समाजवादी पार्टी में बड़ा फेरबदल; सांसद रुचि वीरा से विवाद के बाद कमाल अख्तर ने छोड़ा मुख्य सचेतक का पद
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी समाजवादी पार्टी (SP) के भीतर एक बड़ा और चौंकाने वाला राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। उत्तर प्रदेश विधानमंडल में सपा विधायक दल के मुख्य सचेतक (Chief Whip) कमाल अख्तर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ दिनों से कांठ विधायक कमाल अख्तर और मुरादाबाद की सपा सांसद रुचि वीरा के बीच का आपसी विवाद खुलकर सामने आ गया था। इस इस्तीफे को सपा के भीतर बदलते शक्ति संतुलन, गुटबाजी पर लगाम लगाने और मुरादाबाद मंडल के क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव के पत्र के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने पद घोषित किया रिक्त
इस बड़े सियासी उलटफेर की पुष्टि करते हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने बताया कि उन्हें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक आधिकारिक पत्र प्राप्त हुआ था। इस पत्र के आधार पर मंगलवार रात को ही कमाल अख्तर को हटाते हुए विधानसभा में मुख्य सचेतक का पद रिक्त (Vacant) घोषित कर दिया गया है।
हालांकि, पार्टी की ओर से फिलहाल इस पद के लिए किसी नए विधायक के नाम का प्रस्ताव अभी विधानसभा अध्यक्ष को नहीं भेजा गया है, लेकिन नए नाम को लेकर सुगबुगाहट तेज हो चुकी है।
क्यों हुआ विवाद? आजम खां के प्रभाव से भी जुड़े तार
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मुरादाबाद मंडल की राजनीति में अपना वर्चस्व कायम रखने को लेकर सांसद रुचि वीरा और विधायक कमाल अख्तर के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे। हाल ही में एक पीडीए (PDA) सम्मेलन में न बुलाए जाने को लेकर दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई थी। सांसद रुचि वीरा को सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां का बेहद करीबी माना जाता है।
विवाद को बढ़ता देख सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दोनों नेताओं को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय बुलाकर एक उच्चस्तरीय बैठक भी की थी, लेकिन वहां भी कोई ठोस हल नहीं निकल सका।
अखिलेश यादव के कहने पर दिया इस्तीफा: कमाल अख्तर
पद छोड़ने के बाद मीडिया से बात करते हुए विधायक कमाल अख्तर ने कहा, "यह इस्तीफा मैंने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी के कहने पर दिया है। मैं पार्टी का एक सच्चा और समर्पित कार्यकर्ता हूं। हमारे नेता जो भी आदेश देंगे, मैं उसका पूरी निष्ठा से पालन करूंगा।" हालांकि, उन्होंने अपने बयान में सांसद रुचि वीरा से किसी भी तरह के सीधे विवाद की बात से इनकार किया है।
वहीं दूसरी तरफ, सांसद रुचि वीरा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सम्मेलन में अनदेखी किए जाने के मामले को उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने रखा था, जहां उन्हें कार्रवाई का भरोसा मिला था। कमाल अख्तर से इस्तीफा लेने का फैसला पूरी तरह पार्टी नेतृत्व का है।
अब इंद्रजीत सरोज को मिल सकती है जिम्मेदारी, क्या है सपा का 'PDA' प्लान?
कमाल अख्तर को जुलाई 2024 में मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब उनके हटने के बाद कौशांबी की मंझनपुर विधानसभा सीट से वरिष्ठ विधायक इंद्रजीत सरोज को नया मुख्य सचेतक बनाए जाने की चर्चाएं पार्टी के भीतर सबसे तेज हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए संगठनात्मक अनुशासन का एक कड़ा संदेश देना चाहते हैं। इसके साथ ही, एक प्रमुख दलित चेहरे (इंद्रजीत सरोज) को इस बड़े पद पर बैठाकर सपा अपने 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को और मजबूत करना चाहती है, ताकि विपक्ष को गुटबाजी के मुद्दे पर घेरने का कोई मौका न मिले।