Prabhat Vaibhav, Digital Desk : राजधानी की राजनीति में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 'झाड़ू' का साथ छोड़कर 'कमल' थाम लिया। चड्ढा ने न केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण की, बल्कि उनके इस कदम ने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है। इसे 2026 के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से एक ऐतिहासिक फेरबदल माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर जताया अटूट विश्वास
बीजेपी मुख्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान राघव चड्ढा ने आधिकारिक तौर पर पार्टी की सदस्यता ली। इस मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की जमकर तारीफ की। चड्ढा ने कहा कि उन्हें पीएम मोदी के नेतृत्व और उनकी विकासपरक नीतियों पर पूरा भरोसा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश के भविष्य के लिए बीजेपी ही एकमात्र विकल्प है, जो सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण कर सकती है।
8 और सांसदों के साथ होने का दावा, AAP की मुश्किलें बढ़ीं
सिर्फ राघव चड्ढा का पाला बदलना ही आम आदमी पार्टी के लिए चिंता का विषय नहीं है, बल्कि उनके द्वारा किया गया दावा पार्टी की नींव हिला सकता है। चड्ढा ने मीडिया से मुखातिब होते हुए दावा किया कि उनके साथ आम आदमी पार्टी के 8 अन्य सांसद भी हैं। अगर यह दावा सच साबित होता है, तो राज्यसभा में आप (AAP) की स्थिति बेहद कमजोर हो सकती है और पार्टी के भीतर एक बड़ी फूट पड़ना तय है।
युवा चेहरे के आने से बीजेपी को मिलेगी मजबूती
राघव चड्ढा को राजनीति का एक प्रखर और शिक्षित चेहरा माना जाता है। उनके बीजेपी में शामिल होने से पार्टी को युवाओं के बीच अपनी पैठ और मजबूत करने में मदद मिलेगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राघव चड्ढा का यह कदम दिल्ली और पंजाब की राजनीति में नए समीकरण पैदा करेगा। फिलहाल आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के अनुसार पार्टी इस 'बगावत' से सकते में है।
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