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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महाशक्तियों के बीच जारी खींचतान ने एक बार फिर परमाणु युद्ध (Nuclear War) की चर्चा तेज कर दी है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि दुनिया में मौजूद हजारों परमाणु बम क्या पूरी पृथ्वी को टुकड़ों में तोड़ सकते हैं? वैज्ञानिकों ने इस सवाल का जो जवाब दिया है, वह न केवल चौंकाने वाला है बल्कि मानवता के भविष्य के प्रति डराने वाला भी है।

12,000 बमों का जखीरा, लेकिन 100 ही काफी हैं!

हैरानी की बात यह है कि दुनिया भर के देशों (मुख्यतः अमेरिका और रूस) के पास वर्तमान में 12,121 से अधिक परमाणु हथियार हैं। लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि आधुनिक मानव सभ्यता को पूरी तरह से मिटाने के लिए पूरी दुनिया को उड़ाने की जरूरत नहीं है; इसके लिए महज 100 परमाणु बम ही काफी हैं।

'न्यूक्लियर विंटर' (Nuclear Winter): मौत का वह अंधेरा

वैज्ञानिकों के अनुसार, परमाणु बम से होने वाली तत्काल तबाही तो बस शुरुआत होगी। असली विनाश तब शुरू होगा जब 100 बमों के विस्फोट से निकलने वाला लाखों टन काला धुआं और राख वायुमंडल की ऊपरी परत (स्ट्रैटोस्फीयर) में फैल जाएगी।

सूरज की रोशनी का बंद होना: यह काला धुआं सूरज की किरणों को पृथ्वी तक पहुंचने से रोक देगा।

तापमान में गिरावट: सूरज की गर्मी न मिलने से पृथ्वी का तापमान अचानक शून्य से कई डिग्री नीचे गिर जाएगा।

वैश्विक भुखमरी: खेती पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। बारिश नहीं होगी और फसलें नहीं उगेंगी, जिससे दुनिया की अधिकांश आबादी भूख से मर जाएगी। इसी स्थिति को विज्ञान में 'परमाणु शीतकाल' (Nuclear Winter) कहा जाता है।

हिरोशिमा से 3,000 गुना ज्यादा घातक हैं आज के बम

1945 में हिरोशिमा पर गिराया गया 'लिटिल बॉय' आज के आधुनिक हाइड्रोजन बमों के सामने एक खिलौने जैसा है। वर्तमान में मौजूद कुछ थर्मोन्यूक्लियर बम हिरोशिमा वाले बम से 3,000 गुना अधिक शक्तिशाली हैं। यह शस्त्रागार इतना विशाल है कि यह मानवता को एक बार नहीं, बल्कि कई बार मिटाने की क्षमता रखता है।

क्या पृथ्वी (Planet Earth) नष्ट हो जाएगी?

यहाँ एक दिलचस्प वैज्ञानिक तथ्य यह है कि परमाणु युद्ध से इंसान और सभ्यता तो खत्म हो सकती है, लेकिन पृथ्वी एक ग्रह के रूप में बची रहेगी।

पृथ्वी को भौतिक रूप से टुकड़ों में तोड़ने के लिए आज मौजूद सभी 12,000 बमों की संयुक्त शक्ति से भी अरबों गुना अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी।

यानी, परमाणु युद्ध के बाद पृथ्वी पर जीवन (पेड़-पौधे, जीव-जंतु और इंसान) भले ही नष्ट हो जाए, लेकिन अंतरिक्ष में पृथ्वी एक निर्जन पत्थर के गोले की तरह घूमती रहेगी।

विकिरण का कहर (Radiation Effects)

विस्फोट और भुखमरी के अलावा, जीवित बचे लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती रेडियोधर्मी विकिरण (Radioactive Radiation) होगी। यह हवा के जरिए उन कोनों तक भी पहुंच जाएगा जहां कोई बम नहीं गिराया गया है। यह विकिरण पीढ़ियों तक इंसानों के डीएनए (DNA) को खराब करेगा और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बनेगा।