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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पूर्व क्रिकेटर और दिग्गज नेता नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने अपनी नई राजनीतिक पारी का आगाज कर दिया है। कांग्रेस से निष्कासन के बाद पिछले काफी समय से कयास लगाए जा रहे थे कि वह वापस भाजपा का दामन थाम सकती हैं, लेकिन उन्होंने 'भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी' (BRP) बनाकर सबको चौंका दिया है। डॉ. सिद्धू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी इस नई पार्टी की घोषणा करते हुए साफ कर दिया कि अब वह न तो कांग्रेस के साथ हैं और न ही भाजपा के पास लौटेंगी।

क्यों टूटा कांग्रेस और भाजपा से नाता?

डॉ. नवजोत कौर सिद्धू का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 2016 में उन्होंने भाजपा को अलविदा कहा था और कांग्रेस का हाथ थामा था। हालांकि, बीते कुछ समय से उनके और पार्टी आलाकमान के बीच तल्खियां काफी बढ़ गई थीं। फरवरी 2026 में कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। राजनीति के जानकारों का मानना है कि सिद्धू परिवार और कांग्रेस के बीच यह दरार अनुशासनहीनता और आपसी खींचतान का नतीजा थी। अब अपनी अलग पार्टी बनाकर डॉ. सिद्धू ने पंजाब में एक तीसरे विकल्प की ओर इशारा किया है।

संतों की सेवा से सीधे सियासत के मैदान तक

कुछ समय पहले तक डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के सुर बदले-बदले नजर आ रहे थे। मार्च 2026 में खमाणों स्थित संत रामपाल आश्रम के दौरे के दौरान उन्होंने राजनीति छोड़कर संतों की सेवा करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने दहेज रहित विवाह और अंगदान जैसे सामाजिक कार्यों में रुचि दिखाते हुए अध्यात्म की ओर झुकाव का संकेत दिया था। लेकिन सोमवार देर रात हुई उनकी घोषणा ने यह साबित कर दिया कि वह पंजाब की राजनीति में अभी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

'भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी' का मुख्य उद्देश्य

डॉ. सिद्धू ने अपनी नई पार्टी के विजन को साझा करते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से लोग परेशान हैं और नेताओं के कामकाज के तरीके में बदलाव की सख्त जरूरत है। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी 'भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी' का मुख्य लक्ष्य समाज में न्याय, शांति और प्रेम के जरिए सकारात्मक बदलाव लाना है। डॉ. सिद्धू के मुताबिक, यह पार्टी लोगों को उनके अधिकार दिलाने और राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत विकल्प पेश करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगी। पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले इस कदम ने राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह से गरमा दिया है।