img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : वैश्विक राजनीति में आए बड़े बदलाव और अमेरिका-ईरान के बीच हुए युद्धविराम के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने देश में गहराते एलपीजी संकट को खत्म करने के लिए कमर कस ली है। घरेलू और औद्योगिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने गैस आपूर्ति का एक बिल्कुल नया और क्रांतिकारी फॉर्मूला तैयार किया है। इस नए नियम के तहत अब राज्यों को मिलने वाले गैस कोटे में बड़े बदलाव किए गए हैं, जिसका सीधा असर स्टील से लेकर फार्मा सेक्टर तक देखने को मिलेगा। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य देशव्यापी किल्लत को दूर करना और औद्योगिक उत्पादन को गति देना है।

राज्यों के लिए 10% अतिरिक्त कोटे का 'रिवॉर्ड' सिस्टम

सरकार ने राज्यों के लिए गैस आवंटन की नई नीति स्पष्ट कर दी है। वर्तमान व्यवस्था के तहत, राज्यों को पैकेटबंद गैर-घरेलू एलपीजी का 70% हिस्सा पहले ही आवंटित किया जा चुका है। हालांकि, जो राज्य पाइपलाइन से प्राकृतिक गैस (पीएनजी) के बुनियादी ढांचे और निर्धारित सुधारों को तेजी से लागू करेंगे, उन्हें 10% अतिरिक्त कोटा इनाम के तौर पर दिया जाएगा। यानी जो राज्य पीपीपी मॉडल पर गैस पाइपलाइन का विस्तार करेंगे, उनके पास एलपीजी की कोई कमी नहीं रहेगी। यह रणनीति न केवल वर्तमान संकट को संभालेगी बल्कि भविष्य के लिए क्लीन एनर्जी के रास्ते भी खोलेगी।

इन 15 बड़े उद्योगों को मिलेगी प्राथमिकता, मार्च 2026 तक की डेडलाइन

औद्योगिक क्षेत्र को संजीवनी देते हुए केंद्र ने थोक एलपीजी आपूर्ति के लिए नई शर्तें लागू कर दी हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य प्रसंस्करण, इस्पात, धातु, कांच, सिरेमिक, पेंट और कृषि जैसे 15 महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर गैस मुहैया कराई जाएगी। इन उद्योगों को मार्च 2026 से पहले उनकी कुल खपत का 70% हिस्सा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। भारी जल, यूरेनियम और बीज प्रसंस्करण जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को भी इस विशेष श्रेणी में रखा गया है ताकि देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी न पड़े।

किसे मिलेगी पहली प्राथमिकता? ओएमसी के पास पंजीकरण अनिवार्य

नए फॉर्मूले के अनुसार, एलपीजी की पहली खेप उन कारखानों को भेजी जाएगी जहां विनिर्माण प्रक्रिया में एलपीजी का कोई दूसरा विकल्प (जैसे प्राकृतिक गैस) मौजूद नहीं है। जिन उद्योगों में प्राकृतिक गैस का उपयोग संभव है, उन्हें अनिवार्य रूप से तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के साथ पंजीकरण कराना होगा और पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा। हालांकि, सरकार ने उन उद्योगों को बड़ी राहत दी है जहाँ एलपीजी उत्पादन प्रक्रिया का एक अभिन्न हिस्सा है; ऐसे कारखानों के लिए पीएनजी आवेदन की अनिवार्य शर्त को हटा दिया गया है।

केंद्र ने राज्यों को थमाया तीन सूत्रीय एजेंडा

गैस संकट से पूरी तरह निपटने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को तीन महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। सबसे पहले, 'प्राकृतिक गैस एवं पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश 2026' को सभी विभागों में तुरंत लागू करने को कहा गया है। दूसरा, सुधारों से जुड़े 10% अतिरिक्त एलपीजी आवंटन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। अंत में, राज्यों को अपनी संपीड़ित बायोगैस (CBG) नीति को तत्काल अधिसूचित करने को कहा गया है ताकि पारंपरिक गैस पर निर्भरता को कम किया जा सके। सरकार के इस चौतरफा हमले से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में गैस की किल्लत पूरी तरह खत्म हो जाएगी।