World Capitals Shifted: दुनिया के वे देश जिन्होंने एकाएक बदल डाली अपनी राजधानी, अब इंडोनेशिया और जापान भी चले उसी राह; जानिए क्या है इसके पीछे की असली वजह
दुनिया के कई देशों में समय-समय पर अपनी राजधानियों को बदलने (Capital Relocation) का चलन रहा है। हाल ही में इंडोनेशिया द्वारा अपनी राजधानी जकार्ता से बदलकर नुसंतारा ले जाने और जापान में भी राजधानी टोक्यो के विकेंद्रीकरण या प्रशासनिक बदलाव पर चल रही चर्चाओं ने एक बार फिर इस वैश्विक मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है। आखिर क्यों दुनिया के बड़े-बड़े देशों को अपनी पुरानी और स्थापित राजधानियों को छोड़कर नए शहरों को चुनना पड़ रहा है? इसके पीछे जनसंख्या का दबाव, पर्यावरण संकट और सुरक्षा जैसे कई बड़े कारण छिपे हैं।
राजधानियों को बदलने का इतिहास और प्रमुख देश
ऐतिहासिक रूप से कई देशों ने भौगोलिक असंतुलन या राजनीतिक कारणों से अपनी राजधानियां बदली हैं। उदाहरण के लिए, ब्राजील ने साल 1960 में रियो डी जेनेरियो से हटाकर ब्रासीलिया को अपनी नई राजधानी बनाया था ताकि देश के अंदरूनी हिस्सों का विकास हो सके। इसी तरह कजाखस्तान ने साल 1997 में अपनी राजधानी अलमाटी से बदलकर अस्ताना (जिसे बाद में नूर-सुल्तान भी कहा गया) कर दी थी। नाइजीरिया ने लागोस से राजधानी हटाकर अबुजा बसाई, और पाकिस्तान ने भी कराची से अपनी राजधानी इस्लामाबाद शिफ्ट की थी।
इंडोनेशिया और नुसंतारा: समुद्र में डूबता जकार्ता और नया शहर
वर्तमान में राजधानियों को बदलने का सबसे बड़ा और ताजा उदाहरण इंडोनेशिया है। इंडोनेशिया की पुरानी राजधानी जकार्ता दुनिया के सबसे तेजी से डूबने वाले शहरों में शुमार हो चुकी है। भारी ट्रैफिक जाम, भूजल के अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन के चलते जकार्ता का एक बड़ा हिस्सा लगातार समुद्र में समाता जा रहा है। इन गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए इंडोनेशिया सरकार ने बोर्नियो द्वीप के जंगलों में 'नुसंतारा' (Nusantara) नाम से एक पूरी तरह नया, आधुनिक और ग्रीन सिटी बसाकर उसे देश की नई राजधानी घोषित किया है।
जापान में क्यों उठ रही है राजधानी बदलने या विकेंद्रीकरण की मांग?
अपनी उन्नत तकनीक और प्लानिंग के लिए मशहूर जापान में भी अब राजधानी टोक्यो के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। जापान के सामने सबसे बड़ा खतरा प्राकृतिक आपदाओं, विशेषकर विनाशकारी भूकंप और सुनामी का है। टोक्यो अत्यधिक घनी आबादी वाला क्षेत्र है और एक बड़े भूकंप की स्थिति में देश की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था ठप हो सकती है। हालांकि जापान पूरी तरह टोक्यो को नहीं छोड़ रहा है, लेकिन सरकार और विशेषज्ञ प्रशासनिक कार्यों को दूसरे शहरों में शिफ्ट करने और टोक्यो पर बढ़ते दबाव को कम करने (विकेंद्रीकरण) की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।
राजधानी बदलने के पीछे मुख्य वजहें
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जनसंख्या का भारी दबाव और ट्रैफिक: पुरानी राजधानियों में अनियोजित शहरीकरण के कारण जनसंख्या बेतहाशा बढ़ जाती है, जिससे ट्रैफिक और प्रदूषण विकराल रूप ले लेते हैं।
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पर्यावरणीय और जलवायु संकट: समुद्र के जलस्तर का बढ़ना, बाढ़ और भूजल स्तर में भारी गिरावट जैसे खतरे कई तटीय राजधानियों के लिए जी का जंजाल बन चुके हैं।
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प्राकृतिक आपदाओं का खतरा: भूकंप, चक्रवात या सुनामी के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों से सत्ता के केंद्रों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना सरकारों की मजबूरी बन जाता है।
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क्षेत्रीय संतुलन और विकास: देश के हर हिस्से में आर्थिक और सामाजिक विकास को समान रूप से बढ़ावा देने के लिए भी कई देश भौगोलिक रूप से मध्य में स्थित शहरों को राजधानी बनाते हैं।