जॉर्डन के ऐतिहासिक चर्च में कत्लेआम: गाड़ी से उतरे और तान दी एके-47, गोलीबारी में 7 की मौत और दर्जनों घायल
मध्य पूर्व के शांत और स्थिर देशों में गिने जाने वाले जॉर्डन से एक बेहद दहला देने वाली और खौफनाक घटना सामने आई है। जॉर्डन के ऐतिहासिक शहर कराक के एक चर्च में उस वक्त कोहराम मच गया, जब वहां एक अंतिम संस्कार की रस्म चल रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, अचानक एक गाड़ी तेजी से चर्च के पास आकर रुकी। उस वाहन से ताबड़तोड़ उतरे हमलावरों ने बिना एक पल गंवाए एके-47 और अन्य अत्याधुनिक हथियारों से वहां मौजूद निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस वीभत्स आतंकी हमले में कम से कम 7 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस अचानक हुए खूनी संघर्ष से पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई और हर तरफ चीख-पुकार सुनाई देने लगी।
अंतिम संस्कार की खुशियां मातम में बदलीं, हथियारों से लैस होकर आए थे हमलावर
यह खौफनाक वारदात जॉर्डन की राजधानी अम्मान से करीब 180 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कराक गवर्नरेट के हमौद गांव में बने ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च के बाहर और उसके परिसर में घटी। शुक्रवार का दिन था और चर्च के भीतर व आसपास एक स्थानीय व्यक्ति के अंतिम संस्कार का जुलूस निकला हुआ था। इस अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए करीब डेढ़ से दो सौ लोग जुटे हुए थे। लोग अपने बिछड़े हुए साथी को अंतिम विदाई दे रहे थे कि तभी मौत बनकर पहुंचे नकाबपोश हमलावरों ने शांति के माहौल को खून से लाल कर दिया। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा खंगाले गए सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों से यह साफ हुआ है कि हमलावर सुनियोजित तरीके से घात लगाकर आए थे। गाड़ी से उतरते ही उन्होंने पेड़ों और दीवारों की आड़ लेकर भीड़ को निशाना बनाया और कई मिनटों तक लगातार फायरिंग जारी रखी।
खून से सनी फर्श और गूंजती चीखें, चश्मदीदों ने बयां किया खौफनाक मंजर
गोलीबारी की इस घटना के बाद चर्च के प्रवेश द्वार और प्रांगण का नजारा दिल दहला देने वाला था। फर्श पर चारों तरफ खून के धब्बे बिखरे पड़े थे और लोगों के जूते-चप्पल तथा सामान इधर-उधर बिखरे हुए थे। अंतिम संस्कार के जुलूस में शामिल रहे चश्मदीद खालिद बुरकान ने स्थानीय मीडिया चैनल 'अल-ममलका' को अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि हमलावरों के पास राइफल और पिस्तौल जैसे घातक हथियार थे। उन्होंने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाते हुए किसी को भी संभलने का मौका नहीं दिया। इस अचानक हुए हमले की चपेट में आकर कई बुजुर्गों और स्थानीय नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही जॉर्डन के सुरक्षा बल और पुलिस के आला अधिकारी भारी अमले के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके को अपने घेरे में ले लिया।
घायलों की हालत गंभीर, अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित और देश में हाई अलर्ट
इस भीषण गोलीबारी की घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है, जबकि लगभग 34 अन्य लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। घायलों में से कई लोगों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जॉर्डन के पब्लिक सिक्योरिटी डायरेक्टर ओबेदल्लाह मायताह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि दर्जनों घायलों का इलाज युद्ध स्तर पर जारी है। इस अचानक हुए खूनी खेल के बाद देश के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। जॉर्डन सरकार के प्रवक्ता मोहम्मद अल-मोमानी और देश के गृह मंत्रालय ने इस घटना को एक सोची-समझी आतंकी करतूत करार दिया है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां हर संभावित एंगल से गहराई से जांच-पड़ताल कर रही हैं।
राजा अब्दुल्ला II का कड़ा रुख, कहा- देश की एकता को तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा
इस जघन्य हत्याकांड के बाद जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला II ने बहुत सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अपने एक आधिकारिक बयान में दो टूक शब्दों में कहा है कि कराक शहर को दहलाने वाली इस आतंकवादी घटना का बेहद कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। राजा ने देश की जनता को आश्वस्त किया है कि जो लोग यह नापाक गलतफहमी पाल रहे हैं कि वे ऐसी कायराना हरकतों और गोलियों की ताकत से जॉर्डन के नागरिकों को आपस में बांट देंगे, वे देश की मजबूत एकता और भाईचारे के सामने कभी टिक नहीं पाएंगे। गौरतलब है कि कराक शहर में ईसाई समुदाय आबादी के लिहाज से अल्पसंख्यक श्रेणी में आता है। इससे पहले साल 2016 में भी कराक शहर में पर्यटकों और पुलिस बलों को निशाना बनाकर आतंकवादी हमले किए जा चुके हैं, जिसके बाद से यह क्षेत्र सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता रहा है। फिलहाल, फरार हमलावरों की धरपकड़ के लिए पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर कॉम्बिंग और सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।