आकाश में पूरे 6 मिनट के लिए गायब हो जाएगा सूर्य, दिन के उजाले में छा जाएगा घना अंधेरा
खगोल विज्ञान और ब्रह्मांड के रहस्यों में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए बहुत जल्द एक ऐसा अद्भुत और दुर्लभ खगोलीय घटनाक्रम घटने जा रहा है, जिसे देखकर दुनिया भर की आंखें खुली की खुली रह जाएंगी। ब्रह्मांड में होने वाली इन घटनाओं के तहत बहुत जल्द एक पूर्ण सूर्यग्रहण (Total Solar Eclipse) लगने वाला है, जिसके दौरान आसमान में पूरे 6 मिनट और कुछ सेकंड के लिए सूरज पूरी तरह से गायब हो जाएगा। दिन के ठीक दोपहर के वक्त जब सूरज को चंद्रमा पूरी तरह से ढक लेगा, तो धरती पर अचानक ऐसा घना अंधेरा छा जाएगा जैसे कि आधी रात हो गई हो। वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों के लिए यह सदी के सबसे लंबे और रोमांचक सूर्यग्रहणों में से एक माना जा रहा है। इस अनोखे नजारे को देखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। आइए जानते हैं कि यह दुर्लभ सूर्यग्रहण कब लगने वाला है, इसके दौरान आसमान में क्या-क्या बदलाव देखने को मिलेंगे और इसे दुनिया के किस हिस्से में सबसे साफ तरीके से देखा जा सकेगा।
Scientific Reason Behind Solar Eclipse: क्या होती है पूर्ण सूर्यग्रहण की घटना और क्यों होती है दिन के वक्त अचानक रात जैसी स्थिति
खगोल विज्ञान के नियमों के अनुसार, सूर्यग्रहण एक ऐसी खगोलीय स्थिति है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों एक सीध में आ जाते हैं। इस दौरान चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरते हुए सूरज की रोशनी को पूरी तरह या आंशिक रूप से रोक लेता है। जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे पास होता है (जिसे पेरिजी कहा जाता है) और वह सूरज को पूरी तरह से ढक लेता है, तो पूर्ण सूर्यग्रहण की स्थिति बनती है। इस दौरान सूरज का कोरोना यानी उसका बाहरी चमकीला आवरण ही केवल एक अंगूठी की तरह चमकता हुआ दिखाई देता है, जिसे 'डायमंड रिंग' इफेक्ट भी कहा जाता है। चूंकि चंद्रमा सूर्य के सामने काफी देर तक रुका रहता है, इसलिए इस बार यह ग्रहण लगभग 6 मिनट तक टिकने वाला है, जो कि सामान्य सूर्यग्रहण की तुलना में काफी लंबा समय माना जाता है। इस दौरान तापमान में अचानक भारी गिरावट दर्ज की जाती है, पक्षी अपने घोंसलों की तरफ लौटने लगते हैं और प्रकृति का यह अद्भुत रूप देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।
Date and Visibility of the Eclipse: कब लगेगा यह ऐतिहासिक सूर्यग्रहण और भारत समेत किन देशों में साफ-साफ दिखाई देगा यह अद्भुत नजारा
दुनिया भर के वेधशालाओं और मौसम विज्ञानियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस साल लगने वाले इस पूर्ण सूर्यग्रहण की तारीख और समय को लेकर लोगों में भारी उत्सुकता है। हालांकि, भौगोलिक स्थिति के कारण यह पूर्ण सूर्यग्रहण दुनिया के हर कोने से एक साथ दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध, कुछ खास महासागरों और चुनिंदा देशों के ऊपर से गुजरेगा। जिन देशों या क्षेत्रों में यह सूर्यग्रहण 'टोटल सोलर Eclipse' के रूप में दिखेगा, वहाँ के लोगों को दिन के उजाले में कुछ पलों के लिए तारों के दर्शन हो सकेंगे। बात अगर भारत की की जाए, तो चूंकि यह ग्रहण भारतीय समयानुसार ऐसे वक्त में लगेगा जब यहाँ रात या दूसरा पहर होगा, इसलिए भारत में इसे सीधे तौर पर खुली आंखों से देखना संभव नहीं होगा। फिर भी, अंतरिक्ष प्रेमियों और विज्ञान प्रेमियों के लिए नासा (NASA) और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्पेस एजेंसियों द्वारा इसकी लाइव स्ट्रीमिंग (Live Streaming) की खास व्यवस्था की जाएगी ताकि कोई भी इस ऐतिहासिक पल को मिस न करे।
Safety Precautions and Precautions: सूर्यग्रहण को देखते वक्त बरतना बेहद जरूरी है ये सावधानियां, वरना आंखों को पहुंच सकता है भारी नुकसान
जब भी आकाश में सूर्यग्रहण जैसी कोई बड़ी घटना होती है, तो वैज्ञानिकों और नेत्र विशेषज्ञों की तरफ से आम जनता के लिए कुछ जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। सूर्यग्रहण को कभी भी अपनी नंगी या खुली आंखों से सीधे तौर पर नहीं देखना चाहिए, क्योंकि सूरज से निकलने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणें हमारी आंखों के रेटिना को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकती हैं। यदि आप इस अद्भुत नजारे को देखना चाहते हैं, तो इसके लिए हमेशा विशेष रूप से प्रमाणित सोलर व्यूइंग ग्लासेस (Solar Eclipse Glasses), प्रमाणित फिल्टर्स या पिपहोप प्रोजेक्टर का ही इस्तेमाल करें। साधारण सनग्लास या चश्मे इस हानिकारक रोशनी को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित होते हैं। इसके अलावा, धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार भी हमारे देश में ग्रहण के दौरान सूतक काल और खानपान से जुड़े कई नियमों का पालन किया जाता है, जिससे इस दौरान लोग विशेष सावधानी बरतते हैं।