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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : विश्वप्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र की पावन धरती अब एक नए आध्यात्मिक कीर्तिमान की साक्षी बनने जा रही है। सोनपुर स्थित लोक सेवा आश्रम में 108 फीट ऊंचे दक्षिणेश्वर संकटमोचन हनुमान मंदिर का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। ओडिशा की सुप्रसिद्ध 'कलिंग शैली' में बन रहा यह मंदिर न केवल बिहार बल्कि पड़ोसी राज्य झारखंड के लिए भी वास्तुकला का एक बेजोड़ नमूना साबित होगा। 31 मार्च 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर का ढांचा 75 फीट की ऊंचाई तक पहुंच चुका है।

11 फीट की अष्टधातु प्रतिमा: बिहार-झारखंड में होगी अद्वितीय

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता भगवान हनुमान की 11 फीट ऊंची अष्टधातु की भव्य प्रतिमा है। लगभग 2.5 टन वजन वाली इस प्रतिमा को बनाने में करीब 36 लाख रुपये की लागत आई है। 11वें रुद्रावतार के रूप में निर्मित यह प्रतिमा जुलाई 2025 में ही आश्रम परिसर में लाई जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी विशाल अष्टधातु की प्रतिमा इस पूरे क्षेत्र में दुर्लभ है, जो श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण होगी।

कलिंग शैली और भव्य गुंबद: भुवनेश्वर के वास्तुकारों का कमाल

मंदिर का डिजाइन भुवनेश्वर के कुशल वास्तुकारों द्वारा तैयार किया गया है, जो इसे पुरी के जगन्नाथ मंदिर जैसी पारंपरिक 'कलिंग शैली' का लुक दे रहे हैं। आश्रम के महंत संत विष्णु दास उदासीन 'मौनी बाबा' के अनुसार, मंदिर का निर्माण समाजसेवी अनिल सिंह गौतम द्वारा कराया जा रहा है। गुंबद सहित इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 4 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। मंदिर की ऊंचाई इतनी होगी कि यह दूर से ही भक्तों को अपनी दिव्यता का अहसास कराएगी।

2027 में होगी प्राण-प्रतिष्ठा: राम दरबार भी होगा स्थापित

मंदिर परिसर केवल हनुमान जी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहाँ एक भव्य राम दरबार और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी। निर्माण कार्य के इतिहास पर नजर डालें तो इसका शुभारंभ 15 नवंबर 2024 (कार्तिक पूर्णिमा) को हुआ था और 30 अप्रैल 2025 (अक्षय तृतीया) से काम निरंतर जारी है। मंदिर प्रबंधन का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक निर्माण पूर्ण कर भव्य समारोह के साथ प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की जाए।

अटूट श्रद्धा का प्रतीक

निर्माण करा रहे अनिल सिंह गौतम का कहना है कि यह धाम केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि भक्तों की अटूट श्रद्धा का केंद्र है। लोक सेवा आश्रम परिसर में पहले से ही सूर्य और शनि मंदिर स्थापित हैं, और अब बजरंग बली का यह 108 फीट ऊंचा धाम इस क्षेत्र को एक पूर्ण धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करेगा।