामने आपत्तियां दर्ज कराई गईं और इसे अवैध कब्जा बताया जाने लगा। इसके विपरीत, मस्जिद कमेटी और इसके प्रबंधकों का यह पक्ष था कि यह स्थल लंबे समय से धार्मिक कार्यों से जुड़ा रहा है और इसके ऐतिहासिक दस्तावेज व साक्ष्य इसके अस्तित्व की गवाही देते हैं। दोनों पक्षों के बीच चली लंबी प्रशासनिक और विधिक प्रक्रियाओं के बाद मामला तब और गहरा गया जब स्थानीय अदालत और प्रशासन ने इस पर सख्त कदम उठाने की ठान ली, जिससे यह मुद्दा उत्तर प्रदेश के सबसे संवेदनशील स्थानीय विवादों में शुमार हो गया।
सिटी मजिस्ट्रेट का आदेश और जिला अदालत से झटका मिलने के बाद मस्जिद पर प्रशासनिक बुलडोजर कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम में उस वक्त नया मोड़ आया जब इस साल 16 जुलाई को सहारनपुर के सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर की इस मस्जिद को अवैध करार देते हुए इसे हटाने का आदेश पारित किया और साथ ही मस्जिद प्रबंधन पर नुकसान की भरपाई के नाम पर 6 करोड़ 41 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने पहले जिला जज की अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से राहत मिलने के बजाय 2 सितंबर को जिला न्यायाधीश की अदालत ने भी कमेटी की याचिका को खारिज कर दिया और निचले कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। जिला अदालत से याचिका खारिज होते ही प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह हरकत में आ गई और आगामी 5 सितंबर की सुबह तड़के कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में इस ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया। इस त्वरित और कड़े एक्शन के बाद से ही स्थानीय स्तर पर तनाव और असहजता का माहौल बन गया था, जिसे शांत करने के लिए प्रशासन को भारी पुलिस फोर्स तैनात करनी पड़ी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती: मस्जिद कमेटी ने लगाए बिना नोटिस और प्रक्रिया के उल्लंघन के गंभीर आरोप
निचली अदालतों से याचिका खारिज होने और प्रशासन द्वारा रातों-रात ढांचा गिराए जाने के बाद मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली (देखरेख करने वाले) मोहम्मद तनवीर अहमद की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल की गई। इस याचिका में प्रशासनिक कार्रवाई को चुनौती देते हुए यह कड़े आरोप लगाए गए कि सरकार और स्थानीय अधिकारियों ने बिना किसी वैध पूर्व नोटिस और सक्षम कानूनी आदेश के इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष यह भी दलील दी कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान 'प्लेसेज़ ऑफ़ वर्शिप एक्ट' (Places of Worship Act) के प्रावधानों के साथ-साथ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की भी अनदेखी की गई। इसके अलावा बिजली कनेक्शन काटने, गवाहों की पूरी गवाही दर्ज न कराने और जल्दबाजी में फैसले थोपने जैसी प्रक्रियागत अनियमितताओं को भी हाईकोर्ट के सामने मुख्य आधार बनाया गया, जिस पर अदालत ने अत्यंत गंभीरता से विचार किया।
हाईकोर्ट का बड़ा राहत भरा कदम: 6.41 करोड़ के जुर्माने पर रोक और 12 अक्टूबर को अगली सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए मस्जिद कमेटी को एक बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने सहारनपुर प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है। सबसे बड़ी राहत यह रही कि अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है जिसके तहत मस्जिद प्रबंधन से 6 करोड़ 41 लाख रुपये की वसूली की जानी थी। हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस मामले में अभी दोनों पक्षों की दलीलें और लंबी चलेंगी, लेकिन फिलहाल हाईकोर्ट के इस आदेश से याचिकाकर्ता पक्ष को बड़ी कानूनी राहत जरूर मिली है।