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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और तनाव के बीच भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर एक बेहद सुखद खबर आई है। भारतीय ध्वज वाला विशाल एलपीजी (LPG) टैंकर 'ग्रीन सानवी' (Green Sanvi) सफलतापूर्वक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर चुका है। लगभग 44,000 मीट्रिक टन रसोई गैस लेकर यह जहाज अब तेजी से मुंबई की ओर बढ़ रहा है, जिसके 6 अप्रैल 2026 तक पहुंचने की उम्मीद है।

ग्रीन सानवी: युद्ध के बीच 'लाइफलाइन'

ईरान और इजरायल-अमेरिका तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में तब्दील हो चुका है। ऐसे में 'ग्रीन सानवी' का सुरक्षित निकलना भारत की कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।

पेलोड: टैंकर में 44,000 मीट्रिक टन एलपीजी लोड है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मात्रा युद्ध पूर्व की स्थिति में भारत की लगभग आधे दिन की कुल खपत के बराबर है।

वर्तमान स्थिति: शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह जहाज फारस की खाड़ी में लंगर डालने के बाद ईरानी जलक्षेत्र से होते हुए अब अरब सागर में प्रवेश कर चुका है।

अगला पड़ाव: दो और टैंकर—'ग्रीन आशा' और 'जग विक्रम'—भी कतार में हैं और अगले कुछ दिनों में इनके भी भारत पहुंचने की संभावना है।

ईरान-भारत संबंधों का असर: भारतीय जहाजों को विशेष छूट

युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ा नियंत्रण कर लिया है और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर 'टोल' वसूलना शुरू कर दिया है। हालांकि, भारत के लिए स्थिति अलग है:

सातवां सफल टैंकर: 'ग्रीन सानवी' युद्ध शुरू होने के बाद इस रास्ते से सुरक्षित गुजरने वाला 7वां भारतीय एलपीजी टैंकर बन गया है।

मित्र देशों की सूची: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान जैसे 'मित्र देशों' के जहाजों के लिए खुला है।

प्रतिबंध: अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों के जहाजों के लिए यह रास्ता पूरी तरह से चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

रणनीतिक महत्व: अभी भी फंसे हैं 17 जहाज

भले ही 'ग्रीन सानवी' निकल गया हो, लेकिन संकट पूरी तरह टला नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, अभी भी भारतीय ध्वज वाले 17 जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और ईरान से क्लीयरेंस का इंतजार कर रहे हैं। भारत सरकार और विदेश मंत्रालय लगातार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं ताकि देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बाधित न हो।

विशेषज्ञों की राय:

युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर एलपीजी की आपूर्ति में कमी आई है और कीमतें बढ़ी हैं। ऐसे में भारतीय जहाजों का निरंतर स्वदेश पहुंचना घरेलू बाजार में एलपीजी की कीमतों को स्थिर रखने और किल्लत को रोकने में मदद करेगा।