Prabhat Vaibhav, Digital Desk : इंडोनेशिया के योग्याकार्ता शहर से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ के 'लिटिल अरेशा डेकेयर' (Little Aresha Daycare) सेंटर में मासूम बच्चों के साथ हो रही दरिंदगी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है। पुलिसिया छापे में जो मंजर सामने आया, उसने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। डेकेयर के भीतर 53 नन्हे बच्चे नग्न अवस्था में और रस्सियों से बंधे हुए पाए गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रशासक सहित 13 लोगों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
वायरल वीडियो ने खोला पाप का घड़ा
इस भयावह घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब इंटरनेट पर डेकेयर सेंटर के भीतर का एक गुप्त वीडियो लीक हो गया। वीडियो में देखा जा सकता था कि कैसे बेबस और मासूम बच्चों को जानवरों की तरह बांधकर रखा गया था। वीडियो वायरल होते ही इंडोनेशिया की जनता में भारी आक्रोश फैल गया, जिसके बाद योग्याकार्ता पुलिस ने बिना समय गंवाए 'जालान पाकेल' इलाके में स्थित इस सेंटर पर धावा बोल दिया। पुलिस ने सबूतों की सुरक्षा के लिए फिलहाल इस डेकेयर सेंटर को स्थायी रूप से सील कर दिया है।
मासूमों के साथ 'टॉर्चर रूम' बना डेकेयर सेंटर
योग्याकार्ता मेट्रो पुलिस प्रमुख ईवा गुना पंड्या के अनुसार, गिरफ्तार किए गए 13 आरोपियों में फाउंडेशन का प्रमुख, डेकेयर मैनेजर और 11 कर्मचारी शामिल हैं। जांच में सामने आया कि इस केंद्र में 103 बच्चे रजिस्टर्ड थे, जिनमें से 53 बच्चों के साथ भीषण क्रूरता की जा रही थी। इनमें से अधिकतर बच्चों की उम्र महज 2 वर्ष के आसपास है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बच्चों को सुलाने के नाम पर उनके हाथ-पैर बांध दिए जाते थे और उन्हें नग्न रखा जाता था। पुलिस अब इन बच्चों की मेडिकल और मनोवैज्ञानिक जांच करवा रही है ताकि उनके स्वास्थ्य पर पड़े असर का आकलन किया जा सके।
पुलिस का सख्त रुख: "सुरक्षा हमारी प्राथमिकता"
योग्याकार्ता पुलिस के प्रवक्ता मुख्य आयुक्त इहसान ने प्रेस वार्ता में बताया, "हम इस घटना से बेहद व्यथित हैं। हमने सेंटर से जुड़े 30 लोगों से लंबी पूछताछ की है और 13 मुख्य संदिग्धों को हिरासत में लिया है। बच्चों की सुरक्षा और उन्हें न्याय दिलाना हमारी पहली प्राथमिकता है।" पुलिस अब उन माता-पिता के बयान दर्ज कर रही है जिनके बच्चे इस नर्क समान डेकेयर में रह रहे थे। अंदेशा है कि जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, इस कांड में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
बाल संरक्षण कानूनों पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने इंडोनेशिया की बाल संरक्षण प्रणाली और निजी डेकेयर सेंटरों के लाइसेंसिंग पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। देशभर में मांग उठ रही है कि डेकेयर चलाने वालों की बैकग्राउंड जांच अनिवार्य हो और केंद्रों की निगरानी के लिए सख्त सीसीटीवी प्रोटोकॉल लागू किए जाएं। अभिभावकों का कहना है कि भरोसे के नाम पर बच्चों को 'टॉर्चर' करने वाले इन आरोपियों को मौत की सजा दी जानी चाहिए।




