पंजाब चुनाव से पहले नशे के मुद्दे पर भगवंत मान सरकार को घेरने का बीजेपी का मास्टरप्लान

पंजाब चुनाव से पहले नशे के मुद्दे पर भगवंत मान सरकार को घेरने का बीजेपी का मास्टरप्लान

पंजाब की सियासत में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य में गहराते नशे के संकट और कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आम आदमी पार्टी (AAP) और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर अपना राजनीतिक हमला बेहद तेज कर दिया है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह महज 21 दिनों के भीतर दूसरी बार पंजाब के दौरे पर पहुंच रहे हैं। सितंबर के अंत में जालंधर में 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' के समापन समारोह को संबोधित करने के बाद अब अमित शाह का यह दोबारा पंजाब आना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बीजेपी ने राज्य में नशे के गंभीर मुद्दे को अपना सबसे बड़ा चुनावी हथियार बनाने का निर्णय ले लिया है। गृह मंत्री के इस हाई-प्रोफाइल दौरे से पंजाब के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और 'आप' तथा बीजेपी के बीच तीखे जुबानी तीर चलने शुरू हो गए हैं।

एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट और नशे के कारण अपनों को खोने वाले पीड़ितों के परिवारों से करेंगे सीधी मुलाकात

गृह मंत्री अमित शाह के इस दौरे की सबसे खास बात यह है कि वे इस बार केवल बड़ी जनसभाओं या रैलियों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर नशे से प्रभावित परिवारों और नशा विरोधी अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं के घरों तक पहुंचेंगे। अमित शाह मानसा, गुरदासपुर और संगरूर जिलों का दौरा कर हाल ही में नशे के कारोबार का विरोध करने के कारण अपनी जान गंवाने वाले एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा के परिजनों और नशा तस्करी से जुड़ी हिंसक घटनाओं में शिकार हुए अन्य पीड़ितों के परिवारों से व्यक्तिगत मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करेंगे। इसके अलावा वे सीमावर्ती क्षेत्रों से हो रही नशीले पदार्थों की ड्रोन तस्करी और गिरोहों की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और राज्य पुलिस के उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी कर सकते हैं।

विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पंजाब में अकेले दम पर सरकार बनाने की भाजपा की रणनीति

अतीत में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली बीजेपी ने इस बार साफ कर दिया है कि वह पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरेगी। राज्य में अपने आधार को मजबूत करने और किसान आंदोलन के बाद उपजे राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए बीजेपी ने नशे के सफाए को अपना मुख्य चुनावी एजेंडा चुना है। गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब की जनता से वादा किया है कि यदि राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है, तो दिसंबर 2029 तक पंजाब को पूरी तरह से 'नशा मुक्त' बना दिया जाएगा। 21 दिनों में दूसरा दौरा यह दर्शाता है कि बीजेपी आलाकमान पंजाब को लेकर अपनी रणनीति पर अत्यंत गंभीरता से काम कर रहा है और केंद्रीय नेतृत्व खुद राज्य के चुनावी प्रबंधन की कमान अपने हाथों में थामे हुए है।

आम आदमी पार्टी का पलटवार: 'मुंद्रा पोर्ट से आने वाले नशे पर केंद्र सरकार दे जवाब'

अमित शाह के दौरे की घोषणा के बाद सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी पलटवार करने में देर नहीं की। पंजाब 'आप' के प्रवक्ताओं और नेताओं ने गृह मंत्री के आरोपों को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि भगवंत मान सरकार ने राज्य में 'युद्ध नशे के विरुद्ध' (Yudh Nashean Virudh) नामक बड़ा अभियान चला रखा है, जिसके तहत सैकड़ों तस्कर जेल के पीछे भेजे गए हैं और करोड़ों रुपये का ड्रग्स जब्त किया गया है। आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्रीय एजेंसियों की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को सुरक्षित रखना है। उन्होंने मांग की कि गृह मंत्री पहले यह जवाब दें कि गुजरात के मुंद्रा पोर्ट और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के रास्ते देश में नशे की खेप कैसे प्रवेश कर रही है।

क्या नशे का मुद्दा पंजाब की भावी राजनीति की दिशा तय करेगा?

पंजाब की जवानी को अंदर से खोखला कर रहा 'चिट्टा' और अन्य घातक ड्रग्स हमेशा से चुनावों का एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। जहां 2017 और 2022 के चुनावों में कांग्रेस व आम आदमी पार्टी ने नशे को खत्म करने के वादे पर जनता का समर्थन हासिल किया था, वहीं अब बीजेपी इसी हथियार के जरिए भगवंत मान सरकार को कठघरे में खड़ा कर रही है। अमित शाह का यह दौरा और पीड़ित परिवारों के साथ उनकी सीधी एकजुटता राज्य में बीजेपी के पक्ष में एक नया राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश है। आगामी दिनों में पंजाब की राजनीति में यह जंग और भी दिलचस्प व आक्रामक होने वाली है, क्योंकि चुनाव आयोग द्वारा तिथियों के ऐलान से पहले ही सभी दल अपनी पूरी ताकत झोंकने में जुट गए हैं।