संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग का पाकिस्तान ने किया कड़ा विरोध
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और संयुक्त राष्ट्र के गलियारों से इस वक्त एक ऐसी खबर सामने आई है जो एक बार फिर यह साबित करती है कि पाकिस्तान अपनी संकीर्ण और नकारात्मक सोच से कभी बाहर नहीं आ सकता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के विस्तार और उसमें भारत को स्थायी सदस्यता दिए जाने की मांग का समर्थन पूरी दुनिया के तमाम बड़े देश लगातार कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान की बौखलाहट एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर शहबाज शरीफ सरकार के दूत ने भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का कड़ा विरोध करते हुए एक बार फिर वही पुराना और बेतुका राग अलापा है। पाकिस्तान का यह रोना ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया का हर जिम्मेदार देश यह मान चुका है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश और उभरती हुई आर्थिक ताकत भारत को वैश्विक सुरक्षा के सबसे बड़े मंच पर उसका हक मिलना चाहिए। आइए जानते हैं कि पाकिस्तान के इस नए पैंतरे के पीछे की पूरी कूटनीतिक कहानी क्या है और दुनिया भर के देश इस पर क्या प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
UN Security Council Expansion: क्यों जरूरी हो गया है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बदलाव और भारत की स्थायी दावेदारी का समर्थन
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की गई थी, और तब से लेकर आज तक वैश्विक राजनीति और शक्ति संतुलन में जमीन-आसमान का बदलाव आ चुका है। वर्तमान में सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देश (P5) हैं, जिनकी संरचना आज की आधुनिक दुनिया की वास्तविकताओं को बिल्कुल भी प्रतिबिंबित नहीं करती है। दुनिया की लगभग एक-छठी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत जैसे विशाल, लोकतांत्रिक और शांतिप्रिय देश को यदि शीर्ष निर्णय लेने वाली इस संस्था से बाहर रखा जाता है, तो संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यही वजह है कि अमेरिका, फ्रांस, रूस और ब्रिटेन समेत दुनिया के कई ताकतवर देश इस बात की वकालत कर रहे हैं कि सुरक्षा परिषद का विस्तार किया जाना चाहिए और भारत को इसका स्थायी सदस्य बनाया जाना चाहिए। लेकिन इस वैश्विक आम सहमति के बीच केवल पाकिस्तान ही एकमात्र ऐसा देश है जो अपनी पुरानी आदत से मजबूर होकर हर वैश्विक मंच पर इस प्रगतिशील कदम में रोड़ा अटकाने की कोशिश करता रहता है।
Pakistan Envoy Obsolete Rant: पाकिस्तान के दूत ने यूएन में फिर अलापा पुराना राग, कहा- भारत को वीटो पावर मिलना क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा दिए गए ताजा बयान में एक बार फिर वही घिसी-पिटी और आधारहीन दलीलें दी गई हैं। पाकिस्तानी दूत ने यह बेतुका राग अलापा कि भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता या वीटो का अधिकार (Veto Power) देने से दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन बिगड़ जाएगा और क्षेत्र की शांति खतरे में पड़ जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कश्मीर और अन्य आंतरिक मामलों का रोना रोते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भटकाने की असफल कोशिश की। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह हरकत उसकी राजनीतिक लाचारी और कूटनीतिक दिवालियापन को दर्शाती है, क्योंकि दुनिया का कोई भी देश अब उसके इन झूठे और निराधार बयानों को गंभीरता से नहीं लेता है। पाकिस्तान खुद अपने देश के भीतर आर्थिक बदहाली, आतंकवाद और राजनीतिक अस्थिरता के गहरे दलदल में फंसा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद उसकी फितरत हमेशा से भारत विरोध की चादर ओढ़े रहने की ही रही है।
Global Support for India: दुनिया के तमाम ताकतवर देश दे रहे हैं भारत का साथ, पाकिस्तान की हर साजिश हो रही है पूरी तरह बेनकाब
भारत की वैश्विक कूटनीति और उसकी बढ़ती आर्थिक व सैन्य ताकत का ही असर है कि आज दुनिया के अधिकांश देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के सबसे बड़े पैरोकार बन चुके हैं। ग्लोबल साउथ (Global South) के देशों के साथ-साथ पश्चिमी महाशक्तियां भी यह मानती हैं कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति रखने वाला और दुनिया को शांति का संदेश देने वाला भारत यदि UNSC का स्थायी सदस्य बनता है, तो इससे पूरी दुनिया में स्थिरता आएगी। पाकिस्तान चाहे जितनी भी कोशिश कर ले या संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर जितने भी झूठे प्रस्ताव रख ले, उसकी इन हरकतों से भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा पर कोई आंच नहीं आने वाली है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का यह अकेलापन इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि अब दुनिया उसके प्रोपेगैंडा को समझ चुकी है और उसे पूरी तरह से नकार चुकी है।