img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : कांग्रेस लंबे समय से ईवीएम की निष्पक्षता पर सवाल उठाती रही है। संसद से लेकर सार्वजनिक मंचों तक इस मुद्दे पर कई बार तीखी बहस देखने को मिली है। हाल ही में संसद के भीतर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार को बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती तक दे दी थी।

लेकिन इसी बीच पंजाब में हुए जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों ने इस बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। कांग्रेस के ही पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बैलेट पेपर को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। 14 दिसंबर को हुए मतदान से पहले उन्होंने आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने चुनाव में गड़बड़ी करने के इरादे से नकली बैलेट पेपर छपवाए हैं।

चन्नी के आरोपों के बाद चुनावी माहौल और गर्म हो गया। वहीं शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने भी फतेहगढ़ साहिब में एक और मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अमरिंदर सिंह मदोफल ने मतदान से करीब दस घंटे पहले ही मतपत्र जारी कर दिए थे।

पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल

यह पहला मौका नहीं है जब बैलेट पेपर को लेकर सवाल खड़े हुए हों। इससे पहले पंचायत चुनावों के दौरान भी फर्जी बैलेट पेपर छपवाने के आरोप लगे थे। हालांकि, चुनाव संपन्न होने के बाद किसी भी मामले में फर्जी बैलेट पेपर मिलने की पुष्टि नहीं हो सकी थी।

इस बार जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों में बैलेट पेपर को लेकर उठे आरोपों ने कांग्रेस की उस मांग को भी कमजोर कर दिया है, जिसमें वह राष्ट्रीय स्तर पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की बात करती रही है।

क्यों बैलेट पेपर से होते हैं ये चुनाव

गौरतलब है कि पंचायत समिति, जिला परिषद और ब्लॉक समिति जैसे स्थानीय निकाय चुनाव ईवीएम से नहीं, बल्कि बैलेट पेपर से ही कराए जाते हैं। इसकी वजह यह है कि इन चुनावों के लिए चुनाव आयोग राज्य चुनाव आयोग को ईवीएम उपलब्ध नहीं कराता।

इस तथ्य की पुष्टि राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी भी कर चुके हैं। इन चुनावों में मतगणना की प्रक्रिया भी काफी लंबी रही। सुबह आठ बजे शुरू हुई गिनती कई जगहों पर रात 12 बजे के बाद तक चलती रही। करीब 17 से 18 घंटे तक चली मतगणना के दौरान कई स्थानों पर गिनती में गड़बड़ी के आरोप भी सामने आए।

कुल मिलाकर, पंजाब के इन चुनावों ने ईवीएम बनाम बैलेट पेपर की बहस को फिर से तेज कर दिया है और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।