हीट-रे से दुश्मनों की चमड़ी खाक करेंगे ट्रंप? अमेरिका का ब्रह्मास्त्र ये कौन सा हथियार, कितना खतरनाक
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रक्षा जगत में इन दिनों अमेरिका की एक बेहद गुप्त और अत्याधुनिक सैन्य तकनीक ने तहलका मचा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड द्वारा हाल ही में एक रहस्यमयी और खतरनाक हथियार का जिक्र किए जाने के बाद से पूरी दुनिया की खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। अमेरिकी सेना के पास मौजूद इस हाई-टेक ब्रह्मास्त्र को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, जिसे अनौपचारिक रूप से 'डिस्कोंबबुलेटर' (The Discombobulator) या एडवांस्ड पल्स/थर्मल एनर्जी वेपन कहा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कोई आम पारंपरिक हथियार नहीं है, बल्कि एक ऐसा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और डायरेक्टेड एनर्जी सिस्टम है जो पलक झपकते ही दुश्मनों के हथियारों, रडार सिस्टम और कम्युनिकेशंस को पूरी तरह से ठप कर सकता है। इस अत्याधुनिक तकनीक के सामने आते ही वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों के बीच यह बहस छिड़ गई है कि क्या आने वाले समय में युद्ध लड़ने के तौर-तरीके पूरी तरह से बदलने वाले हैं और अमेरिका का यह नया ब्रह्मास्त्र ग्लोबल पावर पॉलिटिक्स में क्या भूचाल लाने वाला है।
क्या है 'डिस्कोंबबुलेटर' तकनीक और कैसे काम करता है अमेरिका का यह सीक्रेट एनर्जी हथियार
आम जनमानस से लेकर बड़े-बड़े रक्षा विश्लेषकों तक के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर यह रहस्यमयी 'डिस्कोंबबुलेटर' हथियार किस तरह काम करता है। अमेरिकी प्रशासनिक और सैन्य हलकों से छनकर सामने आई जानकारियों के अनुसार, यह एक प्रकार का पल्स एनर्जी या डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (Directed Energy Weapon) है, जो तीव्र ऊर्जा तरंगों को उत्सर्जित करता है। पारंपरिक बंदूकों या मिसाइलों की तरह यह भौतिक गोलियों से हमला नहीं करता, बल्कि यह अदृश्य ऊर्जा किरणों के जरिए दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक तंत्र को निशाना बनाता है। जब इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, तो इसके प्रभाव क्षेत्र में आते ही दुश्मन के आधुनिक रडार, मिसाइल लॉन्चपैड, संचार उपकरण और डिजिटल कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह से काम करना बंद कर देते हैं। ऐसा कहा जाता है कि युद्धक्षेत्र में इसके इस्तेमाल से विरोधी सेना के सैनिक चाहकर भी अपने हथियारों के बटन नहीं दबा पाते हैं और उनके सारे आधुनिक उपकरण एक झटके में कबाड़ में बदल जाते हैं।
विदेशी हथियारों और मिसाइलों को पलभर में पंगु बनाने की अचूक क्षमता
इस गुप्त हथियार की सबसे बड़ी खासियत यह बताई जा रही है कि यह दुनिया के किसी भी उन्नत किस्म के मिसाइल डिफेंस या राडार नेटवर्क को चकमा देने और उसे निष्क्रिय करने में सक्षम है। हाल ही में लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला के घटनाक्रम और अन्य सैन्य अभियानों के संदर्भ में जब अमेरिकी राष्ट्रपति से इस तकनीक के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसके व्यापक प्रभाव की ओर इशारा किया था। जानकारों का कहना है कि रूस और चीन जैसे देशों द्वारा निर्मित अत्याधुनिक रॉकेट और डिफेंस सिस्टम भी इस तरह की पल्स एनर्जी तरंगों के आगे बेअसर साबित हो सकते हैं। जब विरोधी पक्ष युद्ध के मैदान में अपने सबसे खतरनाक हथियारों से लैस होकर उतरता है और अचानक इस तरंग का सामना करता है, तो उसके सारे कंप्यूटरीकृत सिस्टम ब्लैकआउट हो जाते हैं। यह तकनीक मनोवैज्ञानिक रूप से भी दुश्मनों के दिलों में खौफ पैदा करने के लिए काफी है क्योंकि इसमें बिना खून-खराबे के ही दुश्मन को पूरी तरह लाचार बनाया जा सकता है।
ग्लोबल डिफेंस मार्केट में खलबली और आधुनिक युद्धनीति का बदलता हुआ स्वरूप
अमेरिका द्वारा इस तरह के गुप्त और विनाशकारी हथियारों के विकास और उनके संकेतों ने रूस, चीन और यूरोपीय देशों की नींद उड़ा दी है। आज के आधुनिक युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और हाइपरसोनिक मिसाइलों के बाद डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स (DEW) और थर्मल हथियारों की दौड़ शुरू हो गई है। हर देश ऐसी तकनीक हासिल करना चाहता है जो दुश्मन के हमले से पहले ही उसके पूरे कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क को ध्वस्त कर सके। अमेरिका का यह कदम इस बात का स्पष्ट संदेश देता है कि भविष्य के युद्ध केवल सैनिकों और टैंकों के दम पर नहीं लड़े जाएंगे, बल्कि यह पूरी तरह से टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स और गुप्त ऊर्जा हथियारों की जंग होगी। इस तरह की तकनीकों के सार्वजनिक होने से वैश्विक स्तर पर हथियारों की एक नई और खतरनाक दौड़ शुरू होने की पूरी आशंका जताई जा रही है।
इंसानी सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संधियों के बीच खड़े होते गंभीर सवाल
जहां एक तरफ इस प्रकार के हाई-टेक हथियारों को अमेरिका की सामरिक और सैन्य ताकत का प्रतीक माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों ने इस पर गहरी चिंता जताई है। इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या इस तरह के शक्तिशाली ऊर्जा और थर्मल हथियारों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय संधियों के दायरे में आता है या नहीं। आलोचकों का मानना है कि यदि इस तरह की बेकाबू तकनीक का प्रसार दुनिया भर में हुआ, तो यह मानवता और वैश्विक शांति के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकती है। बहरहाल, अमेरिकी खेमे में चर्चा का विषय बना यह रहस्यमयी 'डिस्कोंबबुलेटर' हथियार आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति, रक्षा बजट और महाशक्तियों के बीच शक्ति संतुलन की पूरी परिभाषा बदलकर रख देगा, जिस पर पूरी दुनिया की पैनी नजर बनी हुई है।