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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : खालसा साजना दिवस और बैसाखी के पावन अवसर पर पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए 2427 सिख श्रद्धालुओं का जत्था आज, 10 अप्रैल 2026 को अंतरराष्ट्रीय अटारी-वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान के लिए रवाना हो रहा है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने वीरवार को सभी श्रद्धालुओं को वीजा लगे पासपोर्ट वितरित कर दिए हैं।

यात्रा का विवरण और जत्थे की संरचना

एसजीपीसी कार्यालय से यह जत्था सुबह 8:00 बजे अरदास के बाद रवाना हुआ। इस वर्ष देशभर से विभिन्न कमेटियों के माध्यम से श्रद्धालु इस यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं:

SGPC (अमृतसर): 1763 श्रद्धालु (कुल 1795 आवेदन भेजे गए थे, जिनमें से 32 अस्वीकार हुए)।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी: 409 श्रद्धालु।

हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी: 255 श्रद्धालु।

कुल श्रद्धालु: 2427

यात्रा का कार्यक्रम (10 अप्रैल - 19 अप्रैल)

यह धार्मिक यात्रा 10 दिनों की होगी, जिसके दौरान श्रद्धालु पाकिस्तान में स्थित सिख धर्म के सबसे पवित्र स्थलों के दर्शन करेंगे:

गुरुद्वारा पंजा साहिब (हसन अब्दाल): यहाँ मुख्य बैसाखी समागम में हिस्सा लेंगे।

गुरुद्वारा ननकाना साहिब: गुरु नानक देव जी के जन्मस्थान के दर्शन।

गुरुद्वारा सच्चा सौदा: मूरीदके स्थित पवित्र स्थल की यात्रा।

गुरुद्वारा डेरा साहिब (लाहौर): महाराजा रणजीत सिंह की समाधि और गुरुद्वारे के दर्शन।

वापसी: 19 अप्रैल 2026 को जत्था वापस भारत लौटेगा।

SGPC की बड़ी मांगें: फीस और पासपोर्ट की अनिवार्यता खत्म हो

एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने यात्रा की रवानगी के अवसर पर भारत और पाकिस्तान की सरकारों के सामने कुछ महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं:

20 डॉलर की फीस: पाकिस्तान सरकार द्वारा करतारपुर साहिब दर्शन के लिए ली जाने वाली 20 डॉलर की फीस को तुरंत समाप्त किया जाए।

पासपोर्ट की शर्त: करतारपुर कॉरिडोर के माध्यम से दर्शन के लिए पासपोर्ट की अनिवार्यता को खत्म कर आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र को मान्यता दी जाए।

कॉरिडोर को सुगम बनाना: सरकारों को सिखों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए दर्शन की प्रक्रिया को और सरल बनाना चाहिए।

श्रद्धालुओं के लिए निर्देश

एसजीपीसी सचिव बलविंदर सिंह काहलवां ने जानकारी दी कि जो श्रद्धालु किन्हीं कारणों से वीरवार को अपने पासपोर्ट प्राप्त नहीं कर सके थे, उन्हें रवानगी से पहले मौके पर पासपोर्ट उपलब्ध कराए गए हैं। सुरक्षा और सुविधा के लिए एसजीपीसी के सेवादार भी जत्थे के साथ जा रहे हैं।