यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने की पीएम मोदी के कूटनीतिक प्रयासों की तारीफ
दुनिया भर में दशकों से चली आ रही लड़ाइयों और वर्तमान समय में सबसे खतरनाक माने जाने वाले रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) को समाप्त करने के लिए अब भारत की कूटनीतिक पहल को वैश्विक स्तर पर बहुत बड़ी और ऐतिहासिक सफलता मिलती हुई दिखाई दे रही है। पिछले लंबे समय से भीषण गोलाबारी और तबाही का सामना कर रहे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने भारत की मध्यस्थता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेश किए गए शांति प्रस्तावों की खुलकर सराहना की है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने एक हालिया वैश्विक संबोधन और बयानों में यह स्पष्ट रूप से कहा है कि इस खूनी संघर्ष को रोकने के लिए दुनिया भर के देशों द्वारा जितने भी सुझाव दिए गए हैं, उनमें से 'दिल्ली का शांति प्रस्ताव' (Delhi's Peace Proposal) सबसे अधिक व्यावहारिक, न्यायसंगत और युद्धविराम कराने में सक्षम है। उत्तर प्रदेश से लेकर नई दिल्ली और पूरी दुनिया के राजनीतिक गलियारों में इस बयान के आने के बाद भारत की विदेश नीति (Indian Foreign Policy) का डंका एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर बज उठा है। पश्चिमी देशों और रूस के बीच संतुलन बनाते हुए भारत ने जिस निष्पक्ष और मानवतावादी दृष्टिकोण के साथ शांति का यह फार्मूला दुनिया के सामने रखा है, उसने वैश्विक महाशक्तियों को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बिना कूटनीतिक संवाद के किसी भी समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाना असंभव है।
क्या है भारत का वह चमत्कारी 'शांति फॉर्मूला' जिसने बदल दी रूस-यूक्रेन युद्ध की पूरी दिशा?
भारतीय कूटनीति के इस नए और प्रभावी 'शांति फॉर्मूले' की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय दोनों देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और वैश्विक मानवाधिकारों के बीच एक बेहतरीन संतुलन स्थापित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कूटनीतिक यात्राओं और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तथा यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ हुई वार्ताओं के दौरान हमेशा से इस बात पर जोर दिया है कि यह युग युद्ध का नहीं है और हर विवाद का समाधान केवल और केवल बातचीत तथा कूटनीति की मेज पर ही निकल सकता है। भारत के इसी दृष्टिकोण को अब वैश्विक शांति के लिए एक ब्लूप्रिंट के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें मानवीय सहायता, खाद्यान्न सुरक्षा, परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा और बिना किसी शर्त के शांति वार्ताओं की बहाली जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के भी कूटनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि भारत ने जिस प्रकार बिना किसी दबाव में आए अपनी स्वतंत्र और मजबूत विदेश नीति का परिचय दिया है, उसने भारत को दुनिया के एक 'विश्व मित्र' के रूप में स्थापित कर दिया है, जिसकी बात आज अमेरिका, यूरोप और रूस जैसे देश भी पूरी गंभीरता से सुन रहे हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के बदले तेवर और भारत की वैश्विक मध्यस्थता की गूंज
एक समय था जब यूक्रेन के अधिकारी भारत के रूस के साथ पारंपरिक और रक्षा संबंधों को लेकर कुछ हद तक असहज नजर आते थे, लेकिन भारत की स्पष्ट और पारदर्शी नीति ने अब पूरे परिदृश्य को ही बदलकर रख दिया है। राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का यह कहना कि भारत का शांति प्रस्ताव इस युद्ध को समाप्त करने का सबसे बेहतरीन रास्ता है, यह दर्शाता है कि कीव (Kyiv) अब नई दिल्ली की मध्यस्थता पर पूरा भरोसा कर रहा है। जेलेंस्की ने यह भी माना है कि भारत के पास वह नैतिक ताकत और वैश्विक प्रभाव है जिसके बल पर वह रूस और यूक्रेन दोनों को बातचीत की मेज पर आमने-सामने बैठा सकता है। भारत की यह तटस्थ और शांतिवादी छवि दुनिया के उन तमाम देशों के लिए एक मिसाल बन चुकी है जो युद्ध की आग में सुलग रहे हैं। कूटनीतिक जानकारों का यह कहना है कि भारत की इस पहल से न केवल लाखों बेकसूर लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी उस तबाही से उबारा जा सकेगा जो इस लंबे युद्ध के कारण लगातार झेलनी पड़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत का बढ़ता कद और 'विश्वगुरु' की ओर एक और मजबूत कदम
आज के इस बहुध्रुवीय (Multipolar) विश्व में भारत की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत और निर्णायक हो चुकी है, जहां भारत ग्लोबल साउथ (Global South) की आवाज बनकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेतृत्व कर रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे पेचीदा और संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दे पर भारत का मध्यस्थ की भूमिका निभाना यह साबित करता है कि भारत के बिना अब दुनिया का कोई भी बड़ा फैसला लेना असंभव सा हो गया है। उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों के नागरिक भी इस बात से गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि उनका देश युद्ध भड़काने के बजाय दुनिया भर में शांति और भाईचारे का पैगाम दे रहा है।
शांति की इस उम्मीद से दुनिया को मिलने वाला है एक नया और सुरक्षित भविष्य
संक्षेप में कहें तो भारत का यह शांति फॉर्मूला रूस-यूक्रेन युद्ध के काले बादलों के बीच एक उम्मीद की चमकीली किरण बनकर उभरा है, जिसे यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की की तारीफ ने और अधिक वजन दे दिया है। यदि यह कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं, तो यह आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा शांति समझौता साबित होगा।