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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : पश्चिम एशिया (Middle East) में शांति स्थापित करने की कोशिशों को तब गहरा झटका लगा, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपना लिया। पाकिस्तान की राजधानी में प्रस्तावित 'इस्लामाबाद 2.0' शांति वार्ता से ठीक पहले ट्रंप के 'बम विस्फोट' वाले बयान ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। एक ओर जहां कूटनीतिक रास्तों से युद्ध रोकने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई की धमकियों ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।

ट्रंप का 'विनाशकारी' अल्टीमेटम: "परमाणु हथियार नहीं सहेंगे"

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 'पीबीएस न्यूज़' को दिए साक्षात्कार में ईरान को सीधी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा, "यदि ईरान के साथ चल रहा अस्थायी युद्धविराम टूटता है, तो वहां फिर कोई बात नहीं होगी, सीधे बम गिरना शुरू होंगे।" * मुख्य शर्त: ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका की पहली और आखिरी शर्त यही है कि ईरान किसी भी सूरत में परमाणु हथियार विकसित न करे।

जेडी वैंस की भूमिका: शांति वार्ता के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंचने वाला है, लेकिन ट्रंप के तेवरों ने इस यात्रा के उद्देश्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ईरान का अविश्वास: "दबाव में नहीं झुकेंगे"

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजकशियन ने ट्रंप की धमकियों पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि अमेरिका का रुख हमेशा विरोधाभासी रहा है।

शर्त: ईरान का कहना है कि वार्ता तभी सार्थक होगी जब अमेरिका अपने पुराने वादों को पूरा करेगा।

विकास पर ध्यान: हालांकि पजकशियन ने संकेत दिए हैं कि ईरान अब युद्ध को समाप्त कर देश के पुनर्निर्माण पर ध्यान देना चाहता है, लेकिन वे किसी भी 'धमकी' के आगे घुटने टेकने को तैयार नहीं हैं।

वैश्विक हलचल: चीन और ब्रिटेन ने संभाला मोर्चा

तनाव बढ़ता देख दुनिया की अन्य महाशक्तियां भी सक्रिय हो गई हैं:

चीन (शी जिनपिंग): चीनी राष्ट्रपति ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस से बात की और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। चीन का मानना है कि केवल संवाद ही एकमात्र समाधान है।

ब्रिटेन (यवेट कूपर): ब्रिटिश विदेश सचिव ने जापान में जापानी विदेश मंत्री से मुलाकात की। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द से जल्द व्यापार के लिए खोलने की अपील की है।

इस्लामाबाद 2.0 वार्ता के मुख्य बिंदु (Quick Summary)

क्या है वार्ता: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता में दूसरी उच्च-स्तरीय बैठक।

विवाद की जड़: ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले।

ट्रंप का रुख: युद्धविराम टूटा तो सीधे सैन्य कार्रवाई (बमबारी) की धमकी।

वैश्विक मांग: ब्रिटेन और चीन चाहते हैं कि समुद्री व्यापार मार्ग (Trade Routes) सुरक्षित रहें।