Prabhat Vaibhav,Digital Desk : होली के त्यौहार से ठीक पहले बिहार के सियासी गलियारों में जो हलचल शुरू हुई थी, आज उसका सबसे निर्णायक दिन है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही अटकलों के बीच आज सबकी नजरें चुनावी नतीजों और उसके बाद की पटकथा पर टिकी हैं। सियासी पंडितों के बीच इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि यदि नीतीश कुमार राज्यसभा की दहलीज पार करते हैं, तो वह मुख्यमंत्री की कुर्सी कब और किसके लिए छोड़ेंगे? बिहार की राजनीति में यह कोई सामान्य घटनाक्रम नहीं है, बल्कि एक युग के परिवर्तन की आहट के रूप में देखा जा रहा है।
सत्ता के गलियारों में सवाल: क्या दिल्ली जाएंगे नीतीश?
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा ने विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के भीतर भी हलचल मचा दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या 'सुशासन बाबू' अब अपनी पारी का अंत देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद में करना चाहते हैं? यदि वह राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होते हैं, तो संवैधानिक रूप से उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा। हालांकि, इतिहास गवाह है कि नीतीश कुमार अपनी रणनीति से हमेशा सबको चौंकाते रहे हैं। आज का दिन यह स्पष्ट कर देगा कि बिहार की कमान भविष्य में किसके हाथ में होगी और नीतीश का अगला ठिकाना क्या होगा।
रोचक इतिहास: जब सांसद होकर भी बने थे विधायक
नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर का एक बेहद दिलचस्प अध्याय उनके संसद और विधानसभा के बीच के रिश्तों से जुड़ा है। कम ही लोग जानते हैं कि नीतीश कुमार एक समय सांसद चुने जाने के बाद भी बिहार विधानसभा के सदस्य (विधायक) बने रहे थे। हालांकि, उस समय की परिस्थितियां और कानूनी पेच कुछ और थे। राजनीति में अक्सर पदों का यह तालमेल चर्चा का विषय रहता है, लेकिन वर्तमान हालात में यदि वह राज्यसभा जाते हैं, तो उन्हें राज्य की विधायकी और मुख्यमंत्री की कुर्सी दोनों से मोह छोड़ना होगा।
कुर्सी छोड़ने की तारीख पर मंथन शुरू
पटना से लेकर दिल्ली तक इस बात पर मंथन जारी है कि कुर्सी छोड़ने का मुहूर्त क्या होगा। क्या होली के बाद बिहार में कोई नया चेहरा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेगा? जेडीयू और भाजपा के गठबंधन के बीच इस फेरबदल को लेकर खींचतान और समझौतों का दौर भी पर्दे के पीछे जारी है। नीतीश कुमार के करीबी सूत्रों का कहना है कि वे किसी भी फैसले को लेने से पहले गठबंधन के भविष्य और अपनी पार्टी की पकड़ को सुनिश्चित करना चाहते हैं। फिलहाल, पूरा बिहार आज के इस 'सियासी धमाके' के अंतिम परिणाम का इंतजार कर रहा है।
बिहार की सियासत में 'नीतीश' फैक्टर का अंत या नई शुरुआत?
बिहार की राजनीति पिछले दो दशकों से नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमती रही है। उनका राज्यसभा जाना न केवल एक नेता का प्रस्थान होगा, बल्कि राज्य के समीकरणों को पूरी तरह से बदल देगा। आरजेडी और अन्य विपक्षी दल इस स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं, ताकि बदलते समीकरणों में अपनी जमीन तलाश सकें। यह देखना वाकई रोचक होगा कि क्या नीतीश कुमार सांसद बनकर दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होंगे या फिर पर्दे के पीछे से बिहार की सत्ता को नियंत्रित करेंगे।
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