Prabhat Vaibhav, Digital Desk : ट्राईसिटी (चंडीगढ़-पंचकूला-मोहाली) के सबसे बड़े और प्रमुख मॉल्स में से एक वीआर पंजाब (VR Punjab) को अचानक बंद किए जाने से शहर में हड़कंप मच गया है। मॉल प्रबंधन ने 3 अप्रैल को आए भूकंप से बिल्डिंग की संरचना (Structure) को नुकसान पहुंचने का हवाला देकर इसे असुरक्षित घोषित कर बंद कर दिया है। हालांकि, आउटलेट संचालकों और विशेषज्ञों ने इस तर्क पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिससे यह मामला अब विवादों में घिर गया है।
भूकंप की तीव्रता पर उठे सवाल
मॉल प्रबंधन का दावा है कि भूकंप के कारण इमारत अब सुरक्षित नहीं रही। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि 3.5 से 4.0 तीव्रता का भूकंप इतना शक्तिशाली नहीं होता कि वीआर पंजाब जैसी आधुनिक और मजबूत इमारत को गंभीर नुकसान पहुंचा सके।
आउटलेट संचालकों का तर्क:
देरी से कार्रवाई: यदि इमारत वाकई असुरक्षित थी, तो भूकंप के तुरंत बाद कदम क्यों नहीं उठाया गया? 15 दिन बाद अचानक नोटिस देना संदेह पैदा करता है।
समय की कमी: 18 अप्रैल को नोटिस जारी कर 20 अप्रैल से मॉल खाली करने का आदेश दिया गया। मात्र 24 से 48 घंटे का समय किसी भी बड़े ब्रांड के लिए अपना स्टॉक और इंफ्रास्ट्रक्चर समेटने के लिए नाकाफी है।
रोजगार और आर्थिक निवेश पर बड़ा प्रहार
मॉल बंद होने से इसमें संचालित सैकड़ों नेशनल और इंटरनेशनल ब्रांड्स (जैसे कैफे कॉफी डे, कोस्टा कॉफी, लिवाइस आदि) के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
लाखों का निवेश: आउटलेट प्रबंधकों के अनुसार, उन्होंने इंटीरियर, मशीनरी और स्टॉक पर लाखों रुपये खर्च किए हैं। अचानक बंद होने से भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
कर्मचारियों में डर: मॉल में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को अपनी नौकरी जाने या दूर-दराज के शहरों में ट्रांसफर होने का डर सता रहा है। स्टाफ का कहना है कि प्रबंधन ने उनके भविष्य के बारे में कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है।
मुआवजे की मांग और कानूनी तैयारी
सोमवार को दिनभर मॉल प्रबंधन और आउटलेट संचालकों के बीच बैठकों का दौर चला, जो बेनतीजा रहा।
कंपनसेशन की मांग: कई कंपनियों ने अचानक हुए इस नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की है।
कानूनी नोटिस: कुछ बड़े ब्रांड्स ने इस एकतरफा फैसले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी शुरू कर दी है।
प्रमुख प्रतिक्रियाएं
"24 घंटे में आउटलेट खाली करना असंभव है। हमने लाखों का निवेश किया है, लेकिन मुआवजे पर प्रबंधन चुप है।"
— सुनील, रीजनल मैनेजर, कैफे कॉफी डे
"अचानक लिए गए इस निर्णय से हमारी नौकरी पर संकट आ गया है। हमें नहीं पता कि कंपनी हमें कहां ट्रांसफर करेगी।"
— राजन, स्टोर इंचार्ज, लीवाइस




