Prabhat Vaibhav,Digital Desk : घर का पूजा स्थल वह पवित्र स्थान है जहां से पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हम अक्सर अनजाने में मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के चक्कर में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो वास्तु दोष का कारण बन जाती हैं। इन्हीं में से एक आम गलती है—पूजा घर में माचिस की डिब्बी रखना। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, यह छोटी सी दिखने वाली वस्तु आपके घर की शांति और आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
पूजा घर में क्यों वर्जित है माचिस?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर आध्यात्मिक शांति और सात्विक ऊर्जा का केंद्र होता है। यहाँ दीपक और अगरबत्ती जलाना शुभ है, लेकिन ज्वलनशील वस्तुएं जैसे माचिस की डिब्बी को खुला रखना अनुचित माना गया है।
विनाश का प्रतीक: माचिस की तीलियां ज्वलनशील होती हैं और इन्हें वास्तु में 'विनाश और अस्थिरता' का प्रतीक माना जाता है।
नकारात्मक ऊर्जा: पवित्र स्थान पर तीखी या ज्वलनशील वस्तुओं की मौजूदगी सकारात्मक ऊर्जा को कम कर देती है, जिससे प्रार्थना और साधना में एकाग्रता नहीं बन पाती।
पारिवारिक रिश्तों और मानसिक शांति पर असर
वास्तु दोष केवल मंदिर तक सीमित नहीं रहता। यदि पूजा कक्ष में माचिस रखी हो, तो इसके प्रभाव घर के सदस्यों के व्यवहार में भी दिखने लगते हैं।
तनाव और अशांति: मंदिर में माचिस रखने से मानसिक अशांति बढ़ सकती है और घर का वातावरण बोझिल हो सकता है।
वैवाहिक जीवन पर प्रभाव: वास्तु के अनुसार, जिस तरह शयनकक्ष (Bedroom) में माचिस रखना वर्जित है क्योंकि इससे पति-पत्नी के बीच झगड़े बढ़ते हैं, ठीक उसी तरह मंदिर में इसकी मौजूदगी वैवाहिक सामंजस्य को बिगाड़ सकती है।
वास्तु दोष से बचने के उपाय: कहाँ रखें माचिस?
अगर आप वास्तु दोष से बचना चाहते हैं और घर में सुख-शांति बनाए रखना चाहते हैं, तो इन सुझावों को अपनाएं:
सही स्थान: माचिस रखने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान रसोईघर (Kitchen) है, क्योंकि रसोई अग्नि का कारक स्थान माना जाता है।
दराज या अलमारी: मंदिर के अंदर माचिस न रखकर उसे पास की किसी बंद दराज या अलमारी में छिपाकर रखें।
कपड़े का प्रयोग: यदि मजबूरीवश माचिस को पूजा कक्ष में ही रखना पड़े, तो उसे एक साफ कपड़े में लपेटकर रखें। ऐसा करने से उसकी नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है।
पवित्रता बनाए रखना है जरूरी
घर का मंदिर वह स्थान है जहाँ हम मानसिक शांति की तलाश करते हैं। वास्तु शास्त्र कहता है कि वहाँ केवल वही वस्तुएं होनी चाहिए जो मन को शांत और प्रसन्न करें। माचिस जैसी वस्तुएं, जो क्रोध और अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं, उन्हें मंदिर की मर्यादा से दूर रखना ही बुद्धिमानी है।




