डोनाल्ड ट्रंप अब फिर चुनाव क्यों नहीं लड़ सकते? तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की राह में क्या है रोड़ा?
दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका की राजनीति में इन दिनों एक बहुत बड़ा सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के पूरा होने के बाद तीसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ सकते हैं। अपने आक्रामक अंदाज और फैसलों के लिए पूरी दुनिया में पहचाने जाने वाले डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों के मन में अक्सर यह जिज्ञासा रहती है कि क्या वे भविष्य में फिर से व्हाइट हाउस की कमान संभाल सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी राजनीतिक इतिहास और वहां के संविधान के कड़े नियमों पर अगर नजर डाली जाए, तो इसका जवाब सीधे तौर पर 'ना' नजर आता है। अमेरिका के संविधान में राष्ट्रपति पद के लिए कुछ ऐसे अचूक और सख्त प्रावधान किए गए हैं, जिन्हें चाहकर भी आसानी से बदला नहीं जा सकता है। यही वजह है कि कानूनी और संवैधानिक जानकारों का यह साफ तौर पर मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के सामने तीसरी बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने की राह में बहुत बड़े और अटूट कानूनी रोड़े अटके हुए हैं। आइए बेहद आसान और स्पष्ट भाषा में समझते हैं कि अमेरिकी संविधान के वे कौन से नियम हैं जो किसी भी राष्ट्रपति को तीसरी बार चुनाव लड़ने से रोकते हैं।
अमेरिकी संविधान का 22वां संशोधन: राष्ट्रपति पद के लिए दो कार्यकाल की है सख्त पाबंदी
डोनाल्ड ट्रंप या अमेरिका के किसी भी अन्य पूर्व राष्ट्रपति के तीसरी बार चुनाव लड़ने के रास्ते का सबसे बड़ा और मुख्य कानूनी रोड़ा अमेरिकी संविधान का 22वां संशोधन (22nd Amendment) है। साल 1951 में पारित किए गए इस ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन के तहत यह नियम बनाया गया था कि देश का कोई भी नागरिक जीवन में अधिकतम दो बार ही राष्ट्रपति के पद पर चुना जा सकता है। इस नियम के आने से पहले अमेरिका में जॉर्ज वाशिंगटन के समय से ही दो कार्यकाल की एक पारंपरिक प्रथा चली आ रही थी, लेकिन राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने लगातार चार बार चुनाव जीतकर इस परंपरा को तोड़ दिया था। रूजवेल्ट के निधन के बाद अमेरिकी संसद ने यह महसूस किया कि देश में तानाशाही या सत्ता के केंद्रीकरण को रोकने के लिए कानूनी रूप से कार्यकाल की सीमा तय करना बेहद जरूरी है। इसके बाद ही 22वें संशोधन को लागू किया गया, जिसके शब्दों में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि किसी भी व्यक्ति को दो बार से अधिक राष्ट्रपति कार्यालय के लिए नहीं चुना जाएगा। चूंकि डोनाल्ड ट्रंप अपने अलग-अलग समय पर दो कार्यकाल सफलतापवूर्क पूरे कर चुके हैं, इसलिए इस संवैधानिक धारा के तहत वे कानूनी रूप से तीसरी बार चुनाव मैदान में उतरने के अयोग्य घोषित हो चुके हैं।
क्या संविधान में बदलाव करके तीसरी बार राष्ट्रपति बन सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप?
कई बार राजनीतिक मंचों पर या समर्थकों के बीच यह चर्चा उठती है कि क्या अमेरिकी संसद या संविधान में संशोधन करके इस नियम को बदला जा सकता है ताकि ट्रंप को छूट मिल सके। इस सवाल का जवाब देते हुए संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि थ्योरी के तौर पर संविधान में संशोधन का रास्ता खुला जरूर होता है, लेकिन प्रैक्टिकल रूप से यह नामुमकिन के बराबर है। अमेरिकी संविधान में किसी भी नए संशोधन को पास कराने के लिए देश की संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों (प्रतिनिधि सभा और सीनेट) में दो-तिहाई बहुमत की भारी समर्थन की जरूरत होती है। इसके बाद अमेरिका के 50 में से कम से कम 38 राज्यों की विधानसभाओं द्वारा इसकी पुष्टि (Ratification) करनी अनिवार्य होती है। मौजूदा राजनीतिक हालात और अमेरिकी समाज की तीव्र राजनीतिक ध्रुवीकरण को देखते हुए यह असंभव सा लगता है कि डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन पार्टी इतनी बड़ी सहमति बना सकें। यही कारण है कि कानूनी मोर्चे पर संविधान बदलना ट्रंप के लिए एक बहुत बड़ी और नामुमकिन चुनौती बना हुआ है।
क्या उपराष्ट्रपति पद के जरिए पिछले दरवाजे से व्हाइट हाउस में वापसी कर सकते हैं ट्रंप?
संवैधानिक पाबंदियों के बीच राजनीतिक गलियारों में अक्सर यह कयास भी लगाए जाते रहे हैं कि क्या डोनाल्ड ट्रंप उपराष्ट्रपति पद का चुनाव लड़कर या किसी अन्य रास्ते से दोबारा शीर्ष पद तक पहुंच सकते हैं। लेकिन अमेरिकी संविधान का 12वां संशोधन (12th Amendment) इस रास्ते को भी पूरी तरह से बंद कर देता है। 12वें संशोधन के अनुसार, जो व्यक्ति राष्ट्रपति बनने के लिए संवैधानिक रूप से योग्य नहीं है, वह देश का उपराष्ट्रपति भी नहीं बन सकता है। चूंकि डोनाल्ड ट्रंप 22वें संशोधन के कारण राष्ट्रपति पद के चुनाव लड़ने की पात्रता खो चुके हैं, इसलिए वे उपराष्ट्रपति पद के लिए भी कानूनी रूप से अयोग्य करार दिए जाते हैं। खुद डोनाल्ड ट्रंप ने भी कई साक्षात्कारों में यह स्वीकार किया है कि कानून बहुत स्पष्ट है और अमेरिकी संविधान उन्हें दोबारा चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं देता है।
अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था की खूबसूरती और नियमों की अटलता का प्रतीक है यह प्रावधान
डोनाल्ड ट्रंप जैसे कद्दावर और प्रभावशाली नेता के सामने खड़े ये संवैधानिक अवरोध इस बात का सबसे बड़ा सबूत हैं कि अमेरिका की लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति देश के संविधान और कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता है। भले ही उनके चाहने वाले करोड़ों समर्थक उन्हें लंबे समय तक सत्ता में देखना चाहते हों, लेकिन अमेरिकी संस्थापकों द्वारा बनाई गई व्यवस्था ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि सत्ता का हस्तांतरण तय नियमों के तहत ही हो। इन तमाम कानूनी सीमाओं के कारण यह बिल्कुल साफ है कि डोनाल्ड ट्रंप के लिए तीसरी बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने की राह में संविधान की दीवार सबसे बड़ा और ناقابل भेद रोड़ा बनी हुई है, जिस पर देश की सर्वोच्च अदालत का रुख भी पूरी तरह से सख्त रहने वाला है।