उमेश कुमार ने विधायकी से दिया इस्तीफा, विधानसभा सेशन के दूसरे दिन बड़ा फैसला
उत्तराखंड की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। खानपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा सत्र के दूसरे दिन लिया गया यह अचानक और कड़ा फैसला पूरे राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बन गया है। सत्र के दौरान जब हर कोई विधायी कार्यों और राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद कर रहा था, उसी समय खानपुर विधायक के इस कदम ने न केवल सत्ता पक्ष बल्कि विपक्ष को भी हैरान कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस अचानक हुए घटनाक्रम के पीछे क्षेत्रीय राजनीति, जनहित के मुद्दे और प्रशासनिक खींचतान से जुड़े कई गहरे राजनीतिक मायने छिपे हो सकते हैं।
गैरसैंण विधानसभा सत्र के दूसरे दिन का घटनाक्रम और अचानक लिया गया फैसला
उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में चल रहा था, जहां दूसरे दिन की कार्यवाही की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक गर्माहट देखने को मिली। निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने विधिवत रूप से अपना त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिया। इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने अपने फैसले के पीछे के कारणों को उजागर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र खानपुर की जनसमस्याओं, विकास योजनाओं और प्रशासनिक उपेक्षा की लगातार अनदेखी की जा रही थी। उन्होंने कहा कि जब वे विधायक रहते हुए अपने क्षेत्र की जनता के अधिकारों और बुनियादी जरूरतों की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में इस पद पर बने रहने का कोई नैतिक औचित्य नहीं रह जाता है।
खानपुर क्षेत्र के विकास कार्य और शासन-प्रशासन के बीच बढ़ती दूरी
खानपुर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे उमेश कुमार अपने बेबाक अंदाज और आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं। अपने कार्यकाल के दौरान वे लगातार क्षेत्र के युवाओं के रोजगार, किसानों के मुआवजे, बदहाल सड़कों और स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ समय से शासन और स्थानीय प्रशासन के साथ उनकी तल्खी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही थी। उमेश कुमार का आरोप है कि क्षेत्रीय स्तर पर अधिकारियों द्वारा जनहित के कार्यों में अड़ंगे लगाए जा रहे थे और विधानसभा में उठाए गए सवालों पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही थी। इसी उपेक्षा और प्रशासनिक सुस्ती से नाराज होकर उन्होंने इस्तीफा देने का कड़ा रास्ता चुना।
उत्तराखंड की राजनीति पर इस इस्तीफे का असर और आगामी उपचुनाव की सुगबुगाहट
उमेश कुमार के इस चौंकाने वाले फैसले के बाद खानपुर सीट और पूरे हरिद्वार जिले की राजनीति में भारी हलचल मच गई है। एक निर्दलीय विधायक का इस तरह अचानक इस्तीफा देना राज्य सरकार के लिए भी असहज करने वाली स्थिति पैदा कर रहा है। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने की प्रक्रिया शुरू होते ही अब खानपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव की सुगबुगाहट भी तेज हो गई है। स्थानीय जनता और उनके समर्थकों में इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां उनके समर्थक इसे जनता की आवाज उठाने के लिए त्याग का कदम बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी इसे एक राजनीतिक स्टंट करार देने में जुट गए हैं।
आगे का राजनीतिक रुख और क्या होगी उमेश कुमार की नई रणनीति
विधायकी छोड़ने के बाद अब हर किसी की निगाहें उमेश कुमार के अगले राजनीतिक कदम पर टिक गई हैं। क्या वे फिर से जनता के बीच जाकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोकेंगे या फिर किसी प्रमुख राष्ट्रीय अथवा क्षेत्रीय राजनीतिक दल का दामन थामेंगे, इसको लेकर कयासों का बाजार गर्म है। उमेश कुमार ने यह साफ संकेत दिया है कि भले ही उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी हो, लेकिन वे खानपुर की जनता और उत्तराखंड के हक-हकूक की लड़ाई सड़कों पर उतरकर पूरी ताकत के साथ लड़ते रहेंगे। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक घटनाक्रम उत्तराखंड की राजनीति में क्या नया मोड़ लेकर आता है।