Prabhat Vaibhav,Digital Desk : देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध धामों और उनसे जुड़े मंदिरों की मर्यादा को बनाए रखने के लिए श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने एक अत्यंत कड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अब समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में 'गैर-सनातनियों' का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस फैसले को मंदिर की शुचिता और प्राचीन परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सनातन धर्म की मर्यादा के लिए उठाया गया सख्त कदम
मंदिर समिति की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के साथ-साथ उनके अधीन आने वाले सभी छोटे-बड़े मंदिरों में केवल सनातन धर्म को मानने वाले श्रद्धालुओं को ही प्रवेश की अनुमति होगी। समिति का तर्क है कि तीर्थस्थलों की पवित्रता और धार्मिक मान्यताओं को अक्षुण्ण रखने के लिए यह अनिवार्य हो गया था। पिछले कुछ समय से तीर्थ क्षेत्रों में बाहरी और असामाजिक तत्वों की संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतों के बाद यह मांग जोर पकड़ रही थी, जिस पर अब आधिकारिक मुहर लगा दी गई है।
मंदिर परिसर में अब 'डिजिटल शोर' पर लगाम, फोन भी हुआ बैन
प्रवेश वर्जित करने के साथ ही मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं के लिए एक और महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी की है। अब मंदिर के गर्भगृह और संवेदनशील परिसर के भीतर मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। अक्सर देखा जाता था कि लोग भक्ति की जगह फोटो खींचने और रील बनाने में अधिक व्यस्त रहते थे, जिससे मंदिर की गरिमा और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती थी। समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भक्त मोबाइल के साथ पकड़ा जाता है, तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा और चेकिंग के लिए तैनात होंगे विशेष दस्ते
इन नए नियमों को कड़ाई से लागू करने के लिए मंदिर समिति स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रही है। प्रवेश द्वारों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति परिसर में दाखिल न हो सके। इसके साथ ही साइन बोर्ड के जरिए श्रद्धालुओं को नए नियमों की जानकारी दी जाएगी। मंदिर समिति का कहना है कि भक्त शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण में दर्शन कर सकें, यही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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