LNG होता क्या है, जिसने पाकिस्तान की सांसें रोक दी? दुनिया में सबसे बड़ा सप्लायर कौन है?

LNG होता क्या है, जिसने पाकिस्तान की सांसें रोक दी? दुनिया में सबसे बड़ा सप्लायर कौन है?

आज के आधुनिक और ऊर्जा से चलने वाले इस दौर में आपने अक्सर अखबारों, टीवी डिबेट्स या बिजनेस न्यूज चैनलों पर 'एलएनजी' यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (Liquefied Natural Gas) का नाम जरूर सुना होगा। लेकिन क्या आप वाकई जानते हैं कि यह अदृश्य सी ऊर्जा आज दुनिया के तमाम देशों की राजनीति, अर्थव्यवस्था और कूटनीति की सबसे बड़ी धुरी क्यों बन चुकी है? हाल ही में पड़ोसी देश पाकिस्तान से आई आर्थिक बदहाली और ऊर्जा संकट की खबरों के बीच एलएनजी ने एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में अपनी खास जगह बना ली है। हालात यह हैं कि प्राकृतिक गैस के इस तरल रूप ने पाकिस्तान जैसे कंगाल हो चुके देश की सांसें तक रोक दी हैं, जहां लोग बिजली और गैस की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में दुनिया की महाशक्तियों के बीच यदि कोई सबसे बड़ा युद्ध या कूटनीतिक संघर्ष होगा, तो वह तेल या कोयले के लिए नहीं, बल्कि इसी साफ-सुथरी और उच्च क्षमता वाली एलएनजी के लिए होगा। आइए बेहद आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह एलएनजी क्या होती है, यह कैसे काम करती है, और वैश्विक बाजार में इसका असली किंग कौन सा देश है।

जानिए क्या होती है एलएनजी (LNG) और इसे जमीन से निकालकर तरल रूप में क्यों बदला जाता है

सरल शब्दों में कहें तो एलएनजी (Liquefied Natural Gas) प्राकृतिक गैस का ही एक अत्यधिक शुद्ध और तरल यानी लिक्विड रूप है, जिसे बेहद खास और वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए तैयार किया जाता है। प्राकृतिक गैस जमीन के भीतर या समुद्र के नीचे क्रूड ऑयल के भंडारों के पास ही पाई जाती है, जो मुख्य रूप से मीथेन गैस से बनी होती है। सामान्य तापमान और दबाव पर यह गैस की अवस्था में होती है, जिसे एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पाइपलाइनों के जरिए भेजना बेहद खर्चीला और कई बार असंभव सा हो जाता है। यहीं पर साइंस और इंजीनियरिंग का असली कमाल सामने आता है। गैस को परिवहन योग्य बनाने के लिए कारखानों में इसे बेहद कम तापमान यानी लगभग माइनस 160 डिग्री सेल्सियस (-160°C) तक बहुत ज्यादा ठंडा किया जाता है। इस अति-शीतलन प्रक्रिया (Supercooling) के बाद गैस तरल अवस्था में बदल जाती है और उसका आयतन यानी वॉल्यूम लगभग 600 गुना तक कम हो जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि जो गैस विशालकाय गैसीय रूप में बहुत अधिक जगह घेरती थी, वह अब तरल रूप में बहुत कम जगह में सिमट जाती है, जिससे इसे विशेष प्रकार के क्रायोजेनिक जहाजों में भरकर दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सके।

पाकिस्तान की डूबती नैया और ऊर्जा संकट के पीछे क्यों विलेन बनी हुई है एलएनजी की मारामारी

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक बर्बादी और वहां की लड़खड़ाती हुई अवाम की बदहाली की सबसे बड़ी वजह यही एलएनजी है। पाकिस्तान की सरकार के पास इतने विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व नहीं बचे हैं कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार से भारी-भरकम कीमतों पर एलएनजी के जहाजों को खरीद सके। पाकिस्तान ने अपनी बिजली और उद्योगों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए पिछले कुछ दशकों में एलएनजी पर अपनी निर्भरता बहुत ज्यादा बढ़ा ली थी। लेकिन जैसे ही दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव बढ़े और ग्लोबल मार्केट में एलएनजी की कीमतें आसमान छूने लगीं, पाकिस्तान के होश उड़ गए। लंबी अवधि के अनुबंध (Long-term Contracts) टूटने और समय पर गैस की सप्लाई न मिलने के कारण पाकिस्तान के कई बड़े पावर प्लांट बंद होने की कगार पर पहुंच गए, जिससे देश भर में बिजली का भीषण संकट खड़ा हो गया। उद्योगों में उत्पादन ठप हो गया और सर्दियों के दिनों में आम नागरिकों के घरों के चूल्हे तक ठंडे पड़ गए। पाकिस्तान के हुक्मरानों के लिए एलएनजी अब एक ऐसा नासूर बन चुकी है जिसे न तो वे खरीद पा रहे हैं और न ही उसके बिना एक दिन भी देश चला पा रहे हैं।

ग्लोबल मार्केट का असली बेताज बादशाह कौन है? जानिए दुनिया में एलएनजी के सबसे बड़े सप्लायर देश

जब वैश्विक स्तर पर एलएनजी के उत्पादन और निर्यात की बात आती है, तो कतर (Qatar) का नाम सबसे पहले और सबसे मजबूती के साथ पूरी दुनिया के सामने आता है। मध्य पूर्व का यह छोटा सा देश दुनिया में एलएनजी का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली सप्लायर माना जाता है, जिसकी मुट्ठी में वैश्विक ऊर्जा बाजार की चाबी है। कतर के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस का भंडार यानी 'नॉर्थ फील्ड' मौजूद है, जहां से बेहिसाब मात्रा में गैस निकाली जाती है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) भी वैश्विक एलएनजी बाजार के बहुत बड़े खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। हाल के वर्षों में अमेरिका ने शैल गैस (Shale Gas) क्रांति के दम पर एलएनजी के निर्यात में भारी बढ़ोतरी की है और यूरोपीय देशों को रूसी गैस की निर्भरता से मुक्त कराने में अमेरिका ने मुख्य भूमिका निभाई है। रूस, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देश भी दुनिया भर के विभिन्न बाजारों में एलएनजी की भारी-भरकम सप्लाई करते हैं, लेकिन कतर की उत्पादन क्षमता और उसकी वित्तीय मजबूती का मुकाबला फिलहाल कोई दूसरा देश नहीं कर पा रहा है।

भविष्य की सबसे बड़ी ऊर्जा जरूरत और क्लीन एनर्जी के दौर में एलएनजी का बढ़ता दबदबा

आज के पर्यावरण के प्रति जागरूक युग में कोयले और पेट्रोल जैसे जीवाश्म ईंधनों को दुनिया भर में तेजी से हतोत्साहित किया जा रहा है क्योंकि इनसे निकलने वाला कार्बन धुआं हमारी पृथ्वी को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसे दौर में एलएनजी को पारंपरिक कोयले और कच्चे तेल के मुकाबले बहुत अधिक 'स्वच्छ ईंधन' (Clean Fuel) माना जाता है। इसके जलने से पर्यावरण में हानिकारक गैसों का उत्सर्जन बहुत कम होता है, यही वजह है कि भारत समेत दुनिया के तमाम विकासशील और विकसित देश अपने थर्मल पावर प्लांटों और परिवहन साधनों को धीरे-धीरे गैस आधारित प्रणालियों में बदल रहे हैं। भारत भी अपनी कुल ऊर्जा खपत में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए देश भर में पाइपलाइन नेटवर्क और एलएनजी आयात टर्मिनलों का तेजी से विस्तार कर रहा है। कुल मिलाकर कहें तो, एलएनजी सिर्फ एक साधारण ईंधन नहीं है, बल्कि यह इक्कीसवीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था की वह जीवन रेखा है, जिसके बिना दुनिया की रफ्तार थम सकती है।