पाकिस्तानी सेना के हवाई हमलों के बाद बौखलाया तालिबान, दी सीधी और खौफनाक धमकी
पड़ोसी देशों के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव और सरहद पार से होने वाली हिंसा के मामलों में एक बार फिर से बेहद दहला देने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने दक्षिण एशिया की शांति को खतरे में डाल दिया है। पाकिस्तानी सेना द्वारा अफगान सीमा से सटे इलाकों में किए गए ताबड़तोड़ हवाई हमलों (Airstrikes) के बाद से स्थिति बेहद विस्फोटक हो गई है। इन हमलों में कई बेकसूर नागरिकों और स्थानीय लोगों के हताहत होने की खबरों के बाद अफगान तालिबान बुरी तरह आगबबूला हो गया है। तालिबान सरकार के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य प्रवक्ताओं ने पाकिस्तान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि वे इस कायराना हरकत का ऐसा करारा और तगड़ा जवाब देंगे जिसे पाकिस्तानी सेना कभी नहीं भूल पाएगी। इस तीखी बयानबाजी के बाद दोनों मुल्कों के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जंग जैसे हालात बन गए हैं और सीमावर्ती इलाकों में तैनात सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रख दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच लंबे समय से सुलगते आ रहे विवादों को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ले आया है। कभी एक-दूसरे के रणनीतिक सहयोगी माने जाने वाले ये दोनों देश आज एक-दूसरे के खून के प्यासे नजर आ रहे हैं। आइए इस विस्तृत लेख के जरिए समझते हैं कि आखिर इस पूरे विवाद की जड़ क्या है, पाकिस्तानी हवाई हमलों के पीछे की असली वजह क्या रही और तालिबान की इस धमकी के बाद क्षेत्रीय राजनीति पर इसका क्या गहरा असर पड़ने वाला है।
अचानक क्यों भड़का विवाद? पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक और सीमावर्ती इलाकों में मची तबाही की पूरी कहानी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने अपनी सरहद की सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों का हवाला देते हुए अफगानिस्तान की सीमा के अंदर घुसकर कुछ संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए थे। इन एयरस्ट्राइक्स के दौरान कई रिहायशी मकानों और स्थानीय बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचा, जिससे वहां कोहराम मच गया। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में कई महिलाओं और बच्चों समेत आम नागरिकों की जान चली गई, जिसके बाद से अफगान अवाम और तालिबान सरकार का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। तालिबान के रक्षा मंत्रालय और वरिष्ठ अधिकारियों ने इन हमलों को अफगानिस्तान की संप्रभुता (Sovereignty) और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन करार दिया है।
तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं और नाकामियों का ठीकरा अफगानिस्तान के सिर फोड़ना चाहता है और सीमा पार से इस तरह की आक्रामकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पाकिस्तान की तरफ से यह तर्क दिया जा रहा है कि इन इलाकों में उन विद्रोही गुटों को पनाह दी जा रही है जो पाकिस्तानी सेना पर हमले करते हैं, लेकिन तालिबान इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। इस खींचतान के बीच सबसे बड़ा नुकसान सीमा के दोनों ओर बसने वाले उन आम नागरिकों का हो रहा है जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन वे इस खूनी संघर्ष की चक्की में पिसने को मजबूर हैं।
तालिबान की खुली धमकी: 'पाकिस्तान को उसकी औकात और ताकत का अहसास करा देंगे'
पाकिस्तानी हवाई हमलों की खबर सामने आने के ठीक बाद तालिबान सरकार के प्रवक्ता और सैन्य कमांडरों ने एक के बाद एक बेहद आक्रामक बयान जारी किए हैं। तालिबान के एक वरिष्ठ कमांडर ने खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि पाकिस्तान यह भ्रम छोड़ दे कि वह बिना किसी परिणाम के अफगान सीमा पर बमबारी कर सकता है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि तालिबान अपने देश की एक-एक इंच जमीन की रक्षा करने के लिए पूरी तरह सक्षम है और समय आने पर पाकिस्तान को ऐसा करारा जवाब दिया जाएगा जो उसकी सोच से भी परे होगा। इस धमकी के बाद से दोनों देशों की सेनाएं बॉर्डर पर आमने-सामने आ गई हैं और किसी भी वक्त बड़ी झड़प होने की आशंका जताई जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि तालिबान के पास अब असिमेट्रिक वॉरफेयर और सीमा पार जवाबी कार्रवाई के अपने तरीके हैं, जिससे पाकिस्तान के भीतर सुरक्षा संकट और अधिक गहरा सकता है। पाकिस्तान पहले ही अपनी खराब आर्थिक स्थिति, आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता और बलूच तथा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के विद्रोहियों से जूझ रहा है, ऐसे में तालिबान के साथ सीधा सैन्य टकराव उसके लिए किसी बड़े आर्थिक और सैन्य झटके से कम नहीं होगा।
डूरंड लाइन विवाद और लंबे समय से चल रहा भू-राजनीतिक तनाव: क्या है आपसी रंजिश की असली वजह?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव का यह मुद्दा नया नहीं है, बल्कि इसके पीछे दशकों पुराना 'डूरंड लाइन' (Durand Line) का सीमा विवाद और कूटनीतिक अविश्वास की लंबी कहानी है। जब से अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता दोबारा स्थापित हुई है, तब से पाकिस्तान को यह उम्मीद थी कि अफगान तालिबान उसकी हर बात मानेगा और उसके इशारे पर काम करेगा, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली। अफगान तालिबान ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को प्राथमिकता दी, जिससे दोनों देशों के बीच दूरियां लगातार बढ़ती चली गईं। इसके अलावा, सीमा पार बाड़ लगाने और मूवमेंट को नियंत्रित करने के मुद्दों पर भी दोनों पक्षों में अक्सर खूनी झड़पें होती रहती हैं।
पाकिस्तान लगातार यह दबाव बनाता रहा है कि अफगान सरकार अपनी धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी ताकतों को न करने दे, जबकि तालिबान का आरोप है कि पाकिस्तान अपनी नाकामियों का ठीकरा उन पर फोड़ रहा है और बिना सबूत के हमले कर रहा है। आपसी संवाद के सारे रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं और अब कूटनीति की जगह बंदूकों की भाषा ने ले ली है, जो पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
क्षेत्रीय शांति पर मंडराता खतरा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता
पाकिस्तान और तालिबान के बीच बिगड़ते इन रिश्तों का असर केवल इन दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव पूरे मध्य और दक्षिण एशिया पर पड़ेगा। अमेरिका और पश्चिमी देशों के अफगानिस्तान से हटने के बाद से ही इस क्षेत्र में शून्यता की स्थिति बनी हुई है, और यदि यहां दो पड़ोसी देश आपस में युद्ध जैसी स्थिति में आ जाते हैं, तो आतंकवाद और शरणार्थी संकट जैसी समस्याएं बेकाबू हो सकती हैं। दुनिया भर के देश इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और शांति की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर सुलगती आग शांत होने का नाम नहीं ले रही है।