Prabhat Vaibhav,Digital Desk : दरभंगा जिले में बर्ड फ्लू के मामलों की पुष्टि के बाद राजधानी पटना में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन और पशुपालन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते सावधानी बरती जाए तो संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है और मानव स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सकता है।
क्या है बर्ड फ्लू और क्यों जरूरी है सावधानी
बिहार पशुपालन विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. कौशलेंद्र कुमार के अनुसार बर्ड फ्लू, जिसे एवियन इन्फ्लुएंजा भी कहा जाता है, एक संक्रामक वायरल बीमारी है। यह मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करती है, लेकिन संक्रमित पक्षियों के सीधे संपर्क में आने पर इंसानों के लिए भी जोखिम पैदा हो सकता है। खासतौर पर मुर्गी, बतख और टर्की जैसे घरेलू पक्षियों में यह वायरस तेजी से फैलता है।
संक्रमण कैसे फैलता है
विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमित पक्षियों के मल, पंख, लार या अन्य स्राव के संपर्क में आने से यह बीमारी दूसरे पक्षियों तक पहुंचती है। यही कारण है कि पोल्ट्री फार्म और ग्रामीण क्षेत्रों में मुर्गी पालन करने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
पोल्ट्री फार्म और ग्रामीण क्षेत्रों में क्या करें
डॉ. कौशलेंद्र कुमार ने बताया कि साफ-सफाई बर्ड फ्लू से बचाव का सबसे अहम तरीका है। पोल्ट्री फार्म में नियमित रूप से कीटाणुनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाना चाहिए। बाहरी लोगों की आवाजाही सीमित रखें और फार्म में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए मास्क, दस्ताने और जूते पहनना अनिवार्य किया जाए।
खाने-पीने को लेकर क्या है सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी तरह से पका हुआ चिकन और अंडा पूरी तरह सुरक्षित होता है। कच्चे मांस या अधपके अंडों के सेवन से बचना चाहिए। रसोई में स्वच्छता बनाए रखना और मांस को सही तापमान पर पकाना जरूरी है।
संक्रमण के संकेत मिलें तो तुरंत दें सूचना
यदि किसी पक्षी में अचानक मौत, सुस्ती, कमजोरी या अंडा उत्पादन में गिरावट दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत पशुपालन विभाग या नजदीकी पशु चिकित्सक को सूचना देने की सलाह दी गई है।
घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत
डॉ. कौशलेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि बर्ड फ्लू को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन लापरवाही भी नहीं बरतनी चाहिए। समय पर सूचना, सही प्रबंधन और जन-जागरूकता से इस बीमारी के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
पक्षियों में बर्ड फ्लू के प्रमुख लक्षण
पक्षियों की अचानक मृत्यु, सुस्ती और कमजोरी के साथ खाना-पानी कम करना, अंडा उत्पादन में तेजी से गिरावट या पतले खोल वाले अंडे, नाक, आंख या चोंच से स्राव और आंखों में सूजन, गलगंड का नीला या बैंगनी होना, सांस लेने में दिक्कत, खांसी और छींक, हरे या सफेद रंग का दस्त, गर्दन का टेढ़ा होना या लड़खड़ाकर चलना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे संकेत मिलने पर पक्षियों को तुरंत अलग रखें, मृत पक्षियों को न छुएं और स्थानीय प्रशासन को सूचित करें।




