दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की डिजाइन में गड़बड़ी? ढलान, स्पीड ब्रेकर पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
देश की राजधानी दिल्ली को देवभूमि उत्तराखंड से जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित और अत्यंत महत्वाकांक्षी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (Delhi-Dehradun Expressway) के निर्माण कार्य को लेकर एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। करोड़ों और अरबों रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे के कुछ चुनिंदा हिस्सों पर इसके डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले कुछ दिनों से लगातार यह चर्चा जोरों पर है कि इस नए एक्सप्रेसवे के कई महत्वपूर्ण खंडों पर जरूरत से ज्यादा खतरनाक ढलान (Slopes), अचानक आने वाले तीखे टर्न्स और बिना मानक के बनाए गए स्पीड ब्रेकर्स या तकनीकी कमियों के कारण सफर करना यात्रियों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। इन तमाम शिकायतों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बेहद गंभीरता से लेते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अब देश की प्रतिष्ठित केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (Central Road Research Institute - CRI) को इस पूरे मामले की गहन तकनीकी जांच करने का जिम्मा सौंप दिया है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के डिजाइन में असल में कहां-कहां गड़बड़ियां पाई जा रही हैं और CRI की जांच के बाद क्या बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
क्या है पूरा मामला और क्यों उठ रहे हैं एक्सप्रेसवे के डिजाइन पर गंभीर सवाल?
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को देश के सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों शहरों के बीच की यात्रा के समय को कई घंटे कम करना और यातायात को पूरी तरह से सुगम बनाना है। लेकिन जैसे-जैसे इस एक्सप्रेसवे का काम अंतिम चरणों में पहुंच रहा है और कुछ हिस्सों पर वाहनों का ट्रायल या आवाजाही शुरू हुई है, वैसे-वैसे तकनीकी विशेषज्ञों और स्थानीय ड्राइवरों ने इसके कुछ हिस्सों पर सड़क की बनावट को लेकर आपत्तियां दर्ज करानी शुरू कर दी हैं। एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले लोगों का कहना है कि इसके कुछ फ्लाईओवर्स और एलिवेटेड सेक्शन के उतरने वाले हिस्सों पर ढलान इतनी तीखी और अचानक है कि तेज रफ्तार वाहनों का नियंत्रण बिगड़ने का भारी खतरा बना रहता है। इसके अलावा, कई जगहों पर इंजीनियरिंग के नियमों के विपरीत यू-टर्न और एप्रोच रोड बनाए गए हैं, जिन्हें लेकर सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने कड़ा ऐतराज जताया है। यही वजह है कि जनता की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए इस प्रोजेक्ट के पूरे एलाइनमेंट और डिजाइन का ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है।
CRI (केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान) करेगी तकनीकी ऑडिट और सुरक्षा समीक्षा
इन तमाम तकनीकी खामियों और शिकायतों के मद्देनजर देश की सबसे भरोसेमंद और स्वायत्त वैज्ञानिक अनुसंधान संस्था 'सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट' (CRI) की विशेषज्ञ टीम जल्द ही इस पूरे एक्सप्रेसवे का भौतिक और तकनीकी निरीक्षण करने के लिए मैदान में उतरने वाली है। CRI के वरिष्ठ वैज्ञानिक और हाईवे इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ इस बात का बारीकी से पता लगाएंगे कि क्या वास्तव में एक्सप्रेसवे के डिजाइन में कोई खामी रह गई है या फिर निर्माण सामग्री और ढलानों के निर्माण में भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के तय मानकों की अनदेखी की गई है। टीम द्वारा सड़क की समतलता (Surface Evenness), ड्रेनेज सिस्टम, साइनबोर्ड्स की स्थिति, विजिबिलिटी और रात के समय ड्राइविंग सुरक्षा जैसे तमाम पैमानों पर एक विस्तृत वैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यदि जांच के दौरान डिजाइन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित निर्माण एजेंसियों और कंसल्टेंट्स के खिलाफ भारी पेनल्टी लगाने के साथ-साथ उन खतरनाक हिस्सों को तुरंत सुधारने के निर्देश दिए जाएंगे।
तेज रफ्तार और सुरक्षा का संतुलन: एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की जान से नहीं हो सकता खिलवाड़
एक्सप्रेसवे का निर्माण मुख्य रूप से इसलिए किया जाता है ताकि वाहन चालक बिना किसी बाधा के 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सुरक्षित सफर तय कर सकें। लेकिन यदि शुरुआत में ही सड़कों पर ऐसी तकनीकी और डिजाइन से जुड़ी खामियां रह जाएं, तो जरा सी चूक या कोहरे के समय में बड़े और भीषण सड़क हादसों का सबब बन सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे जैसे हाई-स्पीड कॉरिडोर पर एक भी गलत ढलान या खराब डिजाइन सैकड़ों लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल सकता है। यही कारण है कि इस बार एनएचएआई किसी भी प्रकार की लापरवाही बरतने के मूड में नहीं है और वे चाहते हैं कि उद्घाटन से पहले ही हर एक तकनीकी कमी को पूरी तरह से दूर कर लिया जाए ताकि यात्रियों को एक सुरक्षित और विश्वस्तरीय सफर का अनुभव मिल सके।
आने वाले दिनों में क्या होगा CRI की रिपोर्ट का असर और जनता को कब मिलेगी राहत?
केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRI) की यह तकनीकी जांच रिपोर्ट आने वाले कुछ हफ्तों के भीतर सरकार और एनएचएआई को सौंप दी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर उन सभी हिस्सों की मैपिंग की जाएगी जहां सुधार की गुंजाइश है, और जरूरत पड़ने पर उन विशेष खंडों को फिर से री-डिजाइन या मॉडिफाई किया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया के चलते भले ही एक्सप्रेसवे के फाइनल उद्घाटन में थोड़ा बहुत वक्त और लग सकता है, लेकिन यात्रियों के जीवन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम बेहद सराहनीय और अनिवार्य माना जा रहा है। देश भर के वाहन चालकों और विशेष रूप से दिल्ली और देहरादून के बीच रोजाना आवाजाही करने वाले लोगों की निगाहें अब पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि CRI की जांच में क्या सच बाहर आता है और प्रशासन इन कमियों को कितनी तेजी से दूर करता है।