Prabhat Vaibhav,Digital Desk : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 2027 विधानसभा चुनावों के लिए अपना अभियान नोएडा से शुरू करने जा रहे हैं। पहले नोएडा उनके लिए अशुभ माना जाता था, लेकिन अब सपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थिति मजबूत करने और गुर्जर समुदाय को जोड़ने के लिए इसी जिले को प्राथमिकता दे रही है।
गुर्जर सम्मेलन से होगी स्थिति मजबूत
मार्च के पहले हफ्ते में दादरी के मकोड़ा गांव में सपा एक बड़ा गुर्जर सम्मेलन आयोजित करेगी, जिसमें 142 विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में गुर्जर सम्मेलन में दलितों को भी शामिल करने की रणनीति तैयार की।
सपा इस सम्मेलन के जरिए कई निशाने साधना चाहती है। पश्चिमी यूपी में यादवों की संख्या कम होने के कारण सपा मुसलमानों के साथ गुर्जर, अन्य पिछड़े वर्ग और दलित वोट बैंक को भी अपने पाले में लाने का प्रयास कर रही है।
बीजेपी से नाराज गुर्जर, सपा का फायदा
गुर्जर समुदाय वर्तमान में बीजेपी से नाराज है। उनका कहना है कि सरकार और पार्टी संगठन में उनकी आबादी के अनुसार प्रतिनिधित्व नहीं मिला। पहले सरकारों में गुर्जरों के मंत्री अधिक थे, लेकिन मौजूदा समय में सिर्फ एक राज्य मंत्री है। सपा अब इस नाराजगी का फायदा उठाकर गुर्जरों को लुभाने की कोशिश कर रही है।
पश्चिमी यूपी में गुर्जर और जाटों की संख्या
पश्चिमी यूपी में जाट और गुर्जर बड़ी संख्या में हैं। 14 लोकसभा सीटों में से गुर्जरों ने सात सीटों का प्रतिनिधित्व किया है, जिसमें गौतम बुद्ध नगर, मेरठ, बागपत, अमरोहा, कैराना, सहारनपुर और बिजनौर शामिल हैं। गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिश्चंद्र भाटी का कहना है कि गुर्जरों की संख्या कई राज्यों में अधिक होने के बावजूद राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम है।
अंधविश्वास के बावजूद नोएडा से अभियान
2012 में विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने अपनी साइकिल रैली गौतम बुद्ध नगर से शुरू की थी। तब से एक अंधविश्वास था कि जो मुख्यमंत्री नोएडा जाएगा, वह छह महीने के अंदर कुर्सी खो देगा। इसी कारण उन्होंने अपने पांच साल के कार्यकाल में नोएडा नहीं जाने का निर्णय लिया। 2027 में, वे नोएडा से अभियान शुरू करके सत्ता हासिल करने की योजना बना रहे हैं।




