ब्रिक्स मीटिंग से पहले अमेरिका और ईरान के बीच समंदर में खूनी खेल: भारतीय क्रू वाले जहाज पर अमेरिकी नेवी का हमला
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और समंदर की भू-राजनीति में इन दिनों तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है, और दुनिया के तमाम देश आगामी महत्वपूर्ण ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों में व्यस्त हैं। इसी बीच मध्य पूर्व और समुद्री जलमार्गों से एक बेहद दहला देने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने ग्लोबल कूटनीति में भूचाल ला दिया है। खाड़ी के पानी के पास एक भारतीय क्रू वाले कमर्शियल जहाज पर अमेरिकी नौसेना द्वारा अचानक ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया, जिससे जहाज पर मौजूद नाविकों की जान पर आफत बन आई। अमेरिकी नेवी की इस आक्रामक कार्रवाई के बाद समंदर में मची चीख-पुकार के बीच ईरान की सेना और तटरक्षक बलों ने मानवता का परिचय देते हुए या अपनी रणनीतिक चाल के तहत आगे बढ़कर उस जहाज के 21 भारतीय नाविकों की जान सुरक्षित बचा ली। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और हमले के बाद से अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों की निगाहें इस घटना के बाद के समीकरणों पर टिक गई हैं।
#ब्रिक्स मीटिंग से ठीक पहले समंदर में बड़ा भूचाल और अमेरिकी नेवी की कार्रवाई
वैश्विक स्तर पर जब देश ब्रिक्स मंच के माध्यम से आपसी सहयोग, शांति और आर्थिक साझेदारी के नए रास्ते तलाशने की तैयारी कर रहे हैं, ठीक उसी समय पश्चिम एशिया के जलमार्गों में इस तरह की सैन्य झड़पें होना इस बात का संकेत है कि वैश्विक महाशक्तियों के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जिस वक्त भारतीय नाविकों से भरा यह जहाज अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग से गुजर रहा था, अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों द्वारा उस पर संदिग्ध गतिविधियों का हवाला देते हुए अचानक हमला बोल दिया गया। जानकारों का मानना है कि ब्रिक्स देशों के बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव से असहज महसूस कर रही पश्चिमी ताकतों के बीच इस तरह की घटनाएं कूटनीतिक दबाव बनाने का एक नया जरिया बनती जा रही हैं। इस अचानक हुए हमले ने न केवल समुद्री व्यापार से जुड़े नियमों को तार-तार कर दिया है, बल्कि उन नाविकों की सुरक्षा को भी भगवान भरोसे छोड़ दिया है जो अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए समंदर की इन खतरनाक लहरों के बीच सफर करते हैं।
#भारतीय क्रू सदस्यों पर कैसे आई आफत और अमेरिकी हमले की पूरी दास्तान
हमले के शिकार हुए इस जहाज पर कुल 21 भारतीय नाविक सवार थे, जो विभिन्न राज्यों से ताल्लुक रखते हैं और अपने परिवारों के भरण-पोषण के लिए मर्चेंट नेवी या कमर्शियल जहाजों पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। अमेरिकी नेवी द्वारा अचानक की गई इस गोलीबारी और एयर स्ट्राइक जैसे दबाव के कारण जहाज के इंजन और नियंत्रण कक्ष को भारी नुकसान पहुंचा, जिससे जहाज बीच समंदर में असंतुलित होकर डूबने की कगार पर पहुंच गया। भारतीय नाविकों के लिए वह पल किसी भयानक सपने जैसा था क्योंकि दूर-दूर तक कोई मदद नजर नहीं आ रही थी और मौत उनके बिल्कुल सामने मंडरा रही थी। जहाज के डेक पर अफरा-तफरी मच गई और नाविकों ने तुरंत अपने देश के दूतावासों और मैदिटाइम पोर्ट अथॉरिटी को संकट का संदेश भेजना शुरू कर दिया। गनीमत यह रही कि समय रहते स्थिति की गंभीरता भांप ली गई, वरना यह हमला इतिहास के सबसे बड़े समुद्री हादसों में से एक बन सकता था।
#ईरान के तटरक्षक बलों की एंट्री और 21 भारतीय नाविकों का रेस्क्यू ऑपरेशन
जब भारतीय नाविक अमेरिकी नेवी के हमले के बाद बीच समंदर में मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष कर रहे थे, ठीक उसी वक्त ईरान के नौसेना और तटरक्षक बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मोर्चा संभाल लिया। खाड़ी के उस इलाके में गश्त लगा रहे ईरानी युद्धपोतों ने संकट में फंसे जहाज का सिग्नल मिलते ही तुरंत अपने रेस्क्यू दलों को मौके के लिए रवाना कर दिया। ईरानी सुरक्षा बलों ने भारी गोलीबारी और तनावपूर्ण माहौल के बीच अद्भुत साहस दिखाते हुए डूब रहे जहाज तक अपनी पहुंच बनाई और उसमें सवार सभी 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। ईरान द्वारा बचाए गए इन सभी भारतीय नाविकों को सुरक्षित बंदरगाह पर लाया गया है, जहां उन्हें प्राथमिक चिकित्सा, भोजन और रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। इस साहसिक बचाव अभियान के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ईरान के इस कदम की चर्चा जोरों पर है, क्योंकि एक तरफ जहां अमेरिका के साथ उसके संबंध लंबे समय से खटास भरे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उसने संकट में फंसे भारतीय नागरिकों की जान बचाकर एक बड़ा संदेश दिया है।
#भारत सरकार की कूटनीतिक प्रतिक्रिया और नाविकों की सुरक्षित वापसी की तैयारी
इस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय और भारत सरकार का समुद्री सुरक्षा महकमा पूरी तरह से हरकत में आ गया है। भारत सरकार ने तेहरान स्थित भारतीय दूतावास और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे बचाए गए सभी 21 भारतीय नाविकों के संपर्क में लगातार रहें और उनकी सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिए हरसंभव कानूनी व प्रशासनिक कदम उठाएं। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उन्हें किसी भी तरह की गंभीर शारीरिक चोट नहीं आई है, जिससे उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, भारत सरकार इस बात की भी कूटनीतिक स्तर पर समीक्षा कर रही है कि आखिर अमेरिकी नौसेना ने किस बिनाह पर एक वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाया जिसमें भारतीय नागरिक सवार थे। अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों का कहना है कि व्यापारिक जहाजों पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री संधियों का खुला उल्लंघन है, जिसे भारत वैश्विक मंचों पर मजबूती से उठा सकता है।
#अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और भविष्य की रणनीतिक चुनौतियां
इस पूरी घटना ने एक बार फिर से इस कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है कि दुनिया के प्रमुख समुद्री मार्ग कितने असुरक्षित होते जा रहे हैं जहां महाशक्तियों की आपसी खींचतान का खामियाजा निर्दोष नाविकों और विकासशील देशों को भुगतना पड़ता है। ब्रिक्स देशों की आगामी बैठक से ठीक पहले इस तरह की घटना का होना इस बात की ओर इशारा करता है कि आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्गों पर नियंत्रण को लेकर संघर्ष और अधिक तीव्र हो सकता है। भारत जैसे देश के लिए, जिसके कुल आयात और निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा समुद्र के रास्ते होता है, अपने नागरिकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। ईरान द्वारा बचाए गए इन 21 भारतीय नाविकों की घर वापसी का इंतजार पूरा देश कर रहा है, लेकिन इस घटना ने वैश्विक राजनीति के उन काले सच से भी पर्दा उठा दिया है जो पर्दे के पीछे दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध जैसी विभीषणता के मुहाने पर धकेलने का काम कर रहे हैं।