लाल सागर में हूती विद्रोहियों का खौफनाक उभार: अब ईरान के इशारों के मोहताज नहीं

लाल सागर में हूती विद्रोहियों का खौफनाक उभार: अब ईरान के इशारों के मोहताज नहीं

पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में सामरिक संतुलन तेजी से बदल रहा है। पिछले कुछ वर्षों तक दुनिया यमन के हूती विद्रोहियों को केवल ईरान के एक छद्म समूह (Proxy) के रूप में देखती थी। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब यह समीकरण पूरी तरह बदल चुका है। हूती विद्रोही अब तेहरान की कठपुतली नहीं रहे, बल्कि उन्होंने खुद को एक स्वायत्त, शक्तिशाली और तकनीकी रूप से सक्षम क्षेत्रीय सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित कर लिया है।

यमन के एक बड़े हिस्से पर अपना दबदबा मजबूत करने के बाद हूती विद्रोहियों ने लाल सागर, अदन की खाड़ी और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। ईरान से मिले शुरुआती समर्थन, मिसाइल तकनीक और ड्रोन सहायता के आधार पर हूती समूह ने अब खुद की हथियार निर्माण और असेंबलिंग क्षमता विकसित कर ली है। अब वे तेहरान के हर निर्देश के मोहताज नहीं हैं, बल्कि वे अपने रणनीतिक फैसले खुद ले रहे हैं।

खाड़ी में बढ़ता सैन्य प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर मंडराता गंभीर संकट

लाल सागर अंतरराष्ट्रीय व्यापार की जीवन रेखा माना जाता है। दुनिया का लगभग 12 प्रतिशत व्यापार और 30 प्रतिशत से अधिक कंटेनर ट्रैफिक इसी रास्ते से गुजरता है। हूती विद्रोहियों ने ड्रोन और एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलों से वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हमले करके पूरे वैश्विक व्यापार तंत्र को हिलाकर रख दिया है।

खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति और शक्ति का प्रदर्शन करते हुए हूतियों ने यह साबित कर दिया है कि वे जब चाहें, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) को बाधित कर सकते हैं। जहाजों को अब अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' के रास्ते लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है। इससे न केवल माल ढुलाई (Freight Charges) का खर्च तीन गुना तक बढ़ गया है, बल्कि जहाजों के पहुंचने की अवधि में भी दो से तीन हफ्ते की देरी हो रही है। इस वजह से वैश्विक बाजार में ईंधन, खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।

एक्सपर्ट्स की भारत को बड़ी सलाह: समुद्री सुरक्षा और कूटनीति में बदलाव जरूरी

अंतरराष्ट्रीय मामलों और रक्षा विशेषज्ञों ने भारत सरकार को इस बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियों में तत्परता से बदलाव करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का लगभग 80 प्रतिशत से अधिक यूरोपीय और उत्तरी अमेरिकी व्यापार लाल सागर के रास्ते ही होता है। लाल सागर में असुरक्षा का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था, निर्यातकों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों द्वारा भारत को दी गई प्रमुख सिफारिशें निम्नलिखित हैं:

  1. नौसेना की उपस्थिति का विस्तार: भारतीय नौसेना (Indian Navy) को अदन की खाड़ी और अरब सागर में अपने गश्ती जहाजों (Patrol Vessels) की संख्या और निगरानी बढ़ानी चाहिए ताकि मर्चेंट जहाजों को सुरक्षा दी जा सके।

  2. सक्रिय नौसैनिक काफिला सुरक्षा (Convoy Escort): भारतीय ध्वज वाले और भारतीय क्रू सदस्यों से लैस जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए नौसैनिक सुरक्षा काफिला तकनीक को मजबूत किया जाए।

  3. बहुपक्षीय कूटनीति: भारत को खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान के साथ-साथ पश्चिमी सहयोगियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना चाहिए ताकि क्षेत्रीय स्थिरता कायम हो सके।

  4. वैकल्पिक व्यापारिक मार्गों पर ध्यान: भारत को उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) जैसी वैकल्पिक परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना चाहिए।