Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारत की बेटियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की दिशा में केंद्र सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के अजमेर से देशव्यापी HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान का भव्य शुभारंभ किया। इस अभियान के तहत बिहार समेत पूरे देश की 14 साल की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव का टीका पूरी तरह मुफ्त लगाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने इसे 'साइलेंट किलर' के खिलाफ एक निर्णायक सुरक्षा कवच करार दिया है।
किसे और कैसे लगेगा यह 'सुरक्षा कवच'?
स्वास्थ्य प्रबंधक अमित कुमार चंचल के अनुसार, इस विशेष अभियान का लाभ उन किशोरियों को मिलेगा जिन्होंने अपना 14वां जन्मदिन मना लिया है, लेकिन अभी 15 वर्ष की नहीं हुई हैं।
खुराक: इस अभियान के तहत 14 साल की बच्चियों को टीके की केवल एक ही खुराक दी जाएगी, जो जीवनभर इस जानलेवा संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है।
स्थान: यह टीकाकरण सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और प्रखंड स्तर के केंद्रों पर उपलब्ध होगा।
U-WIN डिजिटल प्लेटफॉर्म: पंजीकरण से प्रमाणपत्र तक सब ऑनलाइन
अभियान को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग U-WIN डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहा है।
पंजीकरण: अभिभावक अपनी बेटियों का पंजीकरण घर बैठे मोबाइल ऐप के जरिए या सीधे टीकाकरण केंद्र पर जाकर करा सकते हैं।
प्रमाणपत्र: टीका लगने के तुरंत बाद डिजिटल प्रमाणपत्र (Digital Certificate) प्राप्त किया जा सकेगा।
सहमति: सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह टीकाकरण पूरी तरह स्वैच्छिक है और इसके लिए माता-पिता की लिखित सहमति अनिवार्य होगी।
'साइलेंट किलर' है सर्वाइकल कैंसर: बचाव ही एकमात्र इलाज
डॉ. संदीप भारद्वाज ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती चरणों में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए इसे 'साइलेंट किलर' कहा जाता है।
लक्षण: बीमारी बढ़ने पर वजन कम होना, पैरों में सूजन, पीठ दर्द या असामान्य रक्तस्राव जैसे संकेत मिलते हैं।
जोखिम: आमतौर पर यह बीमारी 35 से 45 वर्ष की महिलाओं को अपनी चपेट में लेती है। कम उम्र में (14 वर्ष) टीकाकरण करने से इस कैंसर के जोखिम को लगभग 90% से अधिक तक कम किया जा सकता है।
टीके के बाद सामान्य प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, टीके के बाद मामूली दर्द, हल्का बुखार या इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन जैसे सामान्य लक्षण दिख सकते हैं। ये लक्षण पूरी तरह सामान्य हैं और दो-तीन दिनों में स्वतः ठीक हो जाते हैं, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है।




