मिर्जापुर: दिव्‍या मित्‍तल ने जिस स्‍कूल की उठाई थी बात, वन विभाग ने निर्माण रुकवाया

मिर्जापुर: दिव्‍या मित्‍तल ने जिस स्‍कूल की उठाई थी बात, वन विभाग ने निर्माण रुकवाया

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से इस वक्त एक बहुत ही दिलचस्प, चौंकाने वाली और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी बड़ी खबर सामने आ रही है। मिर्जापुर की अपनी तेज-तर्रार कार्यशैली और सख्त प्रशासनिक तेवरों के लिए देश भर में मशहूर रहीं पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल (Divya Mittal) ने अपने कार्यकाल के दौरान जिस स्कूल और उसके निर्माण कार्य को लेकर एक बड़ा मुद्दा उठाया था, उस पर अब वन विभाग (Forest Department) ने बहुत बड़ी कार्रवाई कर दी है। वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर उस विवादित स्कूल के निर्माण कार्य को पूरी तरह से रुकवा दिया है और यह दावा किया है कि जिस जमीन पर यह स्कूल खड़ा किया जा रहा था, वह असल में राजस्व या किसी निजी संपत्ति की नहीं बल्कि वन विभाग की सुरक्षित जमीन है। इस ताजा कार्रवाई के बाद से स्थानीय भू-माफियाओं, शिक्षा माफियाओं और प्रशासनिक महकमे में एक बार फिर से हड़कंप मच गया है। आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले की पूरी अंदरूनी कहानी क्या है और दिव्या मित्तल द्वारा उठाए गए उस पुराने मुद्दे के बाद अब इस जमीन पर क्या नया विवाद खड़ा हो गया है।

Divya Mittal Mirzapur School Controversy: क्या था वह पुराना मामला जिसे लेकर सुर्खियों में आई थीं आईएएस दिव्या मित्तल, स्कूल निर्माण पर उठे थे सवाल

पूरा मामला कुछ समय पहले का है जब मिर्जापुर जिले में तैनात रहीं लोकप्रिय आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने निरीक्षण के दौरान जिले के एक खास इलाके में हो रहे संदिग्ध निर्माण कार्यों और जमीनों के खेल पर गहरी आपत्ति जताई थी। उस दौरान उन्होंने एक स्कूल के निर्माण और उसकी ज़मीन की वैधता को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को जांच के कड़े निर्देश दिए थे। दिव्या मित्तल अपनी प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के प्रति कड़ाई के लिए जानी जाती हैं, और जब उन्होंने इस स्कूल के मामले को सार्वजनिक मंचों या बैठकों में उठाया था, तब से ही यह मामला स्थानीय स्तर पर काफी संवेदनशील बन गया था। हालांकि उनके ट्रांसफर के बाद भी उस जमीन और स्कूल को लेकर खींचतान जारी रही, लेकिन हाल ही में वन विभाग की इस सीधी और ताबड़तोड़ कार्रवाई ने इस पुराने मामले को एक बार फिर से सुर्खियों के केंद्र में ला दिया है।

Forest Department Action in Mirzapur: वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर रुकवाया निर्माण, जमीन को बताया वन क्षेत्र का हिस्सा

हाल ही में जब वन विभाग की टीमों को यह सूचना मिली कि उस विवादित और चर्चित जमीन पर नियमों को ताक पर रखकर लगातार निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है, तो विभाग के अधिकारी हरकत में आ गए। वन विभाग के भारी अमले ने स्थानीय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया और वहां चेतावनी बोर्ड भी लगा दिए। विभाग के अधिकारियों का साफ तौर पर कहना है कि दस्तावेजों और राजस्व विभाग की पुरानी सीमाओं के अनुसार यह पूरी जमीन वन विभाग के संरक्षित क्षेत्र (Protected Forest Land) के अंतर्गत आती है। इस जमीन पर किसी भी प्रकार का पक्का निर्माण करना या व्यावसायिक गतिविधि चलाना कानूनन एक बड़ा अपराध है। वन विभाग की इस अचानक हुई कार्रवाई से निर्माणकर्ताओं और स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों के होश उड़ गए हैं, और वे इस कार्रवाई के खिलाफ कानूनी दस्तावेजों को खंगालने में जुट गए हैं।

Local Politics and Land Grabbing Syndicate: मिर्जापुर में जमीन पर अवैध कब्जे का यह खेल, वन विभाग और प्रशासनिक तालमेल पर उठ रहे हैं बड़े सवाल

इस पूरी घटना के बाद से मिर्जापुर के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर कैसे वन विभाग की इतनी बड़ी और सुरक्षित जमीन पर धड़ल्ले से स्कूल की इमारत खड़ी की जा रही थी। जानकारों का कहना है कि जिले के कई इलाकों में भू-माफियाओं और स्थानीय प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से वन और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे का यह खेल लंबे समय से चल रहा है। आईएएस दिव्या मित्तल ने जब अपने कार्यकाल में इस मामले की सुई उठाई थी, तब कई लोगों को उम्मीद थी कि इस पर तुरंत विराम लग जाएगा, लेकिन फाइलें दबने के कारण काम फिर से शुरू हो गया था। अब वन विभाग के इस कड़े कदम से आम जनता में यह संदेश गया है कि यदि प्रशासन चाहे तो अवैध कब्जों पर नकेल कसना मुश्किल नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या वन विभाग इस पूरी जमीन को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त करा पाता है या यह मामला अदालती और कानूनी लड़ाइयों में उलझकर रह जाता है।