यूएनजीए के मंच पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर का पाकिस्तान पर ऐतिहासिक प्रहार

यूएनजीए के मंच पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर का पाकिस्तान पर ऐतिहासिक प्रहार

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित मंच संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र से इस वक्त दुनिया भर के राजनीतिक गलियारों और मीडिया में सनसनी मचा देने वाली बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। अमरीका के न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित इस वैश्विक महाकुंभ में एक बार फिर से भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक जंग का ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भारत के ओजस्वी और बेबाक विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने यूएनजीए के मंच पर आतंकवाद के प्रायोजकों और पनाहगारों को आड़े हाथों लेते हुए एक ऐसा करारा और तीखा जवाब दिया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) और उनका पूरा प्रतिनिधिमंडल सुनने की हिम्मत जुटाए बिना ही मैदान छोड़कर भाग खड़ा हुआ। वैश्विक आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को बेनकाब करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। एस. जयशंकर के इस कड़क और दमदार भाषण के दौरान संयुक्त राष्ट्र हॉल में मौजूद सभी देशों के प्रतिनिधियों ने भारत की मुखर नीति की सराहना की। पाकिस्तान द्वारा कश्मीर और अन्य आंतरिक मामलों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाए जाने के बाद भारत के विदेश मंत्री ने जिस आक्रामक और तार्किक शैली में पाकिस्तान को उसके ही घर में घुसकर आईना दिखाया है, उसने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि यूएनजीए के इस मंच पर आखिर क्या कुछ घटा, एस. जयशंकर के भाषण के मुख्य बिंदु क्या थे और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री क्यों वहां से खिसकने पर मजबूर हो गए।

संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह वार्षिक सत्र हमेशा से ही दुनिया भर के देशों के लिए अपनी नीतियों और प्राथमिकताओं को रखने का सबसे बड़ा मंच माना जाता है, लेकिन जब-जब भारत के प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों का पर्दाफाश किया है, तब-तब इतिहास बना है। इस बार भी जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रोस्टर पर आकर भाषण देना शुरू किया, तो उन्होंने कूटनीतिक भाषा की मर्यादा में रहते हुए भी आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) नीति को दुनिया के सामने पूरी दृढ़ता से रखा। पाकिस्तान की तरफ से लगातार वैश्विक मंचों का दुरुपयोग करके भारत के खिलाफ अनर्गल प्रलाप करने की पुरानी आदत रही है, जिसका जवाब इस बार भारत ने कूटनीतिक और तथ्यात्मक प्रहार से दिया। जैसे ही एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को 'आतंकस्तान' और आतंकवाद का ग्लोबल एपिसेंटर करार देते हुए सवाल उठाने शुरू किए, पाकिस्तानी खेमे में खलबली मच गई और खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ असहज होकर अपने सहयोगियों के साथ वहां से उठकर चलते बने। आइए जानते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की कूटनीतिक पृष्ठभूमि क्या है और वैश्विक मंच पर इसके क्या दूरगामी परिणाम होने वाले हैं।

एस. जयशंकर का ऐतिहासिक संबोधन: आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर दी दो टूक चेतावनी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूएनजीए के सत्र को संबोधित करते हुए दुनिया को यह याद दिलाया कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है और जो देश अपनी नीतियों के रूप में आतंकवाद का समर्थन करते हैं, वे कभी भी अंतरराष्ट्रीय शांति और प्रगति के हिस्सेदार नहीं बन सकते। अपने भाषण के दौरान उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के सीधे तौर पर पड़ोसी देश पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसकी करतूतों की धज्जियां उड़ा दीं। एस. जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश अब अपनी इस पुरानी चाल से बच नहीं सकते, क्योंकि दुनिया की बड़ी ताकतें भी अब इस सच्चाई को अच्छी तरह समझ चुकी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से कभी समझौता नहीं करेगा और आतंकवादियों तथा उनके आकाओं को उनके ही अंदाज में जवाब देना अच्छी तरह जानता है। उनके इस बेबाक और स्पष्टवादी भाषण ने भारत की मजबूत विदेश नीति का एक नया लोहा मनवाया है, जिसकी गूंज अब पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है।

शहबाज शरीफ का मैदान छोड़कर भागना और दुनिया के सामने पाकिस्तान की किरकिरी

जब भारत के विदेश मंत्री दुनिया के सबसे बड़े मंच से आतंकवाद के खिलाफ दुनिया को एकजुट होने का आह्वान कर रहे थे और पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद की पोल खोल रहे थे, तब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके अधिकारी अपनी कुर्सियों पर टिक नहीं पाए। सच्चाई का सामना करने की हिम्मत न होने के कारण वे चुपचाप वहां से खिसक लेने में ही अपनी भलाई समझी। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान की यह भगोड़ी प्रवृत्ति इस बात का सबूत है कि वे वैश्विक मंचों पर अपने ऊपर लगे आतंकवाद के दागों का कोई तार्किक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। इस पूरी घटना के बाद सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक में भारत के दबदबे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के कूटनीतिक कौशल की जमकर तारीफ हो रही है। भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह अपनी कूटनीति के दम पर न केवल अपनी बात मजबूती से रखना जानता है, बल्कि दुश्मनों के नापाक मंसूबों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर धूल चटाना भी अच्छी तरह जानता है।