डोनाल्ड ट्रंप को ईरान का बड़ा झटका! 7 दिनों में खुलेगा होर्मुज जलडमरूमध्य
वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर मिडिल ईस्ट से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। लंबे समय से भीषण सैन्य तनाव और व्यापारिक गतिरोध का सामना कर रहे मध्य पूर्व में ईरान ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने एक बड़ा और नया शांति फॉर्मूला पेश कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची द्वारा सार्वजनिक किए गए इस प्रस्ताव ने वैश्विक राजनीति, वैश्विक तेल बाजारों और कूटनीतिक गलियारों में अचानक भारी हलचल पैदा कर दी है।
ईरान ने इस बार सीधे तौर पर सात दिनों की समय सीमा के साथ एक कूटनीतिक रोडमैप अमेरिका के टेबल पर रखा है। तेहरान का दावा है कि यदि वाशिंगटन उसकी सभी शर्तों को स्वीकार कर लेता है, तो मात्र छह दिनों के भीतर रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग यानी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सभी व्यावसायिक और व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह से फिर से खोल दिया जाएगा। इसके ठीक सातवें दिन दोनों देशों के बीच आधिकारिक परमाणु वार्ता और सुरक्षा वार्ताओं की फिर से शुरुआत हो सकती है।
ईरान के 7-दिन के नए शांति प्रस्ताव में आखिर क्या-क्या शामिल है?
ईरान की ओर से कतर और मध्यस्थ देशों के माध्यम से अमेरिका को भेजे गए इस प्रस्ताव में मुख्य रूप से सात बड़ी शर्तें रखी गई हैं। ईरान की सबसे पहली मांग यह है कि अमेरिका उसके प्रमुख समुद्री बंदरगाहों से नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को तुरंत प्रभाव से पूरी तरह हटाए। इसके साथ ही, अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरानी कच्चे तेल (Iranian Crude Oil) के निर्यात पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी जाए और उन्हें आधिकारिक रूप से वापस लिया जाए।
दूसरी बड़ी शर्त यह है कि अमेरिका मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र के सभी सैन्य मोर्चों पर चल रही सभी प्रकार की शत्रुतापूर्ण और आक्रामक सैन्य कार्रवाइयों को स्थायी रूप से बंद करे। इस प्रस्ताव में लेबनान और क्षेत्रीय संघर्ष क्षेत्रों में युद्धविराम लागू करने की बात भी प्रमुखता से उठाई गई है। ईरान का तर्क है कि इस आठ महीने लंबे तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार और उसका अपना आंतरिक अर्थशास्त्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भोजन की महंगाई और दवाओं की किल्लत से जूझ रहे क्षेत्र के लिए व्यापारिक गलियारा खोलना बेहद जरूरी हो गया है।
डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी प्रतिक्रिया और अमेरिकी प्रशासन का रुख
इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा बयान आया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका एक बेहतर डील के लिए तैयार है, लेकिन ईरान का यह वर्तमान प्रस्ताव एकतरफा है और अमेरिका के लिए पूरी तरह स्वीकार्य नहीं है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अमेरिकी सेंटकॉम (CENTCOM) के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान तनाव खत्म करना चाहता है, तो उसे अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमता (Uranium Enrichment) में भारी और सार्थक कमी करनी होगी।
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों और नौसैनिक घेराबंदी के चलते उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा गई है, इसलिए तेहरान अब आनन-फानन में यह समझौता करना चाहता है। इसके बावजूद, वाशिंगटन ने मध्यस्थों के माध्यम से ईरान को अपना जवाब भेजा है, जिसका ईरानी सुरक्षा परिषद और विदेश मंत्रालय फिलहाल बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं।
वैश्विक क्रूड ऑयल बाजार और नई सुरक्षा चेतावनियां
दुनिया के कुल कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले होर्मुज स्ट्रेट के तंग समुद्री रास्ते से गुजरता है। युद्ध और हमलों के कारण इस जलमार्ग में व्यापार ठप होने से दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और ऊर्जा के दाम तेजी से बढ़े हैं। यही कारण है कि भारत, चीन और यूरोपीय देशों सहित पूरी दुनिया की नजरें इस 7 दिवसीय प्रस्ताव के अंतिम नतीजों पर टिकी हुई हैं।
दूसरी ओर, ईरान के नए रक्षा मंत्री मेहरदाद अखलाकी ने संसद की मंजूरी मिलने के बाद एक सख्त चेतावनी भी जारी की है। उन्होंने कहा कि ईरान का 7 दिनों का प्रस्ताव अभी भी टेबल पर है, लेकिन यदि अमेरिका या उसके सहयोगियों ने शांति वार्ता की जगह सैन्य हमले का रास्ता चुना, तो पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र और अमेरिका को अभूतपूर्व नुकसान भुगतना पड़ेगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या डोनाल्ड ट्रंप चुनावों से पहले इस ऐतिहासिक सौदे को स्वीकार करते हैं या फिर होर्मुज जलडमरूमध्य का यह संकट और अधिक गहराता चला जाएगा।