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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब के ऐतिहासिक रोपड़ हेडवर्क्स की एक पुरानी और खाली पड़ी इमारत जल्द ही ज्ञान और पर्यटन का नया केंद्र बनने जा रही है। सिंचाई विभाग ने इस वीरान पड़ी बिल्डिंग का कायाकल्प करने का निर्णय लिया है, जहाँ राज्य का पहला भव्य 'इरिगेशन म्यूजियम' (सिंचाई संग्रहालय) स्थापित किया जाएगा। इस संग्रहालय के माध्यम से न केवल पंजाब की सिंचाई प्रणाली के गौरवशाली इतिहास को सहेजा जाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को जल प्रबंधन और इंजीनियरिंग के अद्भुत तालमेल से भी रूबरू कराया जाएगा।

नहरों और बांधों के जीवंत मॉडल होंगे आकर्षण का केंद्र

इस प्रस्तावित इरिगेशन म्यूजियम की सबसे बड़ी खासियत यहाँ प्रदर्शित किए जाने वाले विभिन्न नहरों और बांधों के विस्तृत मॉडल होंगे। पर्यटकों और छात्रों को यह समझाने के लिए कि कैसे नदियों के पानी को नियंत्रित कर खेतों तक पहुँचाया जाता है, यहाँ वर्किंग और प्रोटोटाइप मॉडल रखे जाएंगे। भाखड़ा नांगल बांध से लेकर रोपड़ हेडवर्क्स की जटिल कार्यप्रणाली को इन मॉडलों के जरिए बड़ी आसानी से समझा जा सकेगा। यह पहल तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं के लिए एक बड़े शिक्षण केंद्र के रूप में भी उभरेगी।

ऐतिहासिक दस्तावेजों और समझौतों की दिखेगी झलक

म्यूजियम केवल मॉडलों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें सिंचाई विभाग के उन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेजों और एग्रीमेंट की प्रतियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा, जो दशकों पुराने हैं। आजादी से पहले और बाद के समय में हुए जल समझौतों, नहरों के निर्माण के ब्लूप्रिंट और तत्कालीन इंजीनियरिंग के दुर्लभ रिकॉर्ड्स को यहाँ गैलरी में सजाया जाएगा। इन दस्तावेजों के माध्यम से शोधकर्ताओं और इतिहास के जानकारों को पंजाब के जल बंटवारे और सिंचाई विकास के सफर को गहराई से समझने का मौका मिलेगा।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, खंडहर से म्यूजियम तक का सफर

सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हेडवर्क्स पर स्थित इस पुरानी बिल्डिंग का चयन इसलिए किया गया है ताकि इसकी ऐतिहासिक महत्ता को बरकरार रखते हुए इसका सदुपयोग किया जा सके। म्यूजियम बनने से रोपड़ हेडवर्क्स पर पर्यटकों की संख्या में भी भारी इजाफा होने की उम्मीद है। बिल्डिंग के नवीनीकरण का काम जल्द शुरू किया जाएगा, जिसमें रोशनी और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर इसे आकर्षक बनाया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि यह प्रोजेक्ट पंजाब के जल संसाधनों के संरक्षण और जागरूकता की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।