लड़कों में रोहित ने जलाई थी मसाल, लड़कियों में मंधाना ने भरा नया जज्बा

लड़कों में रोहित ने जलाई थी मसाल, लड़कियों में मंधाना ने भरा नया जज्बा

भारतीय क्रिकेट इतिहास में इस वक्त एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसने देश के खेल प्रेमियों और क्रिकेट पंडितों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कुछ समय पहले तक जहां भारतीय पुरुष टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने मैदान पर पारंपरिक और रक्षात्मक क्रिकेट को छोड़कर एक पूरी तरह से आक्रामक, निडर और 'बिना किसी डर के' (Fearless Cricket) खेलने की जो मसाल जलाई थी, ठीक उसी प्रेरणादायक राह पर अब भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान और स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना तथा पूरी महिला ब्रिगेड भी पूरी मजबूती से आगे बढ़ रही है। हाल ही में खेली गई सीरीज के शुरुआती शुरुआती दो मैचों में ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिस प्रकार का विस्फोटक और बेखौफ अंदाज मैदान पर दिखाया है, उसने विरोधी टीमों के होश उड़ा दिए हैं। इस बदलाव ने यह साबित कर दिया है कि आने वाले समय में हमारी बेटियां किसी भी परिस्थिति में दबाव में खेलने के बजाय अपनी शर्तों पर मैच जीतने का माद्दा रखती हैं।

रोहित शर्मा के उस ऐतिहासिक मंत्र की गूंज अब महिला क्रिकेट में भी साफ सुनाई दे रही है

जब से रोहित शर्मा ने भारतीय पुरुष टीम की कमान संभाली और टेस्ट तथा सीमित ओवरों के क्रिकेट में 'इंटेंट' (Intent) यानी इरादे को सर्वोपरि रखा, तब से भारतीय क्रिकेट की परिभाषा ही बदल गई। पावरप्ले का भरपूर इस्तेमाल करना, शुरुआती ओवरों में गेंदबाजों पर मानसिक दबाव बनाना और विकेट खोने की परवाह किए बिना तेजी से रन बनाना—यह रोहित का वह मंत्र था जिसने विश्व क्रिकेट में भारत का दबदबा कायम किया। अब ठीक यही आक्रामक डीएनए भारतीय महिला टीम की बल्लेबाजी में भी गहराई तक उतरता हुआ दिखाई दे रहा है। स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा और कप्तान हरमनप्रीत कौर जैसे खिलाड़ियों के बयानों और मैदान पर उनके कदमों के तालमेल से यह साफ झलकता है कि टीम मैनेजमेंट ने खिलाड़ियों के मन से हार का डर पूरी तरह निकाल दिया है। अब खिलाड़ी सिर्फ क्रीज पर टिकने के लिए नहीं, बल्कि मैच का रुख बदलने के इरादे से मैदान पर उतरती हैं।

शुरुआती दो मैचों में ही नजर आया वह विध्वंसक अंदाज, विरोधी खेमे में मचा हड़कंप

हाल ही में शुरू हुई इस रोमांचक सीरीज के शुरुआती दो मुकाबलों में ही भारतीय महिला बल्लेबाजों ने जिस तरह का तांडव मचाया, उसने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। पहले मैच की पहली गेंद से ही बल्लेबाजों ने विपक्षी गेंदबाजों के खिलाफ कड़े तेवर अपनाए और बाउंड्री की बरसात कर दी। पावरप्ले के शुरुआती छह ओवरों में ही जिस गति से रन बटोरे गए, उसने यह दिखा दिया कि अब हमारी बेटियां धीमा खेलने के पुराने ढर्रे को पीछे छोड़ चुकी हैं। क्रीज पर पैर जमाने के लंबे इंतजार के बजाय सीधे बड़े शॉट्स खेलने की यह कला इस बात का प्रमाण है कि टीम ने आधुनिक टी-20 और वनडे क्रिकेट की जरूरतों को पूरी तरह आत्मसात कर लिया है। विरोधी टीमों के कप्तान और रणनीतिकार इस बात से हैरान हैं कि भारतीय बल्लेबाजों को रोकने के लिए उनके पास कोई सटीक योजना काम नहीं आ रही है।

मानसिक मजबूती और फिटनेस बन रही है इस नए आक्रामक युग की सबसे बड़ी ताकत

इस प्रकार के निडर और आक्रामक खेल को मैदान पर उतारने के लिए केवल तकनीकी कौशल काफी नहीं होता, बल्कि इसके लिए गजब की मानसिक मजबूती और शारीरिक फिटनेस की भी जरूरत होती है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पिछले कुछ सालों में अपनी फिटनेस के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बहुत ऊंचा उठाया है। मैदान पर तेजी से रन दौड़ना, खराब गेंदों को कैच में तब्दील करना और मुश्किल परिस्थितियों में भी घबराए बिना लगातार बड़े शॉट खेलने का यह साहस इसी कड़ी मेहनत का नतीजा है। स्मृति मंधाना ने हाल ही में एक इंटरव्यू में भी इस बात का जिक्र किया था कि जब टीम के भीतर डर की भावना खत्म हो जाती है, तो खिलाड़ी अपनी असली क्षमता से कहीं बेहतर प्रदर्शन करने में सफल हो जाती हैं। कोच और सहयोगी स्टाफ का यह खुला समर्थन खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा टॉनिक साबित हो रहा है।

भविष्य के बड़े टूर्नामेंट्स के लिए एक बेहद सकारात्मक और शानदार संकेत

आगामी विश्व कप और अन्य बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टीम प्रबंधन की यह रणनीति बेहद दूरदर्शी और सराहनीय मानी जा रही है। दुनिया की तमाम बड़ी टीमें जैसे ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड हमेशा से ही अपने आक्रामक और निडर खेल के लिए जानी जाती रही हैं, और अब भारत ने भी उसी राह पर कदम रखकर बराबरी का संदेश दे दिया है। पुरुष क्रिकेट में रोहित शर्मा द्वारा जलाई गई उस मसाल की रोशनी अब महिला क्रिकेट के रास्ते पूरे देश को गौरवान्वित कर रही है। खेल प्रेमियों को अब पूरा भरोसा है कि आने वाले मुकाबलों में भारतीय बेटियां इसी तरह का धमाकेदार प्रदर्शन जारी रखेंगी और विश्व पटल पर देश का तिरंगा हमेशा ऊंचा लहराती रहेंगी।